Watch Promo: 'हनुमान अंश' की सफलता का राज क्या? प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर का Exclusive Interview, आज रात 7:55 बजे INH पर
मुंबई में जन्म, लंदन में पढ़ाई और फिर अचानक फिल्म निर्माण की दुनिया में कदम... अनुप्रिया नागर का यह सफर जितना अनोखा है, उतनी ही दिलचस्प है 'हनुमान अंश' के निर्माण और सफलता की कहानी।
???? यहां देखें प्रोमो...
नीम करोली बाबा के प्रति आस्था से जुड़े इस प्रोजेक्ट को लेकर शुरुआत में कई चुनौतियां थीं। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत की, लेकिन दर्शकों की तारीफ और सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा के बाद तीसरे हफ्ते से इसकी कमाई ने रफ्तार पकड़ ली।
39 दिनों में फिल्म का भारत में नेट कलेक्शन ₹222.88 करोड़ तक पहुंच चुका है। खास बात यह है कि फिल्म का अनुमानित प्रोडक्शन बजट करीब ₹2 करोड़ बताया गया है। छोटे बजट की इस फिल्म की जबरदस्त सफलता ने इसे खास चर्चा में ला दिया है।
लेकिन इस सफलता के पीछे की कहानी क्या है? शुरुआत में अनुप्रिया नागर ने क्या सोचा था? किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा? जब लगा कि लगाया हुआ पैसा वापस नहीं आएगा, तब क्या हालात थे? और अब 'हनुमान अंश' की सफलता के बाद आगे की क्या योजना है?
INH और हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने 'हनुमान अंश' की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर से खास बातचीत में फिल्म की प्लानिंग, संघर्ष, सफलता और भविष्य की योजनाओं पर बेबाक चर्चा की।
देखिए अनुप्रिया नागर का यह खास इंटरव्यू, आज रात 7:55 बजे सिर्फ INH पर।
इंटरव्यू में उठेंगे ये सवाल...
- मुंबई में जन्म और लंदन से पढ़ाई के बाद आखिरकार फिल्म निर्माण के क्षेत्र से जुड़ना कैसे हुआ?
- इस तरह की फिल्म में पैसे लगाने का विचार सबसे पहले दिमाग में कहां से आया?
- क्या आप नीम करोली बाबा के जन्मस्थान और बाबा लक्ष्मण दास के स्थान पर खुद गई थीं, या मुंबई में बैठे-बैठे ही यह सब तय हुआ?
- भविष्य में आगे पढ़ाई जारी रखने का इरादा है या पूरी तरह से फिल्म निर्माण में ही रमे रहने की योजना है?
- 'हनुमान अंश' फिल्म का अभी पहला ही भाग आया है, आगे इसके और कितने भाग बनाने की प्लानिंग है?
- शुरुआत में जब ऐसा लगा कि सब बर्बाद होने वाला है और लगाई गई लागत भी वापस नहीं मिलेगी, तब मन में कितनी घबराहट और तनाव था?
'यह पूछिए कि आप देश के लिए क्या कर सकते हैं', जेन-Z और जेन-अल्फा से बोलीं निर्मला सीतारमण
निर्मला सीतारमण ने कहा कि चाहे युवा खुद को जेन-जी कहें या जेन-अल्फा, उनकी बात सुनी जाएगी। लेकिन उन्हें जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्य की भावना के साथ आगे आना होगा। उन्होंने छात्रों से कहा कि आपको नेतृत्व करना है।
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