Bleeding Gums: मसूड़ों से बार-बार खून आना नहीं है मामूली बात! हार्ट के मरीज हो जाएं सतर्क
Bleeding Gums: ब्रश करते समय या कुछ खाते वक्त मसूड़ों से कभी-कभार खून आना कई लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, मसूड़ों में सूजन या लालिमा है और मुंह से दुर्गंध भी आती है तो यह मसूड़ों की बीमारी का संकेत हो सकता है। खासकर पहले से हृदय रोग से जूझ रहे लोगों के लिए ओरल हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है।
मसूड़ों की बीमारी और हृदय संबंधी समस्याओं के बीच संभावित संबंध को लेकर कई शोध हुए हैं। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि मसूड़ों की बीमारी सीधे तौर पर हार्ट डिजीज का कारण बनती है। फिर भी हार्ट के मरीजों को मुंह की सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और लगातार खून आने पर डेंटिस्ट से जांच करानी चाहिए।
मसूड़ों से खून आने की क्या वजह हो सकती है?
मसूड़ों से खून आने की सबसे आम वजहों में प्लाक जमा होना और मसूड़ों में सूजन यानी जिंजिवाइटिस शामिल है। अगर लंबे समय तक इसका इलाज न कराया जाए तो समस्या बढ़कर पीरियडोंटाइटिस का रूप ले सकती है। इसमें मसूड़ों के साथ दांतों को सहारा देने वाले ऊतकों पर भी असर पड़ सकता है।
कभी-कभी बहुत जोर से ब्रश करने, गलत तरीके से फ्लॉस करने या मुंह की पर्याप्त सफाई न रखने से भी खून आ सकता है।
हार्ट के मरीजों को क्यों रहना चाहिए सावधान?
मसूड़ों की गंभीर बीमारी में शरीर में सूजन और संक्रमण से जुड़ी प्रक्रियाएं बढ़ सकती हैं। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने ओरल हेल्थ और हृदय स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध का अध्ययन किया है। कुछ अध्ययनों में दोनों के बीच संबंध देखा गया है, लेकिन कारण और प्रभाव का सीधा संबंध अभी पूरी तरह स्थापित नहीं माना जाता।
इसलिए हार्ट के मरीजों को मसूड़ों से लगातार खून आने, सूजन या संक्रमण जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
डेंटल चेकअप क्यों है जरूरी?
अगर मसूड़ों से बार-बार खून आता है तो डेंटिस्ट इसकी वजह की जांच कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर दांतों की सफाई, प्लाक और टार्टर हटाने या मसूड़ों के इलाज की सलाह दी जा सकती है।
हार्ट के मरीजों को डेंटिस्ट को अपनी बीमारी और चल रही दवाओं के बारे में जरूर बताना चाहिए। खासतौर पर अगर वे खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं तो कोई भी डेंटल प्रक्रिया कराने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है। ऐसी दवाएं अपनी मर्जी से बंद नहीं करनी चाहिए।
ओरल हेल्थ बेहतर रखने के आसान तरीके
दिन में दो बार फ्लोराइड टूथपेस्ट से धीरे-धीरे ब्रश करें। दांतों के बीच की सफाई के लिए फ्लॉस या इंटरडेंटल क्लीनिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाना भी मसूड़ों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।
अगर खून आने की समस्या लगातार बनी हुई है, मसूड़ों में दर्द या सूजन है, दांत हिल रहे हैं या मुंह में घाव ठीक नहीं हो रहा है तो डेंटिस्ट से जांच कराएं।
ध्यान रखें, स्वस्थ मसूड़े केवल खूबसूरत मुस्कान के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हार्ट की बीमारी होने पर नियमित मेडिकल जांच के साथ ओरल हेल्थ की देखभाल भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहतर है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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mohammed shami: शमी ने गेंद पर लगाया पसीना तो अंपायर ने रोक दिया, जानिए MCC का नियम क्या कहता है
