Disha Salian Death Case में CBI ने दर्ज की FIR, CM Devendra Fadnavis बोले- अटकलें न लगाएं
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि CBI दिशा सालियन की मौत की जांच करेगी। एजेंसी द्वारा इस मामले में FIR दर्ज किए जाने के बाद उन्होंने अटकलें न लगाने की सलाह दी। राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि उन्होंने अभी FIR नहीं देखी है, लेकिन उन्होंने बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले को CBI को सौंपने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि हमें अब देखना चाहिए कि CBI क्या जांच करती है। हमारे लिए अटकलें लगाना सही नहीं है।
इसे भी पढ़ें: शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी की मां हसीरानी रथ को भाजपा का नंदीग्राम टिकट, 1.1 लाख के अंतर पर नजर
CBI ने सालियन के पिता सतीश सालियन की याचिका पर हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए बिना किसी आरोपी का नाम लिए FIR दर्ज की। 2 सितंबर को हाई कोर्ट ने सालियन की मौत की CBI जांच का आदेश दिया और छह साल तक FIR दर्ज न करने के लिए मुंबई पुलिस की आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की जांच से जवाबों के बजाय और सवाल खड़े हुए हैं। दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर के तौर पर काम कर चुकीं सालियन की मौत 8 जून, 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक बिल्डिंग की 12वीं मंज़िल से गिरने के बाद हो गई थी।
इसे भी पढ़ें: दिशा सालियान की मौत मामले में CBI की एंट्री! बॉम्बे HC के आदेश के बाद FIR
इसके छह दिन बाद, 14 जून को राजपूत अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए, जिससे देशभर में हंगामा मच गया और बाद में उनकी मौत की CBI जांच हुई। अपनी याचिका में सालियन के पिता ने कई सीनियर नेताओं, बॉलीवुड एक्टर्स और पुलिस अधिकारियों के नाम बताए, जिनकी वे अपनी बेटी की मौत के मामले में जांच करवाना चाहते थे।
Maintenance के लिए कई मुकदमे न करें महिलाएं, Allahabad HC ने दी नसीहत
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने भरण-पोषण के लिए एक महिला को अनावश्यक रूप से एक साथ कई मुकदमे चलाने के प्रति आगाह करते हुए कहा कि इससे कुटुम्ब अदालतों पर काम का बोझ बढ़ता है और मामलों के निस्तारण में देरी होती है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने शशि गुप्ता की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। शशि गुप्ता ने लखनऊ की एक कुटुम्ब अदालत में लंबित मुकदमे का शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
मामले के अनुसार, कुटुम्ब अदालत ने चार जून, 2024 को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 के तहत पति को अपनी पत्नी को प्रति माह सात हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। इसके बाद शशि गुप्ता ने 19 जुलाई, 2024 को इस आदेश के क्रियान्वयन के लिए निष्पादन वाद दायर किया। पीठ ने पाया कि शशि गुप्ता ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत भी कार्यवाही शुरू की थी, जिसमें उन्हें प्रति माह 4,500 रुपये भरण-पोषण दिया गया था।
अदालत ने यह भी पाया कि दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत पति को 1.51 लाख रुपये का भुगतान करने और कुछ सामान लौटाने पर सहमति बनी थी। दोनों ने आपसी सहमति से तलाक लेने पर भी सहमति जताई थी। पति ने समझौते के तहत 50,000 रुपये का भुगतान किया लेकिन आपसी सहमति से तलाक की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।
पीठ ने कहा कि शशि गुप्ता ने न तो तलाक की कार्यवाही शुरू की और न ही वैवाहिक अधिकारों की बहाली का अनुरोध किया। इसके बावजूद वह पति से भरण-पोषण प्राप्त करने के लिए अलग-अलग मंचों पर कार्यवाही कर रही हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि कानून किसी व्यक्ति को भरण-पोषण के लिए विभिन्न वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्यवाही शुरू करने का विकल्प देता है हालांकि, जब कोई महिला अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में आर्थिक असमर्थता का दावा करती है, तो एक ही राहत के लिए अनावश्यक रूप से मुकदमेबाजी बढ़ाना उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने कहा कि इस तरह की वैकल्पिक और गैर-जरूरी कार्यवाही से पहले से ही काम के बोझ तले दबी कुटुम्ब अदालतों पर अतिरिक्त भार पड़ता है और मामलों के निस्तारण में देरी होती है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









