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दावोस में पहली बार गूंजेगा झारखंड से ‘जोहार, प्राकृतिक संपदा से रूबरू होंगे विश्व भर के निवेशक

इस बैठक में भारत की ओर से केंद्रीय एवं अन्य राज्यों का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा. इस बैठक के लिए इंडिया पवेलियन में केंद्र सरकार द्वारा झारखण्ड समेत देश के छह राज्यों को चुना गया है. झारखंड 'ग्रोथ इन हार्मनी विद नेचर' के थीम के साथ इस बैठक में मौजूद रहेगा.

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यश@40; 300 रुपए लेकर घर छोड़ा, चाय परोसी:स्क्रिप्ट पढ़ने की मांग के चलते हाथ से 7 फिल्में निकलीं; KGF सीरीज से पैन-इंडिया स्टार बने

सुपरस्टार यश ने अपने संघर्ष, मेहनत और दमदार एक्टिंग के दम पर भारतीय सिनेमा में एक खास मुकाम हासिल किया है। KGF और KGF 2 जैसी फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाए, बल्कि करोड़ों दर्शकों के दिलों पर भी राज किया। हालांकि इतनी बड़ी सफलता का सफर यश के लिए आसान नहीं था। एक नॉन-फिल्मी परिवार से आने वाले यश के पिता ड्राइवर थे और फिल्मों तक उनका रास्ता थिएटर से होकर गुजरा। संघर्ष के दिनों में उन्होंने चाय परोसने तक का काम किया। आज यश के बर्थडे के खास मौके पर आइए उनकी जिंदगी को करीब से छूते हैं- शुरुआती जीवन और परिवार कर्नाटक में जन्मे यश का असली नाम नवीन कुमार गौड़ा है। परिवार से उन्हें दो नाम मिले। लीगल नाम नवीन रखा गया, जबकि मां की तरफ के परिवार ने उनका नाम यशवंत रखा। ज्योतिषीय कारणों से ‘य’ अक्षर से नाम रखने की परंपरा के चलते यह नाम चुना गया था। बाद में उन्होंने अपने नाम को छोटा कर ‘यश’ कर लिया, ताकि यह अलग और याद रखने में आसान हो। यश के पिता अरुण कुमार ने पहले कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन और बाद में बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में ड्राइवर के तौर पर काम किया। मां पुष्पा हाउसवाइफ थीं। उनकी एक छोटी बहन नंदिनी हैं, जिनकी शादी एक कंप्यूटर इंजीनियर से हुई है। बचपन में यश ने अपने परिवार के साथ एक छोटी किराना दुकान भी संभाली थी। यश को बचपन से ही एक्टिंग में इंट्रेस्ट था। वह स्कूल के दिनों में थिएटर और डांस कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेते थे। अपनी स्कूल की पढ़ाई उन्होंने मैसूर के महाजना एजुकेशन सोसाइटी से की। दसवीं के बाद यश पढ़ाई छोड़ एक्टिंग की फील्ड में जाना चाहते थे, लेकिन पेरेंट्स के कहने पर उन्हें बारहवीं तक पढ़ाई पूरी करनी पड़ी। इसके बाद साल 2003 में, 16 साल की उम्र में, यश बेंगलुरु पहुंचे। उनके पास उस समय सिर्फ 300 रुपए थे। वह एक फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने आए थे, लेकिन वह प्रोजेक्ट दो दिन में ही बंद हो गया। इसके बाद भी वह बेंगलुरु में ही रुके और थिएटर से जुड़ गए। जहां उन्होंने चाय परोसने से लेकर दूसरे कई तरह के छोटे-मोटे काम किए। उन्होंने बी. वी. कारंत द्वारा बनाए गए बेनका थिएटर ग्रुप में काम शुरू किया। यहां वह बैकस्टेज वर्कर थे और उन्हें रोज के 50 रुपए मिलते थे। धीरे-धीरे उन्होंने थिएटर में एक्टिंग भी शुरू की। इसी दौरान उन्होंने के. एल. ई. कॉलेज, बेंगलुरु से बैचलर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई पूरी की। थिएटर के दौरान फर्श तक साफ किए अनुपमा चोपड़ा को 2022 में दिए इंटरव्यू में यश ने बताया था कि थिएटर ने उनके भीतर बैठे अहंकार को तोड़ा और उन्हें जिंदगी को सही नजर से देखने की समझ दी। एक्टर ने बताया था कि कॉलेज के दिनों में वह काफी लापरवाह और गैर-जिम्मेदार थे। उस उम्र में उनके अंदर बहुत रॉ एनर्जी थी। वह हर जगह अलग दिखना चाहते थे। क्लास में हों या कॉलेज के बाहर, वह हमेशा कुछ हटकर करने की कोशिश में रहते थे। पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगा