लद्दाख में Vinai Kumar Saxena का तंज, बोले कुछ लोग विकास छोड़ साध रहे सियासी हित
लद्दाख में नए सिरे से विरोध-प्रदर्शनों की योजना बना रहे समूहों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए, उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मंगलवार को कहा कि “कुछ लोग केंद्र शासित प्रदेश के विकास की वास्तविक चिंता किए बिना अपने राजनीतिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं”। यहां 11वें लद्दाख जंस्कार उत्सव 2026 का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि राजनीतिक मुद्दों की अपनी जगह है, लेकिन विकास एक अलग मामला है और किसी को भी लद्दाख की तरक्की के रास्ते में रुकावट नहीं बनने देना चाहिए। जलवायु कार्यकर्ता और लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के सदस्य सोनम वांगचुक ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र सरकार एक हफ्ते के अंदर उनकी मुख्य मांगों पर साफ आश्वासन नहीं देती है, तो 19 सितंबर से लद्दाख में नया आंदोलन शुरू होगा।
यह चेतावनी लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) की गृह मंत्रालय की एक उप समिति के साथ नौ सितंबर को हुई बैठक के कुछ ही समय बाद आई। इन दोनों समूहों ने बैठक को “निरर्थक” बताया। एलएबी और केडीए ने पिछले हफ्ते लद्दाख में 19-24 सितंबर तक पदयात्रा करने का ऐलान किया।
वांगचुक ने कहा कि सरकार ने इन समूहों की ओर से सौंपी गई उन मांगों पर कोई जवाब नहीं दिया है जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता; इनमें एक ऐसी शासन व्यवस्था की मांग भी शामिल है जिसमें चुनी हुई विधानसभा नौकरशाही से ऊपर हो और कानून-व्यवस्था पर उसका नियंत्रण हो। उपराज्यपाल ने किसी का नाम लिये बगैर कहा, “कुछ लोग अपने राजनीतिक मकसद पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें लद्दाख के विकास से कोई लेना-देना नहीं है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि लद्दाख के लोगों को यह देखना चाहिए कि (अगस्त 2019 में) लद्दाख के केंद्र-शासित प्रदेश बनने के बाद से यहां कितना विकास हुआ है।” सक्सेना ने केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख के सड़क नेटवर्क में हुई बढ़ोतरी पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि उस समय वहां लगभग 1,700 किलोमीटर सड़कें थीं, जबकि आज यह आंकड़ा लगभग 4,400 किलोमीटर है। उन्होंने पर्यटकों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी की ओर भी इशारा किया और इस वृद्धि का श्रेय उस इलाके में बुनियादी ढांचे के मजबूत होने को दिया। जंस्कार उत्सव का दो दिन चलने वाला 11वां संस्करण आज सुबह शुरू हुआ।
इसमें जंस्कार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक संगीत, नृत्य, कला और स्थानीय परंपराओं की झलक देखने को मिली।
सऊदी के 3 शहरों में इमरजेंसी अलर्ट, हूतियों ने कहां-कहां किया धूम-धड़ाका
कहां तो सऊदी अरब ने यमन की राजधानी सना पर कंट्रोल का ऐलान किया था और कहां अब उसके अपने शहरों पर मुसीबत आन खड़ी हुई। सऊदी अरब यमन के अंसारुल्ला हूती को छेड़कर बड़ी मुसीबत में फंस गया है। हालात यह हैं कि जद्दा, जजान और आभा जैसे शहरों में इमरजेंसी अलर्ट है। यमन से हूतियों की मिसाइलें और ड्रोन सऊदी के शहरों पर गिर रहे हैं। खुद हूतियों ने भी दावा किया है कि उन्होंने सऊदी के साउथ वेस्ट में खमीज मुशैद पर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन मारे हैं। और एक फौजी बेस को निशाना भी बनाया है। इन हमलों में सऊदी के 13 लोग जख्मी हो गए। लेकिन आभा, जिद्दा, जजान और ताइफ जैसे शहरों पर हूतियों के अटैक का खतरा बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि इन हमलों से निपटने के लिए सऊदी की राजधानी रियाद में हाई लेवल की इमरजेंसी मीटिंग हो रही हैं। हूतियों की तरफ से ड्रोन और मिसाइल हमलों में लगातार तेजी देखी जा रही है।
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सऊदी अरब भी अपनी हिमायती यमन की सेना की मदद से हूतियों के इलाकों पर हवाई हमले और पलटवार कर रहा है। को तो नुकसान हो रहा है लेकिन उनकी जीत का कारवा यमन में बढ़ता ही चला जा रहा है। अंसारउल्ला फोर्सेस इस वक्त सेंट्रल यमन और लाल सागर के साहिली इलाकों पर अपना फोकस रखे हुए हैं और अपने टारगेट भी हासिल करती जा रही हैं। की रणनीति फिलहाल दिखा रही है कि अदन की तरफ नहीं बढ़ना है बल्कि उन इलाकों पर कंट्रोल हासिल करना है जिनसे राजधानी सना पर आगे चलकर हमले का खतरा कम होता जाए। वहीं सऊदी के सबसे बड़े सहारे अमेरिका ने इस जंग में सीधे कूदने से साफ मना कर दिया है। सिर्फ खुफिया जानकारी और मदद सऊदी को मुहैया करवा रहा है। अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने कहा है कि हूतियों ने भी अमेरिका से इस लड़ाई से दूर रहने के लिए कहा है। इधर हूतियों के हमलों से हलाकान सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हूतियों के खिलाफ लड़ाई में मदद के लिए मिडिल ईस्ट के देशों और अप्रत्यक्ष रूप से यानी इनडायरेक्ट तौर पर इसराइल से भी अपील की है। इसराइल हायम की रिपोर्ट के मुताबिक यह रिक्वेस्ट सीधे दूसरे गल्फ देशों और मिस्र से की गई थी। लेकिन इसराइल से अमेरिकी सेंट्रल कमांड के जरिए इनडायरेक्ट कांटेक्ट किया गया और इंटेलिजेंस और दूसरी मदद मांगी गई जिससे हूतियों को बाब अल मंदब स्टेट को बंद करने से रोका जा सके।
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सेटेलाइट तस्वीरों में दिखाया गया है कि सऊदी अरब से रेड सी यानी लाल सागर तक जाने वाली मुख्य पाइपलाइन पर बना पंपिंग स्टेशन ड्रोन अटैक में तबाह हो चुका है। सऊदी के तेल खरीदारों का कहना है कि अगर इस अहम पाइपलाइन को फिर से चालू नहीं किया तो सऊदी के पास एक्सपोर्ट के लिए तेल का स्टॉक ही खत्म हो जाएगा।
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