Uttarakhand Elections 2027: बागेश्वर की दोनों विधानसभा सीटों का पूरा सियासी समीकरण
Uttarakhand Elections 2027: अगले साल यानी 2027 में देश के सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें उत्तराखंड भी शामिल है. 70 विधानसभा सीटों वाला उत्तराखंड राज्य उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में बेहद खास महत्व रखता है. केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री चार धामों के साथ-साथ उत्तराखंड अपनी खूबसूरती वादियों के लिए भी जाना जाता है. जहां गर्मियों के सीजन में पर्यटकों का हुजूम उमड़ता है. ऐसे उत्तराखंड का एक जिला है बागेश्वर. आज हम आपको बागेश्वर जिले की दोनों विधानसभा सीटों के राजनीतिक समीकरण के बारे में बताने जा रहे हैं. सबसे पहले समझते हैं बागेश्वर की भौगोलित स्थिति के बारे में...
बागेश्वर देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक हृदयस्थली के रूप में प्रसिद्ध है. बागेश्वर भू-सामरिक तनावों के बजाय आध्यात्मिक, सरयू-गोमती संगम की सांस्कृतिक विरासत, बागनाथ मंदिर और ग्रामीण आर्थिकी का केंद्र है. पिथौरागढ़ की अंतरराष्ट्रीय सीमा वाली आक्रामक सामरिक गर्जना के उलट बागेश्वर कुमाऊं की शांत, पारंपरिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील टर्निंग प्वाइंट वाली भूमि है जो अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है.
बागेश्वर का राजनीतिक और भौगोलिक ताना-बाना
बागेश्वर में विधानसभा की दो सीटें हैं. इनमें बागेश्वर सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है. जबकि दूसरी सीट कपकोट है. अगर यहां के राजनीति मिजाज की बात करें तो यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से द्विपक्षीय मुकाबले वाला रहा है. जहां बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव जीतते रहे हैं. हालांकि स्थानीय मुद्रों, बागनाथ धाम के विकास और क्षेत्र की ग्रामीण उपेक्षा ने यहां तीसरे विकल्पों जैसे आप या मजबूत निर्दलीय के लिए भी चुनावी रण बनाया जा सकता है.
दिवंगत नेतृत्व का प्रभाव: बागेश्वर सीट पर लंबे समय तक बीजेपी के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री रहे चंदन राम दास का दबदबा रहा; उनके निधन के बाद उपचुनाव में सहानुभूति और संगठनात्मक ताकत की परीक्षा यहां देखने को मिली.
सामाजिक और आर्थिकी के मुख्य आधार
आध्यात्मिक एवं धार्मिक पर्यटन: बागनाथ मंदिर, बैजनाथ मंदिर (कार्तिकेयपुर राजवंश की राजधानी और सांस्कृतिक धरोहर) और उत्तरायणी मेला यहां की सामाजिक चेतना और अर्थव्यवस्था के केंद्र हैं. अगर कृषि और बागवानी की बात करें तो मंडप, गहत, झंगोरा जैसे पारंपरिक श्रीअन्न (मोटे अनाज) और घाटी क्षेत्रों में सब्जी व फल उत्पादन ग्रामीण आर्थिकी की धुरी हैं.
अगर इस क्षेत्र के मुद्दों की बात करें तो यहां पलायन और शिक्षा का संकट सबसे बड़ा मुद्दा रहा है. क्योंकि उच्च शिक्षा, रोजगार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में कपकोट और दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से मैदानी क्षेत्रों की ओर पलायन यहां की प्रमुख सामाजिक चुनौती बनी हुई है. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में भी कपकोट और बागेश्वर की सीटें ग्रामीण विकास, बागवानी को बाजार से जोड़ने और पलायन रोकने के दावों पर तय होंगी.
2011 की जनगणना के अनुसार, बागेश्वर जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर
| विवरण | आंकड़े (2011 जनगणना) |
|---|---|
| कुल आबादी | 259,898 |
| पुरुष | 124,326 |
| महिलाएं | 135,572 |
| औसत साक्षरता दर | 80.01% |
| पुरुष साक्षरता | 92.33% |
| महिला साक्षरता | 69.03% |
| लिंग अनुपात | 1,090 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष |
| जनघनत्व | 116 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी |
| ग्रामीण आबादी | 250,819 (लगभग 96.51%) |
| शहरी आबादी | 9,079 (लगभग 3.49%) |
ये आंकड़े 2011 की जनगणना के आधार पर दिए गए हैं.
