Maintenance के लिए कई मुकदमे न करें महिलाएं, Allahabad HC ने दी नसीहत
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने भरण-पोषण के लिए एक महिला को अनावश्यक रूप से एक साथ कई मुकदमे चलाने के प्रति आगाह करते हुए कहा कि इससे कुटुम्ब अदालतों पर काम का बोझ बढ़ता है और मामलों के निस्तारण में देरी होती है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने शशि गुप्ता की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। शशि गुप्ता ने लखनऊ की एक कुटुम्ब अदालत में लंबित मुकदमे का शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
मामले के अनुसार, कुटुम्ब अदालत ने चार जून, 2024 को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 के तहत पति को अपनी पत्नी को प्रति माह सात हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। इसके बाद शशि गुप्ता ने 19 जुलाई, 2024 को इस आदेश के क्रियान्वयन के लिए निष्पादन वाद दायर किया। पीठ ने पाया कि शशि गुप्ता ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत भी कार्यवाही शुरू की थी, जिसमें उन्हें प्रति माह 4,500 रुपये भरण-पोषण दिया गया था।
अदालत ने यह भी पाया कि दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत पति को 1.51 लाख रुपये का भुगतान करने और कुछ सामान लौटाने पर सहमति बनी थी। दोनों ने आपसी सहमति से तलाक लेने पर भी सहमति जताई थी। पति ने समझौते के तहत 50,000 रुपये का भुगतान किया लेकिन आपसी सहमति से तलाक की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।
पीठ ने कहा कि शशि गुप्ता ने न तो तलाक की कार्यवाही शुरू की और न ही वैवाहिक अधिकारों की बहाली का अनुरोध किया। इसके बावजूद वह पति से भरण-पोषण प्राप्त करने के लिए अलग-अलग मंचों पर कार्यवाही कर रही हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि कानून किसी व्यक्ति को भरण-पोषण के लिए विभिन्न वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्यवाही शुरू करने का विकल्प देता है हालांकि, जब कोई महिला अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में आर्थिक असमर्थता का दावा करती है, तो एक ही राहत के लिए अनावश्यक रूप से मुकदमेबाजी बढ़ाना उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने कहा कि इस तरह की वैकल्पिक और गैर-जरूरी कार्यवाही से पहले से ही काम के बोझ तले दबी कुटुम्ब अदालतों पर अतिरिक्त भार पड़ता है और मामलों के निस्तारण में देरी होती है।
लद्दाख में Vinai Kumar Saxena का तंज, बोले कुछ लोग विकास छोड़ साध रहे सियासी हित
लद्दाख में नए सिरे से विरोध-प्रदर्शनों की योजना बना रहे समूहों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए, उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मंगलवार को कहा कि “कुछ लोग केंद्र शासित प्रदेश के विकास की वास्तविक चिंता किए बिना अपने राजनीतिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं”। यहां 11वें लद्दाख जंस्कार उत्सव 2026 का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि राजनीतिक मुद्दों की अपनी जगह है, लेकिन विकास एक अलग मामला है और किसी को भी लद्दाख की तरक्की के रास्ते में रुकावट नहीं बनने देना चाहिए। जलवायु कार्यकर्ता और लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के सदस्य सोनम वांगचुक ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र सरकार एक हफ्ते के अंदर उनकी मुख्य मांगों पर साफ आश्वासन नहीं देती है, तो 19 सितंबर से लद्दाख में नया आंदोलन शुरू होगा।
यह चेतावनी लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) की गृह मंत्रालय की एक उप समिति के साथ नौ सितंबर को हुई बैठक के कुछ ही समय बाद आई। इन दोनों समूहों ने बैठक को “निरर्थक” बताया। एलएबी और केडीए ने पिछले हफ्ते लद्दाख में 19-24 सितंबर तक पदयात्रा करने का ऐलान किया।
वांगचुक ने कहा कि सरकार ने इन समूहों की ओर से सौंपी गई उन मांगों पर कोई जवाब नहीं दिया है जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता; इनमें एक ऐसी शासन व्यवस्था की मांग भी शामिल है जिसमें चुनी हुई विधानसभा नौकरशाही से ऊपर हो और कानून-व्यवस्था पर उसका नियंत्रण हो। उपराज्यपाल ने किसी का नाम लिये बगैर कहा, “कुछ लोग अपने राजनीतिक मकसद पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें लद्दाख के विकास से कोई लेना-देना नहीं है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि लद्दाख के लोगों को यह देखना चाहिए कि (अगस्त 2019 में) लद्दाख के केंद्र-शासित प्रदेश बनने के बाद से यहां कितना विकास हुआ है।” सक्सेना ने केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख के सड़क नेटवर्क में हुई बढ़ोतरी पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि उस समय वहां लगभग 1,700 किलोमीटर सड़कें थीं, जबकि आज यह आंकड़ा लगभग 4,400 किलोमीटर है। उन्होंने पर्यटकों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी की ओर भी इशारा किया और इस वृद्धि का श्रेय उस इलाके में बुनियादी ढांचे के मजबूत होने को दिया। जंस्कार उत्सव का दो दिन चलने वाला 11वां संस्करण आज सुबह शुरू हुआ।
इसमें जंस्कार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक संगीत, नृत्य, कला और स्थानीय परंपराओं की झलक देखने को मिली।
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