Oracle ने AI और Cloud Services में भारी निवेश के बीच शुरू की नई छंटनी
ओरेकल के कुछ कर्मचारियों के लिए काम का दिन एक ऐसे ईमेल के साथ शुरू हुआ, जिसकी उन्होंने शायद उम्मीद नहीं की थी। संदेश में बताया गया कि संगठन में व्यापक बदलाव के तहत उनकी भूमिका खत्म की जा रही है और उसी दिन उनका आखिरी कार्यदिवस है। कर्मचारियों को यह भी बताया गया कि जल्द ही उनके कंप्यूटर, ईमेल, संदेश और कंपनी की फाइलों तक पहुंच बंद कर दी जाएगी।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ताजा छंटनी में कितने कर्मचारी प्रभावित हुए हैं, इसकी आधिकारिक संख्या ओरेकल ने जारी नहीं की है। कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में उनकी व्यक्तिगत नौकरी खत्म होने का अलग कारण नहीं बताया गया। उनसे निजी ईमेल पता देने को कहा गया, ताकि उन्हें सेवा समाप्ति से जुड़े भुगतान और दूसरे जरूरी दस्तावेज भेजे जा सकें। इतनी कम सूचना में कंपनी की प्रणालियों से पहुंच खत्म होने की प्रक्रिया ने इस छंटनी को और गंभीर बना दिया है।
गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब ओरेकल एआई और बादल आधारित सेवाओं के लिए जरूरी आंकड़ा केंद्रों तथा कंप्यूटिंग ढांचे पर भारी रकम खर्च कर रही है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का पूंजीगत खर्च 28.5 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले की समान अवधि के 8.5 अरब डॉलर से तीन गुना से भी ज्यादा है। कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष के लिए 90 से 95 अरब डॉलर के पूंजीगत खर्च का अनुमान बरकरार रखा है।
कंपनी के अनुसार, एआई आधारित बादल सेवाओं की मांग भी मजबूत बनी हुई है। तिमाही के दौरान ओरेकल ने 30 अरब डॉलर से ज्यादा के नए अनुबंध किए। हालांकि, इस तेजी के साथ खर्च भी तेजी से बढ़ा है। तिमाही में कंपनी का मुक्त नकदी प्रवाह 5.4 अरब डॉलर नकारात्मक रहा। ऐसे में ओरेकल के सामने एक तरफ एआई की बढ़ती मांग का फायदा उठाने के लिए निवेश बढ़ाने और दूसरी तरफ लागत पर नियंत्रण रखने की चुनौती है।
बता दें कि ओरेकल पहले ही वित्त वर्ष 2026 के दौरान करीब 21 हजार कर्मचारियों की संख्या कम कर चुकी है। यह उसके कुल कार्यबल का लगभग 13 प्रतिशत था। मई के अंत तक कंपनी में करीब एक लाख 41 हजार कर्मचारी रह गए थे, जबकि एक साल पहले यह संख्या करीब एक लाख 62 हजार थी। पुनर्गठन से जुड़े भुगतान और दूसरे खर्चों पर कंपनी ने करीब 1.84 अरब डॉलर खर्च किए। ओरेकल ने माना है कि एआई को अपनाना और उसे कामकाज में लागू करना भी कर्मचारियों की संख्या घटाने के पीछे के कारणों में शामिल रहा है।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के पुनर्गठन कार्यक्रम की अनुमानित लागत में 70 करोड़ डॉलर और जोड़ दिए हैं। इससे कुल अनुमानित खर्च करीब 2.8 अरब डॉलर हो गया है। इसलिए ताजा छंटनी को केवल अचानक की गई लागत कटौती के तौर पर देखना सही नहीं होगा, बल्कि यह कंपनी के बड़े पुनर्गठन का हिस्सा है।
ओरेकल की स्थिति तकनीकी क्षेत्र में चल रहे व्यापक बदलाव की भी तस्वीर दिखाती है। सितंबर के शुरुआती दस दिनों में ही छह हजार से ज्यादा तकनीकी नौकरियों में कटौती की खबर सामने आई। उबर, पेपाल, एप्पल, जोमैटो और ओरेकल जैसी कंपनियां भी इस दौर से जुड़ी रही हैं। लेऑफ्स डॉट एफवाईआई के आंकड़ों के मुताबिक, 10 सितंबर तक 299 कंपनियों में दुनिया भर के एक लाख 28 हजार 536 तकनीकी कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी थीं, जो पूरे 2025 के एक लाख 22 हजार 606 के आंकड़े से ज्यादा है।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि हर नौकरी में कटौती के लिए एआई को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, दिल्ली-एनसीआर परिसर के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिनव पी. त्रिपाठी के अनुसार, इस दौर में करीब एक चौथाई से एक तिहाई नौकरियों का नुकसान वास्तविक कामकाजी बदलाव और स्वचालन से जुड़ा हो सकता है, जबकि बाकी हिस्सा लागत और कर्मचारियों के पुनर्गठन से संबंधित है।
स्टैनफोर्ड डिजिटल इकोनॉमी लैब के अध्ययन में भी एआई से ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में 22 से 25 वर्ष के कर्मचारियों की रोजगार स्थिति कमजोर होने की बात सामने आई है। वहीं, गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि व्यापक एआई अपनाने की स्थिति में अमेरिका की छह से सात प्रतिशत नौकरियां जोखिम में आ सकती हैं।
इसके बावजूद तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। गार्टनर का अनुमान है कि 2027 तक वे संस्थान आगे निकल सकते हैं जो एआई से मिलने वाली बचत को सिर्फ तत्काल खर्च घटाने के बजाय नए काम, तकनीकी सुधार और कर्मचारियों के प्रशिक्षण में लगाते हैं। ऐसे में आने वाले समय में असली चुनौती केवल नौकरियां बचाना नहीं, बल्कि एआई के साथ काम करने वाले नए रोजगार ढांचे तैयार करना भी हैं।