2011 की जनगणना के अनुसार, बागेश्वर जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर
| धर्म / समुदाय | जनसंख्या (2011) | प्रतिशत (%) |
|---|---|---|
| हिंदू (Hindu) | 257,509 | 99.08% |
| मुस्लिम (Muslim) | 1,440 | 0.55% |
| ईसाई (Christian) | 397 | 0.15% |
| बौद्ध (Buddhist) | 102 | 0.04% |
| सिख (Sikh) | 46 | 0.02% |
| अन्य धर्म | 16 | 0.01% |
| धर्म नहीं बताया / उल्लेख नहीं | 381 | 0.15% |
| कुल | 259,891 | 100.00% |
2022 विधानसभा चुनाव में कैसा रहा बागेश्वर की सभी सीटों का चुनाव परिणाम
| सीट का नाम | आरक्षित स्थिति | उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|---|
| बागेश्वर | SC (सुरक्षित) | विजेता: चंदन राम दास | BJP | 32,211 | 12,141 |
| उपविजेता: रंजीत दास | INC | 20,070 | |||
| कपकोट | सामान्य | विजेता: सुरेश गड़िया | BJP | 31,275 | 4,046 |
| उपविजेता: ललित फर्स्वाण | INC | 27,229 (लगभग) |
अब जानते हैं सभी सीटों के बारे में विस्तार से...
2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में बागेश्वर जिले के अंतर्गत आने वाली दोनों सीटों- बागेश्वर (सुरक्षित) और कपकोट- पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी. त्रिकोणीय टक्कर का असर: बागेश्वर सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार बसंत कुमार ने 16,109 वोट पाकर मुकाबले को रोचक बनाया था. हालांकि बाद में कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद 2023 के उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी पार्वती दास ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी.
1. बागेश्वर विधानसभा सीट (एससी सुरक्षित - 047)
इस सीट पर चंदन राम दास ( BJP) ने 2022 में जीत दर्ज की गई. जबकि कांग्रेस के रंजीत दास उपविजेता रहे थे. इस सीट पर जीत का अंतर 12,141 वोट रहा था. बता दें कि यह सीट बीजेपी के दिग्गज नेता और कैबिनेट मंत्री रहे चंदन राम दास की पारंपरिक और मजबूत कर्मभूमि रही. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को बड़े अंतर से मात दी थी. इस चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रत्याशी ने भी अच्छे-खासे वोट हासिल कर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास किया था, लेकिन अंततः बीजेपी ने अपनी यह सीट सुरक्षित रखी. बाद में वर्ष 2023 में चंदन राम दास के असामयिक निधन के कारण हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी पार्वती दास ने भी बीजेपी के टिकट पर इस सीट पर जीत दर्ज की थी.
ये भी पढ़ें: Uttarakhand Elections 2027: चंपावत जिले में चुनाव से पहले गरमाई सियासत
2. कपकोट विधानसभा सीट (सामान्य - 046)
बता दें कि कपकोट इलाका एक पूरी तरह से पर्वतीय, दूरस्थ और भौगोलिक रूप से दुर्गम क्षेत्र है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ग्रामीण संस्कृति के लिए जाना जाता है. यहां की राजनीति मुख्य रूप से पारंपरिक रूप से बीजेपी और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती है. इस सीट पर भी बीजेपी के सुरेश गड़िया ने जीत दर्ज की थी. जबकि कांग्रेस के ललित फर्स्वाण उपविजेता रहे थे. यहां जीत का अंतर 4,046 वोट रहा था. भौगोलिक रूप से दुर्गम और ग्रामीण बाहुल्य इस सीट पर बीजेपी ने युवा चेहरे सुरेश गड़िया को मैदान में उतारा था. उनका मुकाबला कांग्रेस के मजबूत और अनुभवी चेहरे पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण से था. कड़े संघर्ष के बाद बीजेपी प्रत्याशी ने यहां जीत हासिल कर जिले में पार्टी का क्लीन स्वीप सुनिश्चित किया.