mohammed shami in duleep trophy: दलीप ट्रॉफी फाइनल में मंगलवार को उस समय आजीबोगरीब स्थिति बन गई, जब ईस्ट जोन के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को अंपायर वीरेंद्र शर्मा ने गेंद लेकर गेंदबाजी से रोक दिया और चेतावनी देने लगे। मामला गेंद पर जरूरत से ज्यादा पसीने के इस्तेमाल से जुड़ा था। घटना मुकाबले के तीसरे दिन के आखिरी सेशन की है, जब साउथ जोन ईस्ट जोन के 708 रन के विशाल स्कोर का पीछा कर रहा था।
साउथ जोन की दूसरी पारी के 60वें ओवर में दोनों ऑन-फील्ड अंपायरों ने शमी से गेंद मांगी। शमी गेंद बदलने की उम्मीद कर रहे थे। शुरुआत में लगा कि अंपायर गेंद की स्थिति देख रहे हैं और शायद इसे बदला जाएगा, लेकिन रिप्ले में तस्वीर कुछ और सामने आई। अंपायर गेंद बदलने के बजाय फील्डिंग टीम को गेंद पर अत्यधिक पसीने के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दे रहे थे। इसके बाद ईस्ट जोन के तेज गेंदबाज मुकेश कुमार और उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी ने भी अलग-अलग समय पर अंपायरों से इस मामले को लेकर बातचीत की।
गेंद पर पसीना लगाना क्या नियम के खिलाफ है?
MCC के Law 41.3 में मैच बॉल की स्थिति बदलने से जुड़े नियम हैं। इसके मुताबिक खिलाड़ी ऐसा कोई काम नहीं कर सकता, जिससे गेंद की स्थिति बदले, जब तक नियम में उसकी अनुमति न हो। हालांकि इसी नियम के Law 41.3.2.1 में पसीने के इस्तेमाल की अनुमति है। फील्डर कपड़ों पर गेंद को पॉलिश कर सकता है। बशर्ते किसी आर्टिफिशियल पदार्थ का इस्तेमाल न किया जाए और प्राकृतिक पदार्थ के तौर पर सिर्फ पसीने का इस्तेमाल हो। साथ ही इसमें समय बर्बाद नहीं होना चाहिए।
यानी शमी का गेंद पर पसीना लगाना अपने आप में गलत नहीं था। नियम में यह भी साफ तौर पर नहीं बताया गया है कि कितना पसीना अधिक माना जाएगा। लेकिन अगर अंपायरों को लगे कि गेंद की स्थिति को नियम की अनुमति से आगे जाकर बदलने की कोशिश हो रही है, तो वे हस्तक्षेप कर सकते हैं।
Law 41.3.1 के तहत अंपायर गेंद का बार-बार और अनियमित तरीके से निरीक्षण कर सकते हैं। उन्हें तुरंत गेंद की जांच करनी होती है, अगर उन्हें किसी खिलाड़ी द्वारा गेंद की स्थिति बदलने का शक हो।
इस मामले में रिप्ले में अंपायरों और खिलाड़ियों के बीच हुई पूरी बातचीत साफ नहीं दिखी। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि चेतावनी की सटीक वजह क्या थी।
अगर अंपायर यह तय करते कि गेंद की स्थिति अनुचित तरीके से बदली गई है, तो Law 41.3.4 के तहत विपक्षी कप्तान गेंद बदलने की मांग कर सकता था। नई गेंद को पुरानी गेंद जितना ही घिसा हुआ होना जरूरी होता। इसके अलावा गेंदबाज के छोर वाले अंपायर को विपक्षी टीम के खाते में 5 पेनल्टी रन भी देने होते।
इस मुकाबले में ईस्ट जोन ने दो दिन बल्लेबाजी करते हुए 708 रन बनाए थे। कप्तान ईशान किशन ने 270 रन की शानदार पारी खेली, जबकि कुमार कुशाग्र ने शतक और अभिमन्यु ईश्वरन व शिखर मोहन ने अर्धशतक लगाए। जवाब में शमी और मुकेश ने दो-दो विकेट लिए, जबकि मोहन को एक सफलता मिली। ईस्ट जोन ने साउथ जोन को 174/5 पर पहुंचा दिया था, लेकिन तिलक वर्मा के अर्धशतक ने टीम को 200 के पार पहुंचा दिया।
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