केपलर में रिफाइनिंग, सप्लाई और मॉडलिंग के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार, अगर सरकार की ओर से कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता है तो भारत रूस से रोजाना करीब 11 से 13 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता रहेगा।
गौरतलब है कि अमेरिका की ओर से 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की धमकी ने इस मुद्दे को नई गंभीरता दी है। मौजूद जानकारी के अनुसार, रितोलिया का कहना है कि इतनी बड़ी दंडात्मक कार्रवाई भारत की खरीद नीति को पूरी तरह बदल सकती है और ऐसे में केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि रूस से तेल को लेकर उसकी आधिकारिक नीति क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक सरकार खुद आयात रोकने का निर्देश नहीं देती, तब तक रूसी तेल की खरीद अचानक बंद करना आसान नहीं है, क्योंकि रिफाइनरियां नीति संकेतों के आधार पर ही फैसले लेती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत के पास रूसी कच्चे तेल के विकल्प मौजूद हैं। बता दें कि मध्य पूर्व के देशों से अधिकांश जरूरतें पूरी की जा सकती हैं और इसके अलावा अमेरिका तथा पश्चिमी अफ्रीका से भी आपूर्ति संभव है। हालांकि, रितोलिया ने आगाह किया कि ऐसा करने पर भारत को सस्ता यानी डिस्काउंट वाला रूसी तेल छोड़ना पड़ेगा, जिससे औसत कच्चे तेल की कीमत बढ़ेगी और कुल आयात बिल पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सप्लाई में किसी तरह का बड़ा व्यवधान आता है तो भारत को दीर्घकालिक अनुबंधों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा, सप्लायरों में विविधता लानी होगी और रिफाइनरियों को अपनी तकनीकी क्षमता के हिसाब से ऑप्टिमाइज करना होगा। इससे संकेत मिलता है कि अस्थिर वैश्विक तेल बाजार में जोखिम और लागत को संतुलित करने के लिए भारत की रणनीति में बदलाव हो सकता है।
गौरतलब है कि यह चर्चा ऐसे समय तेज हुई है, जब अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े एक द्विदलीय विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून के तहत उन देशों को दंडित किया जा सकेगा, जो रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं, जिनमें भारत का नाम भी शामिल है। यह कदम यूक्रेन पर 2022 में हुए रूसी हमले के बाद शांति वार्ता न होने के संदर्भ में उठाया जा रहा है।
लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने का मजबूत हथियार देगा, ताकि वे रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करें, जिससे युद्ध को मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगाई जा सके।
केपलर के विश्लेषक सुमित रितोलिया का मानना है कि अगर यह कानून लागू होता है तो भारत की कच्चे तेल की सोर्सिंग रणनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। हालांकि, मौजूदा स्तर पर आयात जारी रखने से भारत को कीमतों में छूट और रिफाइनरियों के स्थिर संचालन का फायदा मिलता रहता है, जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
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रूस से तेल खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पोलैंड ने खुलकर नई दिल्ली का समर्थन किया है। बता दें कि पोलैंड ने कहा है कि वह भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात में की गई कटौती से संतुष्ट है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में अमेरिका भारत पर लगातार दबाव बना रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में भारत को लेकर सख्त रुख अपनाया है और रूस से तेल खरीद जारी रखने की स्थिति में भारी दंडात्मक शुल्क लगाने की चेतावनी दी है। मौजूद जानकारी के अनुसार, इन शुल्कों की दर 500 प्रतिशत तक जा सकती है, जिसे लेकर भारत-अमेरिका संबंधों में खटास बढ़ती दिख रही है।
पेरिस में बुधवार को वीमर ट्रायंगल समूह की बैठक के बाद पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल आयात घटाने का कदम स्वागतयोग्य है, क्योंकि इससे रूस की युद्ध क्षमता को मिलने वाली आर्थिक मदद सीमित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर भारत के साथ आगे चर्चा की जा सकती है और वह अगले सप्ताह भारत दौरे के दौरान इस पर विस्तार से बात करेंगे हैं।
इस बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हुए, जबकि फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो और जर्मनी के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। गौरतलब है कि यह भारत की वीमर ट्रायंगल प्रारूप में पहली औपचारिक भागीदारी रही है, जिसे यूरोप के प्रमुख देशों के साथ भारत के बढ़ते संवाद के रूप में देखा जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, वीमर ट्रायंगल की स्थापना 1991 में फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड ने यूरोपीय एकीकरण, राजनीतिक संवाद, सुरक्षा सहयोग और विशेष रूप से रूस-यूक्रेन जैसे मुद्दों पर समन्वय के लिए की थी। भारत की इस मंच पर मौजूदगी को यूरोपीय देशों के साथ रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
दूसरी ओर, भारत और अमेरिका के रिश्तों में हाल के महीनों में तनाव बढ़ा है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप पहले भी भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगा चुके हैं और अब एक द्विदलीय विधेयक को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत रूस से तेल या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अनुसार, इस विधेयक पर जल्द ही मतदान संभव है।
गौरतलब है कि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर उनकी नाराजगी की जानकारी है और जरूरत पड़ी तो शुल्क बहुत तेजी से बढ़ाए जा सकते हैं। इससे पहले भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क और रूसी तेल खरीद से जुड़ा अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाया गया था, जिससे कुछ उत्पादों पर कुल टैक्स 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
कुल मिलाकर, रूस से तेल आयात को लेकर भारत की संतुलित नीति एक ओर जहां घरेलू ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक कूटनीति और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों की परीक्षा भी बन गई है, जिसमें पोलैंड का समर्थन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा हैं।
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