West Bengal Bypolls: BJP ने Nandigram से हसिरानी रथ और रेजीनगर से सखाराव सरकार को उतारा
पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक की मां हसिरानी रथ को नंदीग्राम सीट से और पार्टी के पूर्व मुर्शिदाबाद जिला अध्यक्ष सखाराव सरकार को रेजीनगर सीट से मंगलवार को अपना उम्मीदवार घोषित किया। रथ की उम्मीदवारी से पार्टी के नंदीग्राम अभियान से एक भावनात्मक पहलू जुड़ गया है क्योंकि उनके बेटे चंद्रनाथ रथ की उत्तर 24 परगना में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को हराकर भाजपा के सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद हुई थी।
चंद्रनाथ शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक के तौर पर काम कर चुके थे। वह छह मई को मध्यमग्राम में कार से जा रहे थे तभी मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उन पर कथित तौर पर गोली चलाईं। अस्पताल ले जाने के बाद उनकी मौत हो गई जबकि चालक घायल हो गया।
इस मामले की शुरुआती जांच राज्य पुलिस और एक विशेष जांच दल ने की थी जिसे बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया। नंदीग्राम में हसिरानी रथ की उम्मीदवारी को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। मंगलवार को भाजपा द्वारा उनके नाम की औपचारिक घोषणा से पहले ही उन्होंने वहां सिद्धेश्वर शिव मंदिर और जानकीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करके इन अटकलों पर मुहर लगा दी थी।
पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बड़े हुजूम के साथ वह आज बाद में हल्दिया में अपना नामांकन पत्र दायर करेंगी। मुख्यमंत्री के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। हसिरानी रथ राजनीति में नयी नहीं हैं।
भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि वह 1998 से राजनीति में सक्रिय हैं और दो बार पंचायत सदस्य और तीन बार पंचायत समिति सदस्य रह चुकी हैं। उन्होंने कहा था, ‘‘शुभेंदु अधिकारी हमारे परिवार के अभिभावक हैं।’’ उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी द्वारा उन्हें सौंपी गई किसी भी जिम्मेदारी को वह पूरी ईमानदारी से निभाएंगी। मंगलवार को मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के बाद भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि पार्टी द्वारा चुने जाने पर वह खुश हैं और उन्हें भरोसा है कि वह नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 1.10 लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज करेंगी।
भाजपा की नंदीग्राम रणनीति में चंद्रनाथ की हत्या से जुड़ी व्यक्तिगत कहानी के साथ-साथ विधानसभा क्षेत्र के व्यापक राजनीतिक महत्व को भी जोड़ा गया है। राज्य के भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीट पर जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखी और नंदीग्राम सीट छोड़ दी।
शुभेंदु अधिकारी के इस सीट को छोड़ने के कारण यहां चुनाव कराना अनिवार्य हो गया। रेजीनगर में भाजपा ने संगठनात्मक अनुभव रखने वाले चेहरे पर भरोसा जताया है। सरकार पार्टी के पूर्व मुर्शिदाबाद जिला अध्यक्ष और वर्तमान में प्रदेश समिति के सदस्य हैं।
दोनों विधानसभा सीट पर बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। कांग्रेस, वाम दल और तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी धड़ों द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद भाजपा भी चुनाव मैदान में उतर गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से पूर्व विधायक रबिउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है।
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल के बागी धड़े ने क्रमशः मोहम्मद एतेशामुल हक और सफीउज्जमान शेख को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से अब्दुल्लाहिल कफी़ को उम्मीदवार बनाया है जबकि वाम दलों ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के शांतिगोपाल गिरि और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सैयद असद अली को मैदान में उतारा है। सीटों के बंटवारे को लेकर माकपा से असहमति के बाद आरएसपी रेजीनगर में अलग से चुनाव लड़ रही है।
उसने विकास चंद्र मिश्रा को अपना उम्मीदवार बनाया है। रेजीनगर के चुनाव में पारिवारिक और राजनीतिक पहलू भी जुड़ा हुआ है। आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नौदा दोनों सीट पर जीत हासिल की थी और बाद में रेजीनगर सीट छोड़ दी।