ये भी पढ़ें: Uttarakhand Elections 2027: पिथौरागढ़ की सभी 4 विधानसभा सीटों का पूरा सियासी गणित
दिशा सालियान केस में आदित्य ठाकरे के साथ फिल्मी हस्तियों के नाम भी शामिल, CBI ने दर्ज की FIR
सेलिब्रिटी मैनेजर रहीम दिशा सालियान की मौत से जल्द पर्दा हट सकता है. बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब यह केस सीबीआई के हाथ में है. सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली है और इसमें उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे से लेकर पुलिस और फिल्मी दुनिया की कई बड़ी हस्तियों के नाम भी शामिल हैं. क्या दिशा सालियान के रहस्यमई मौत का खुलासा हो जाएगा? क्या दिशा सालियान के परिवार को इंसाफ मिल जाएगा?
एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट के तौर पर ही देखा गया
दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की 2020 में हुई मौत के मामले में बड़ा ट्विस्ट आ गया है. बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है. 6 साल तक मुंबई पुलिस ने इसे सिर्फ एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट के तौर पर ही देखा था. अब केंद्रीय एजेंसी नए सिरे से जांच करेगी. सीबीआई की एफआईआर में महाराष्ट्र की सियासत, पुलिस और फिल्मी दुनिया के कई बड़ी हस्तियों के नाम शामिल हैं.
डीनो मौरिया और सूरज पंचोली का नाम सामने आए
एफआईआर में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे और पूर्व मंत्री अनिल देशमुख का नाम है. इसके अलावा कुछ सरकारी कर्मचारी पुलिस अधिकारियों के भी नाम एफआईआर में है. एफआईआर में तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह का भी नाम है. एफआईआर में अभिनेता डीनो मौरिया और सूरज पंचोली का नाम है. साथ ही अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती और शोभित चक्रवर्ती को भी एफआईआर में नामजद बनाया गया है.
आत्महत्या दिखाने की कोशिश की थी
सीबीआई ने दिशा के पिता सतीश सालियान का भी बयान दर्ज किया है. दिशा के पिता बेटी की हत्या का आरोप लगा चुके हैं. सतीश सालियान के वकील के मुताबिक आरोपियों ने झूठे सबूत और गवाह की मदद से इस हत्या मामले को आत्महत्या दिखाने की कोशिश की थी. दिशा सालियान का सामूहिक अत्याचार करके उसका मर्डर किया गया. उसके बाद में यह जो आरोपी थे आदित्य ठाकरे एंड आदर्श इनको बचाने के लिए पूरे पुलिस के रिकॉर्ड चेंज किए गए, झूठे गवाह बनाए गए, झूठा रिकॉर्ड बनाया गया और इसको आत्महत्या दिखाने का प्रयास किया. इस बारे में सती हाई कोर्ट ने जो रिकॉर्ड चेक करके पाया था हमारे केस में प्राइमासी सब्सटेंस है और उसके बाद में कोर्ट ने हमारा केस सीबीआई को आदेश दिया था कि इनका स्टेटमेंट रिकॉर्ड करके एफआईआर दर्ज किया जाए तो स्टेटमेंट हमारा रिकॉर्ड किया और रिकॉर्ड करने के बाद में सीबीआई ने गैंगरेप मर्डर कवर अप ये सब के तहत एफआईआर रजिस्टर किया है. दिशा केस के हर पहलू की सीबीआई जांच करने वाली है. मसलन दिशा की मौत किन परिस्थिति में हुई या फिर दिशा की हत्या की गई इसकी जांच भी की जाएगी.
एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी
दिशा सालियान की मौत 89 जून 2020 की रात मुंबई के मलाड इलाके में रिजेंट गैलेक्सी बिल्डिंग की ऊंची मंजिल से गिरने के बाद हुई थी. मुंबई पुलिस ने मालवाणी थाने में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी. और निष्कर्ष निकाला था कि यह आत्महत्या या दुर्घटना है. पिता सतीश सालन लंबे समय से इसे संदिग्ध बताते रहे हैं. इस मसले पर एआईएमआईएम का भी बयान सामने आया है. पार्टी के प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा है कि यह एक पिता की लड़ाई थी. अब सीबीआई इसमें इन्वेस्टिगेशन करेगी. जो भी दोषी होगा कोर्ट उसका फैसला करेगा.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation








