BRICS Gala Dinner Menu: PM मोदी के डिनर में दिखा भारत का शाही स्वाद, जलेबी से गुच्ची तक खास रहा मेन्यू
नई दिल्ली। भारत मंडपम में शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयोजित भव्य डिनर में BRICS देशों के नेता और दूसरे विदेशी मेहमान शामिल हुए। BRICS Summit के पहले दिन की व्यस्त बैठकों के बाद मेहमानों के लिए खास भारतीय मेन्यू तैयार किया गया। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक स्वाद को आधुनिक अंदाज में पेश किया गया।
स्टार्टर में खास
डिनर की शुरुआत खंडवी मिलेफ्यू से हुई। इसे सरसों, नारियल और करी पत्ते के तड़के के साथ तैयार किया गया था। इसके साथ केसर आम, माइक्रोग्रीन्स और दही की ड्रेसिंग परोसी गई। इसके बाद खुंब गलौटी स्टार्टर था, जिसमें पैन-ग्रिल्ड मशरूम कबाब को पुदीने के मोती और शीर्माल ब्रेड के साथ परोसा गया।
मेनकोर्स की डिशेस
मुख्य भोजन में पनीर लबाबदार और गुच्ची मार्मिक खास आकर्षण रहे। पनीर को शैलोट और टमाटर की गाढ़ी ग्रेवी में पकाया गया था, जबकि हिमालयी गुच्ची मशरूम और एस्पैरेगस को केसर, किशमिश और जेमरा बादाम के साथ तैयार किया गया।
मेन्यू में कैरेट बीन पोरियल भी शामिल था, जिसमें गाजर और हरी बीन्स को दक्षिण भारतीय मसालों और नारियल तेल में तैयार किया गया। इसके साथ थक्काली बेले सारू, यानी तूर दाल, टमाटर और करी पत्ते से बना हल्का शोरबा, और बाजरे से तैयार मिलेट पुलाव परोसा गया। बीटरूट रायता और अलग-अलग तरह की भारतीय रोटियां भी मेहमानों को दी गईं।
डेजर्ट में भी भारतीय स्वाद का खास अंदाज दिखा। ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम विद जलेबी और शहतूत फिरनी मेन्यू का हिस्सा रहे। फिरनी को धीमी आंच पर दूध और चावल से तैयार किया गया था और ऊपर से मीठे शहतूत व गोल्ड लीफ से सजाया गया।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi, Russian President Vladimir Putin and other world leaders at Bharat Mandapam
— ANI (@ANI) September 12, 2026
PM Modi has hosted gala dinner for global leaders and delegates here
(Source: DD) pic.twitter.com/lOlKp0W7Df
‘ब्रिक्स सिम्फनी’ ने बढ़ाया रंग
डिनर के दौरान करीब 160 कलाकारों ने ‘ब्रिक्स सिम्फनी’ पेश की। भारतीय कलाकार इस प्रस्तुति का मुख्य हिस्सा रहे। भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी और कथक जैसे शास्त्रीय नृत्यों के जरिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति दिखाई गई। भारतीय पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ BRICS देशों के कलाकारों ने भी प्रस्तुति दी। ICCR की देखरेख में हुए इस कार्यक्रम में बीच-बीच में गायन भी शामिल रहा और इसकी अवधि करीब 20-25 मिनट रही।
डिनर से पहले BRICS Summit के पहले दिन नई दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया गया। पीएम मोदी ने वैश्विक शासन में सुधार के लिए 10 सूत्रीय रोडमैप भी पेश किया और संकट के समय नाविकों की सुरक्षा के लिए ‘Seafarers' Emergency Support Network’ का प्रस्ताव रखा। नेताओं ने भारत मंडपम में ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का दौरा किया और पौधारोपण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया।
भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इस साल BRICS की स्थापना के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं।
BRICS 2026 Presentation:आतंकवाद, टेरर फंडिंग पर ब्रिक्स का कड़ा प्रहार; एकतरफा टैरिफ की भी निंदा, जानिए 10 सबसे बड़ी बातें
राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका समेत नए सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान जारी संयुक्त घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक नीतियों और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई को लेकर महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत दौरे पर पहुंचे हैं, जिनकी शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है।
ब्रिक्स घोषणापत्र की 10 सबसे प्रमुख बातें
- पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा: ब्रिक्स देशों ने 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की सामूहिक रूप से कड़ी निंदा की और हमले में जान गंवाने वाले 26 लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
- आतंकवाद के खिलाफ सख्त और बिना शर्त रुख: सम्मेलन में आतंकवाद के सभी रूपों, स्वरूपों और किसी भी कारण से की जाने वाली आतंकी गतिविधियों की स्पष्ट निंदा की गई।
- आतंकवाद को धर्म से न जोड़ने का संकल्प: घोषणापत्र में स्पष्ट कहा गया कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
- सीमा पार आतंकवाद और फंडिंग पर नकेल: सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वाले ठिकानों और आतंकी संगठनों तक पहुँचने वाली वित्तीय मदद को रोकने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति बनी।
- आतंकियों की जवाबदेही तय करने पर जोर: आतंकवाद फैलाने वाले व्यक्तियों, प्रायोजकों और उनके नेटवर्क के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई कर उनकी जवाबदेही तय करने का फैसला लिया गया।
- संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद रोधी संधि: संयुक्त राष्ट्र (UN) के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रस्तावित व्यापक संधि को जल्द से जल्द अपनाने का आह्वान किया गया।
- मूल सिद्धांतों को मजबूती: आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता और सर्वसम्मति से निर्णय लेने के ब्रिक्स के मूलभूत सिद्धांतों पर अडिग रहने का संकल्प जताया गया।
- एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों की निंदा: वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले एकतरफा टैरिफ पर चिंता जताई गई और कहा गया कि सभी व्यापारिक कदम विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुकूल होने चाहिए।
- बढ़ते वैश्विक तनाव और परमाणु खतरे पर चिंता: दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के बढ़ते खतरों पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की गई।
- भारत की अध्यक्षता की सराहना: सभी ब्रिक्स सदस्य देशों ने भारत की कुशल अध्यक्षता, ब्रिक्स प्लस और आउटरीच संवाद के सफल आयोजन की खुलकर सराहना की।
ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के 5 मुख्य बातें
- अगले 20 साल का नया एजेंडा: पीएम मोदी ने सुझाव दिया कि ब्रिक्स को अगले 20 वर्षों के लिए अपनी रणनीतियों का नया एजेंडा तैयार करना चाहिए और फैसलों पर अमल के लिए एक स्थायी संस्थागत व्यवस्था बनानी चाहिए।
- ग्लोबल साउथ की तकनीक में हिस्सेदारी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों के नियम बनाने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
- युवाओं और नीति-निर्माताओं का प्रशिक्षण: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, बातचीत और कानूनों की समझ बढ़ाने के लिए युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रस्ताव रखा।
- नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क: समुद्र में आपातकालीन परिस्थितियों में फंसने वाले नाविकों के इलाज, उनके परिवारों से संपर्क और सुरक्षित निकासी के लिए सदस्य देशों के बीच एक समर्पित नेटवर्क बनाने की वकालत की।
- 'भविष्य सबका, फैसला भी सबका': प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि दुनिया का भविष्य साझा है, तो वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी देशों के पास समान अधिकार और प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
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