अब वह इस सीट से अपने बेटे गुलाम नबी आजाद का समर्थन कर रहे हैं। आजाद ‘रॉबिन’ के नाम से मशहूर हैं। उपचुनाव की घोषणा तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद की पृष्ठभूमि में की गई थी।
निर्वाचन आयोग के इस सप्ताह यह फैसला करने की उम्मीद है कि दोनों में से किस धड़े को तृणमूल के ‘घास पर दो फूल’ वाले चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाएगी या उन्हें अस्थायी चुनाव चिह्न दिए जाएंगे। नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर छह अक्टूबर को मतदान होगा जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर है। मतगणना नौ अक्टूबर को होगी।
US दबाव में झुकी सरकार, Rahul Gandhi का आरोप- महंगे होंगे UPI Payments
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर ज़्यादा कीमत वाले UPI ट्रांज़ैक्शन पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस कदम से आगे चलकर ग्राहकों के लिए डिजिटल पेमेंट महंगा हो सकता है। UPI चार्ज पर सरकार के हालिया नोटिफिकेशन पर प्रतिक्रिया देते हुए, गांधी ने दावा किया कि सरकार ने 2,000 से ज़्यादा के मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का रास्ता चुपचाप खोल दिया है।
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गांधी ने कहा कि अब 2,000 से ज़्यादा के मर्चेंट UPI ट्रांज़ैक्शन पर MDR लगाया जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि भले ही ऐसे ट्रांज़ैक्शन कुल वॉल्यूम का एक छोटा हिस्सा हों, लेकिन UPI के ट्रांज़ैक्शन वैल्यू में इनका हिस्सा बहुत बड़ा है। हालांकि, सरकार ने अभी तक MDR रेट की घोषणा नहीं की है और न ही ₹2,000 से ज़्यादा के UPI ट्रांज़ैक्शन पर कोई चार्ज लगाया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी ताज़ा नोटिफ़िकेशन में साफ़ कहा गया है कि बैंक और सिस्टम प्रोवाइडर ₹2,000 तक के UPI ट्रांज़ैक्शन या RuPay-पावर्ड डेबिट कार्ड से किए गए पेमेंट पर कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चार्ज नहीं लगा सकते।
नए फ्रेमवर्क के तहत सरकार उन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों या ट्रांज़ैक्शन की जानकारी दे सकती है जिन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। 14 सितंबर के नोटिफिकेशन में खास तौर पर 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांज़ैक्शन को छूट दी गई है, जबकि इससे ज़्यादा रकम वाले ट्रांज़ैक्शन पर यह छूट लागू नहीं होगी। इस बदलाव से ऐसी उम्मीदें बढ़ गई हैं कि आगे चलकर ज़्यादा रकम वाले 'पर्सन-टू-मर्चेंट' (P2M) ट्रांज़ैक्शन पर MDR लागू किया जा सकता है।
गांधी ने कहा कि सरकार के इस भरोसे का मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। उन्होंने पूछा कि सरकार कहती है कि ग्राहकों से कोई फीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदारों पर लगाई जाने वाली फीस आखिर कहां से आएगी? उन्होंने तर्क दिया कि व्यापारी अंततः कीमतें बढ़ाकर यह खर्च ग्राहकों पर डाल सकते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पॉलिसी में यह बदलाव अमेरिका की उन पेमेंट कंपनियों की मांगों के अनुरूप है, जिन्होंने भारत के ज़ीरो-MDR मॉडल का विरोध किया है। गांधी ने कहा कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की ज़ीरो-MDR पॉलिसी का विरोध करती रही हैं। उन्होंने मोदी सरकार पर ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ने का आरोप लगाया जिससे इन कंपनियों को फ़ायदा होगा।
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उन्होंने इस मुद्दे को अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों पर चल रही बहस से भी जोड़ा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे झुक रहे हैं। जनवरी 2020 से UPI पर व्यक्ति-से-व्यापारी (person-to-merchant) ट्रांज़ैक्शन के लिए ज़ीरो-MDR व्यवस्था लागू है, और सरकार इसके बजाय इंसेंटिव स्कीम के ज़रिए इस इकोसिस्टम को सपोर्ट कर रही है। इस नए बदलाव से 2,000 तक के ट्रांज़ैक्शन के लिए कानूनी सुरक्षा मिलती है, जबकि ज़्यादा कीमत वाले मर्चेंट पेमेंट के लिए अलग नियम बनाने की गुंजाइश भी बनी रहती है। सरकार का कहना है कि एक खास MDR फ्रेमवर्क UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने में मदद कर सकता है, क्योंकि ट्रांज़ैक्शन की संख्या लगातार बढ़ रही है, और साथ ही रोज़ाना होने वाले कम कीमत वाले डिजिटल पेमेंट को भी सुरक्षा मिल सकती है।
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