बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर मेटा का बड़ा फैसला, कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देगा रिपोर्ट
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हानिकारक जानकारी पर रोक लगाने के लिए लगातार काम कर रही है। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के भारत में काम करने के लिए एक मौलिक सिद्धांत है और यह गैर-समझौता योग्य है।
इसी दिशा में मेटा ने बाल सुरक्षा से संबंधित मामलों को संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को रिपोर्ट करने पर सहमति जताई है। यह प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में पहला कदम है और अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
सरकार अन्य प्लेटफॉर्म के साथ भी लगातार संपर्क में है ताकि ऐसी सामग्री की सक्रिय रूप से पहचान की जा सके और उसे हटाया जा सके। सरकार ने साफ कहा है कि जो प्लेटफॉर्म बच्चों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम नहीं उठाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले 18 अगस्त को एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मेटा के बीच हुई चर्चाओं का मुख्य फोकस उन अवैध सामग्रियों के प्रबंधन पर रहा है जिन्हें एक बार हटाए जाने के बाद फिर से प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाता है।
सरकार का मानना है कि केवल सामग्री हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके दोबारा प्रसार को भी रोकना आवश्यक है। मेटा ने इस दिशा में कई कदम उठाने शुरू किए हैं और कंपनी विशेष रूप से सतर्क है, क्योंकि बाल यौन शोषण सामग्री भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।
कंपनी ऐसे मामलों की पहचान, हटाने और पुनः अपलोड को रोकने के लिए अपनी प्रणालियों को और मजबूत कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया था कि कंपनी उन मामलों पर भी काम कर रही है, जिनमें पहले चिह्नित और हटाई जा चुकी सामग्री किसी नए रूप या अलग माध्यम से दोबारा प्लेटफॉर्म पर दिखाई देती है। इसके लिए उन्नत तकनीकी प्रणालियों और पहचान तंत्र का उपयोग किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने मेटा सहित डिजिटल मंचों को स्पष्ट किया है कि यदि वे लागू भारतीय कानूनों का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें सेफ हार्बर सुरक्षा का लाभ नहीं मिल सकता। यह सुरक्षा सामान्यतः डिजिटल मंचों को उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा की गई सामग्री के लिए सीमित कानूनी संरक्षण प्रदान करती है।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया था कि सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सेंसरशिप लागू करना नहीं है। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि डिजिटल मंच भारतीय कानूनों और नियमों का पालन सुनिश्चित करें। सरकार का मानना है कि डिजिटल मंचों को सामाजिक हित और संभावित नुकसान के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए।
--आईएएनएस
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तमिलनाडु सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए विश्वविद्यालय की बना रही योजना
चेन्नई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु उच्च शिक्षा विभाग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, जलवायु प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहित उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करने वाले एक विशेष विश्वविद्यालय की स्थापना की तैयारी कर रहा है।
प्रस्तावित पेरियार इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्जिंग टेक्नोलॉजी प्रारंभ में अन्ना विश्वविद्यालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान के रूप में कार्य करेगा। विश्वविद्यालय को इसकी शैक्षणिक संरचना, अवसंरचना, अनुसंधान प्राथमिकताएं, वित्तपोषण आवश्यकताएं और अंतर्राष्ट्रीय सहयोगों को शामिल करते हुए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का कार्य सौंपा गया है। संस्थान का पहला शैक्षणिक सत्र पांच महीने के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।
सरकार की दीर्घकालिक योजना इसे एक स्वतंत्र विश्वविद्यालय में परिवर्तित करने की है, जिसे डिग्री प्रदान करने और उन्नत, अनुप्रयोग-उन्मुख अनुसंधान करने की शक्तियां प्राप्त होंगी।
प्रस्तावित संस्थान भारत और विदेश के प्रमुख विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और उद्योगों के साथ सहयोग करेगा। अन्ना विश्वविद्यालय प्रारंभिक साझेदारियों का समन्वय करेगा और उन्नत प्रौद्योगिकी के विकास के अनुरूप विशिष्ट डिग्री कार्यक्रम तैयार करेगा। संस्थान का मुख्य उद्देश्य उच्च कुशल स्नातकों और शोधकर्ताओं का एक समूह तैयार करना होगा जो उभरते औद्योगिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में योगदान देने में सक्षम हों। इसके शैक्षणिक कार्यक्रमों में कक्षा शिक्षण के साथ-साथ अनुसंधान, उत्पाद विकास और उद्योग-आधारित अनुप्रयोगों का संयोजन होने की उम्मीद है।
उच्च शिक्षा विभाग साथ ही साथ मूलभूत विज्ञानों को समर्पित एक उत्कृष्टता संस्थान की स्थापना के लिए भी काम कर रहा है।
संस्थान की स्थापना के लिए आवश्यक कानून चालू शैक्षणिक वर्ष में पेश किए जाने की संभावना है। बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान की तर्ज पर निर्मित, प्रस्तावित संस्थान को डिग्री प्रदान करने का अधिकार होगा और यह स्नातकोत्तर शिक्षा, डॉक्टरेट कार्यक्रमों और पोस्टडॉक्टोरल अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसके प्रमुख क्षेत्रों में भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित और कम्प्यूटेशनल जीवविज्ञान शामिल होंगे।
तमिलनाडु की योजना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग करने की भी है ताकि वैश्विक मानकों को पूरा करने वाले शैक्षणिक कार्यक्रम और अनुसंधान सुविधाएं विकसित की जा सकें।
वर्तमान में भारत भर में लगभग 30 प्रमुख संस्थान मौलिक विज्ञान अनुसंधान कार्य कर रहे हैं। केरल और ओडिशा के बाद तमिलनाडु तीसरा ऐसा राज्य बनने की उम्मीद है जो बुनियादी विज्ञान के लिए विशेष रूप से राज्य स्तरीय अनुसंधान संस्थान स्थापित करेगा।
इन पहलों के साथ-साथ, सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए आवश्यकताओं में ढील दी है। चेन्नई में न्यूनतम भूमि की आवश्यकता 100 एकड़ से घटाकर 12 एकड़ कर दी गई है और अन्य नगर निगम क्षेत्रों में यह 18 एकड़ है। अनिवार्य बंदोबस्ती निधि को भी 50 करोड़ रुपये से घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
इन परिवर्तनों का उद्देश्य विश्वसनीय शैक्षणिक संस्थानों को आकर्षित करना, निवेश को प्रोत्साहित करना और राज्य भर में विशेषीकृत उच्च शिक्षा और अनुसंधान सुविधाओं तक पहुंच का विस्तार करना है।
--आईएएनएस
एसएके/पीएम
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