RPSC Sub Inspector SI PET Result 2026
Rajasthan Public Service Commission (RPSC) Recruitment 2025 PET Result Post Update Date: 15-09-2026 Short Description: RPSC Sub Inspector SI PET Result 2026 : A massive recruitment drive has been announced in Rajasthan, with 12,121 different posts available across various departments. This includes 1,015 positions for Rajasthan Police Sub Inspector SI / Platoon Commander 2025, 3,225 posts for ...
Dhaka University संग्रहालय में Muhammad Ali Jinnah की तस्वीरें लगने पर विवाद, 5 सदस्यीय जांच समिति गठित
ढाका विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने संस्थान के संग्रहालय में पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाए जाने के मामले की जांच शुरू कर दी है। तस्वीरें लगाये जाने के बाद सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जबकि छात्र संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया। जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिविर के दबदबे वाले ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (डीयूसीएसयू) ने रविवार को विश्वविद्यालय के पुनर्व्यवस्थित संग्रहालय को फिर से खोला, जिसमें जिन्ना और उपमहाद्वीप के राजनीतिक इतिहास से जुड़ी तस्वीरें व अखबारों की कतरनें लगाई गई हैं।
संग्रहालय में ढाका के तत्कालीन रेसकोर्स मैदान में 1948 में भाषण देते हुए जिन्ना की एक तस्वीर भी लगी है। इस भाषण में उन्होंने घोषणा की थी कि उर्दू पाकिस्तान की एकमात्र राजकीय होगी। इन तस्वीरों का विभिन्न छात्रों और छात्र संगठनों ने विरोध किया।
सोमवार को ढाका विश्वविद्यालय के एक छात्र ने जिन्ना की तस्वीरें फाड़ दीं। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के छात्र संगठन जातयताबादी छात्र दल (जेसीडी) ने भी तस्वीरों की निंदा की और इसे ‘‘शर्मनाक हरकत’’ बताते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय की छवि खराब हुई। जेसीडी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से परिसर से इन तस्वीरों और ऐसी ही अन्य चीजों को हटाने का आग्रह किया।
ढाका विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। विश्वविद्यालय के जन संपर्क विभाग के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा, ‘‘विश्वविद्यालय प्रशासन ने डीयूसीएसयू के पुनर्व्यवस्थित आर्काइव में बिना इजाज़त और विवादित तरीके से तस्वीर प्रदर्शित किये जाने की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है।’’ प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर मोहम्मद अलमुजद्दादे अलफसाने की अध्यक्षता वाली समिति से यह पता लगाने को कहा गया कि बिना प्रशासनिक मंजूरी के तस्वीरें कैसे और क्यों लगाई गईं। विश्वविद्यालय ने पहले कहा था कि ऐसे लोगों की तस्वीरें लगाना स्वीकार्य नहीं है जिनकी भूमिका 1952 के आंदोलन और बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम के इतिहास में संदिग्ध है।
विश्वविद्यालय ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। पाकिस्तान के बनने के कुछ समय बाद 1948 में जिन्ना ने पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) का दौरा किया था। ढाका दौरे के दौरान, 21 मार्च को रेसकोर्स मैदान में उन्होंने घोषणा की थी कि पाकिस्तान की राजकीय ‘‘सिर्फ और सिर्फ उर्दू’’ होगी, जबकि पूर्वी पाकिस्तान (जो बाद में बांग्लादेश बना) में बांग्ला बोलने वालों की आबादी सबसे अधिक थी।
इसके तीन दिन बाद ढाका विश्वविद्यालय में दिए गए भाषण में भी उन्होंने अपनी यही बात दोहराई थी। स्थानीय मीडिया में आई खबरों के अनुसार, डीयूसीएसयू संग्रहालय में जिन्ना के 21 मार्च के भाषण की एक तस्वीर, 1940 के लाहौर प्रस्ताव से जुड़ी सामूहिक तस्वीर और 1970 के आम चुनाव पर पाकिस्तान के डॉन अखबार की एक कतरन शामिल है। सोमवार को उर्दू विभाग के चौथे वर्ष के छात्र अबू तैयब हबिलदार ने संग्रहालय में जिन्ना की तस्वीरें फाड़ दीं।
उन्होंने कहा कि जिन्ना ने बांग्ला का विरोध किया था, इसलिए विश्वविद्यालय में उन्हें महिमामंडित नहीं किया जाना चाहिए। इस विवाद के कारण वामपंथी झुकाव वाले बांग्लादेश छात्र फेडरेशन के छात्रों ने संग्रहालय में विरोधस्वरूप जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख गुलाम आजम की तस्वीर लगाई। यह तस्वीर तब की है, जब उन्हें जूतों से पीटा गया था।
गुलाम आजम 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पूर्वी पाकिस्तान में जमात-ए-इस्लामी के एक प्रमुख नेता थे और बाद में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध अधिकरण ने उन्हें मानवता के विरुद्ध अपराधों का दोषी ठहराया था। जमात-ए-इस्लामी ने 1971 में पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान की आजादी का विरोध किया था।
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