India का Trade Deficit अगस्त में घटकर 9.41 अरब डॉलर हुआ, Export में 25.41 प्रतिशत उछाल
अगस्त में भारत के व्यापार घाटे को लेकर राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। कुल निर्यात में आयात के मुकाबले तेज बढ़ोतरी होने से देश का समग्र व्यापार घाटा पिछले साल के इसी महीने के 11.62 अरब डॉलर से घटकर 9.41 अरब डॉलर रह गया। मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में वस्तुओं और सेवाओं समेत कुल निर्यात 25.41 प्रतिशत बढ़कर 82.68 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि आयात 92.09 अरब डॉलर रहा। एक साल पहले निर्यात 65.93 अरब डॉलर और आयात 77.55 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि अगस्त में निर्यात की रफ्तार और तेज हुई है। वस्तु निर्यात 26.12 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल 34.74 अरब डॉलर था। रुपये में यह 37.59 प्रतिशत बढ़कर 4.18 लाख करोड़ रुपये रहा। वस्तु आयात भी बढ़कर 70.67 अरब डॉलर हो गया। इसके बावजूद वस्तु व्यापार घाटा 26.86 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के 27.20 अरब डॉलर से कम है। राजेश अग्रवाल ने कुल और वस्तु व्यापार घाटे में कमी को सकारात्मक संकेत बताया है।
गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में पेट्रोलियम, कच्चा तेल, कोयला, कोक और ब्रिकेट जैसे ऊर्जा उत्पाद आयात घाटे के बड़े कारणों में रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक सामानों के आयात ने भी दबाव बढ़ाया है। दूसरी ओर, सेवा क्षेत्र ने निर्यात को मजबूती दी। अगस्त में सेवाओं का निर्यात 24.61 प्रतिशत बढ़कर 38.87 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा आयात 21.42 अरब डॉलर पहुंच गया। वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर रुपये में कुल निर्यात 36.81 प्रतिशत बढ़कर 7.89 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सोने का आयात 57.7 प्रतिशत घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया।
निर्यात वृद्धि में इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन और कपड़ा क्षेत्र का योगदान प्रमुख रहा। राजेश अग्रवाल के अनुसार, पहले पांच महीनों में इलेक्ट्रॉनिक सामानों का निर्यात करीब 30 प्रतिशत और इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा। रसायनों और समुद्री उत्पादों में भी 14 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
भारत ने कई प्रमुख बाजारों में बेहतर प्रदर्शन किया है। चीन को निर्यात 39 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सिंगापुर में 97 प्रतिशत से अधिक, दक्षिण अफ्रीका में 58 प्रतिशत और मलेशिया में 75 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई। अप्रैल-अगस्त के दौरान ब्रिक्स देशों को निर्यात 13.3 प्रतिशत बढ़कर 34.5 अरब डॉलर रहा। अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से भी भारतीय सामानों की मांग बनी हुई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अप्रैल-अगस्त में वस्तु निर्यात 17.85 प्रतिशत बढ़कर 215.91 अरब डॉलर और आयात 18.21 प्रतिशत बढ़कर 363 अरब डॉलर हो गया। राजेश अग्रवाल ने कहा कि निर्यात वृद्धि केवल कीमतों की वजह से नहीं हुई, बल्कि माल की मात्रा भी बढ़ी है। निगरानी में शामिल 168 प्रमुख वस्तुओं में से 68 में मात्रा और मूल्य दोनों बढ़े हैं, जो उत्पादन और माल भेजने की गतिविधि में सुधार का संकेत है।
बता दें कि ब्रिटेन के साथ भारत का व्यापार समझौता लागू हो चुका है, जबकि यूरोपीय संघ के साथ व्यापक समझौता आगे बढ़ रहा है। इससे भारतीय सामानों के लिए बाजार विस्तार की उम्मीद है। अगस्त में वस्तु निर्यात जुलाई के 44.24 अरब डॉलर से घटकर 43.81 अरब डॉलर रहा, लेकिन आयात भी 76.22 अरब डॉलर से घटकर 70.67 अरब डॉलर हो गया। अगस्त का वस्तु व्यापार घाटा अर्थशास्त्रियों के 32 अरब डॉलर के अनुमान से कम रहा।
इस बीच सऊदी अरब पर नए हमलों और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हमलों ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। सऊदी तेल पाइपलाइन पर हमले और यमन के हूती समूह की बढ़ती गतिविधियों के बीच पश्चिम एशिया का संकट व्यापार और ऊर्जा कीमतों के लिए चुनौती बना रह सकता है। ऐसे में निर्यात की मजबूती और आयात दबाव को संभालना भारत के बाहरी क्षेत्र के लिए अहम संकेत हैं।
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