कि वह एक लार्जर दैन लाइफ इंसान बनने की कोशिश कर रहे थे। एक्टर ने बताया था कि कॉलेज के समय वह एक अच्छे डांसर थे, फेमस भी थे और खुद को स्टार जैसा महसूस करते थे। उन्हें लगता था कि हर कोई उन्हें देख रहा है, लड़कियां उनकी तरफ देख रही हैं और उनका एक मजबूत गैंग है, जिससे कोई टकरा नहीं सकता। लेकिन जब वह थिएटर से जुड़े, तो उनकी जिंदगी में बदलाव आया और यही वह मोड़ था जिसने उनके अहंकार को पूरी तरह खत्म कर दिया। थिएटर में उन्हें सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि जीवन का अनुशासन सीखा। थिएटर में फर्श साफ करना, सेट खड़ा करना, छोटे-मोटे काम करना ये सब उन्हें जमीन से जोड़े रखने वाले अनुभव थे। थिएटर ने उन्हें साहित्य से जोड़ा और जीवन को समझने का विजन दिया। टेलीविजन से करियर की शुरुआत यश ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत टेलीविजन सीरियल्स से की थी। साल 2004 में उन्होंने टीवी सीरियल उत्तरायण से डेब्यू किया। इसके बाद वह नंदा गोकुला, माले बिल्लू और प्रीति इल्लादा मेले जैसे सीरियल्स में नजर आए। शो नंदा गोकुला के दौरान ही उनकी मुलाकात एक्ट्रेस राधिका पंडित से हुई, जो बाद में उनकी लाइफ पार्टनर बनीं। जैसे ही टेलीविजन में यश का नाम बनना शुरू हुआ, उन्हें फिल्मों के ऑफर मिलने लगे, लेकिन जिन फिल्मों के उन्हें ऑफर मिले, वह उनकी स्क्रिप्ट पढ़ना चाहते थे। इंडस्ट्री में कुछ लोगों को यह बात पसंद नहीं आई और इसे एक नए कलाकार का एटीट्यूड समझा गया, जिसके चलते उनके हाथ से सात फिल्में चली गईं। फिल्मों में एंट्री और पहला ब्रेक यश ने साल 2007 में फिल्म जंबाड़ा हुडुगी से फिल्मों में कदम रखा। इसमें उन्होंने सपोर्टिंग रोल प्ले किया था। इसके बाद 2008 में आई फिल्म मोग्गिना मनसु में उनको बड़ा ब्रेक मिला। इस फिल्म में उनकी एक्टिंग की काफी तारीफ हुई और उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (कन्नड़) मिला। वहीं, यश की पहली लीड फिल्म रॉकी (2008) बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। इसके बाद कल्लारा संतहे और गोकुला जैसी उनकी फिल्में भी खास नहीं चलीं। हालांकि इन फिल्मों में उनकी एक्टिंग को लेकर चर्चा हुई। साल 2010 में आई फिल्म मोडलसाला यश की पहली सोलो हिट बनी। इसके बाद किरातका, लकी, जानू और ड्रामा जैसी फिल्मों ने उन्हें कन्नड़ सिनेमा में एक मजबूत एक्टर के तौर पर स्थापित किया। स्टारडम की ओर कदम साल 2013 से 2017 के बीच यश ने गुगली, राजा हुली, गजकेसरी, मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी, मास्टरपीस और संतु स्ट्रेट फॉरवर्ड जैसी हिट फिल्मों में काम किया। इस दौर में उनकी इमेज एक मास हीरो की बन गई। खास तौर पर मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई। साल 2014 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपए से अधिक का बिजनेस किया। KGF और पैन-इंडिया पहचान साल 2018 में आई फिल्म KGF: चैप्टर 1 ने यश को देशभर में पहचान दिलाई। फिल्म में उनके रॉकी किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया। प्रशांत नील के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने कन्नड़ सिनेमा के लिए नए रास्ते खोले। फिल्म कई भाषाओं में रिलीज हुई और जबरदस्त कमाई की। फिल्म ने दुनिया भर में लगभग 250 करोड़ रुपए की कमाई की। वहीं, इसने पहले दिन दुनिया भर में लगभग 25 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था, जो उस समय कन्नड़ सिनेमा के लिए एक रिकॉर्ड था। इसके बाद साल 2022 में आई यश की फिल्म KGF: चैप्टर 2 भी सुपरहिट साबित हुई और इसने भी कई रिकॉर्ड बनाए। यह कन्नड़ सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। इसने दुनिया भर में 1,215-1,250 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। यह भारत में 1,000 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन करने वाली चुनिंदा फिल्मों में से एक है। हिंदी वर्जन ने अकेले 434 करोड़ रुपए से अधिक की शुद्ध कमाई (Net) की थी। यह 1,000 करोड़ रुपए के क्लब में शामिल होने वाली पहली कन्नड़ फिल्म बनी। इस सीरीज की सफलता के बाद यश पैन-इंडिया स्टार बन गए। यश की लव स्टोरी यश और उनकी पत्नी राधिका पंडित की लव स्टोरी धीरे-धीरे पनपते उस रिश्ते की कहानी है, जो वक्त के साथ गहराता चला गया। यह कहानी शुरू होती है साल 2004 में, जब दोनों की पहली मुलाकात टीवी शो नंदा गोकुला के सेट पर हुई। शुरुआती मुलाकात में राधिका को यश थोड़े गंभीर और घमंडी लगे, क्योंकि वह कम बोलते थे और ज्यादा किसी से घुलते-मिलते नहीं थे। हालांकि धीरे-धीरे उनकी बातचीत शुरू हुई और उनकी दोस्ती गहरी होती गई। उन्होंने मोग्गिना मनसु, ड्रामा, मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी और संथु स्ट्रेट फॉरवर्ड जैसे कई प्रोजेक्ट्स में साथ काम किया, जिससे वे एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने लगे। काम के दौरान बनी यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। यश का प्यार का इजहार भी किसी फिल्मी अंदाज से कम नहीं था। वैलेंटाइन डे के दिन एक्टर ने अपने जज्बात एक गिफ्ट, फूल और एक कार्ड में लिखकर कार में रख दिए। शब्द तो कह दिए गए, लेकिन जवाब तुरंत नहीं मिला। राधिका ने वक्त लिया। करीब छह महीने लगे और उन्होंने यश के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। रिश्ता मजबूत हुआ, भरोसा बढ़ा और फिर दोनों की 12 अगस्त 2016 को गोवा में सगाई हुई। इसके बाद 9 दिसंबर 2016 को बेंगलुरु में एक प्राइवेट सेरेमनी में शादी हुई। शादी में कम ही लोग शामिल हुए थे। हालांकि शादी के बाद यश और राधिका ने बेंगलुरु पैलेस में एक बड़ा रिसेप्शन भी आयोजित किया, जिसमें उनके फैंस और इंडस्ट्री के कई लोग शामिल हुए। यश और राधिका के दो बच्चे एक बेटी और एक बेटा हैं। बेटी आयरा का जन्म 2 दिसंबर 2018 और बेटे यथरव का जन्म 30 अक्टूबर 2019 को हुआ। कपल सोशल मीडिया पर अक्सर अपने परिवार के साथ बिताए गए पलों की झलक शेयर करते रहते हैं। द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में यश ने अपनी पत्नी राधिका को अपनी ताकत बताया था। उन्होंने कहा था कि राधिका ने कभी उनके फैसलों पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि हमेशा यही पूछा कि वह खुश हैं या नहीं। वहीं, 2023 में इंस्टाग्राम पर एक QA सेशन में राधिका ने बताया था कि उनकी शादी की सफलता का राज दोस्ती है, क्योंकि यश और वह पहले सबसे अच्छे दोस्त थे और फिर पार्टनर बने। उनके रिश्ते की खासियत बराबरी, सपोर्ट और प्यार है, जो आज भी मजबूत है। फिल्में हिट होने के बाद भी पिता ने ड्राइवर का काम किया यश के पिता ने एक्टर के कई फिल्मों में काम करने और उन्हें सफलता मिलने के बाद भी बस ड्राइवर के रूप में काम करना जारी रखा। एक्टर की फिल्म मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी जबरदस्त हिट हुई थी, तब भी उनके पिता ड्राइवर के रूप में ही काम कर रहे थे। इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में यश ने बताया था कि उनके पिता का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में मिलने वाला सम्मान अस्थायी और फेक होता है। इसी वजह से वह इस इंडस्ट्री के ग्लैमर से दूरी बनाए रखना चाहते थे, ताकि इसकी आदत न पड़े। यश ने यह भी कहा था कि उनके माता-पिता आमतौर पर फिल्म इवेंट्स या शूटिंग पर नहीं आते हैं। केवल एक या दो मौकों पर ही वे उनकी शूटिंग या कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं। यश ने झील के पुनरुद्धार पर 4 करोड़ रुपए खर्च किए थे यश समाज सेवा के कार्यों में भी काफी एक्टिव रहते हैं। वह और उनकी पत्नी राधिका मिलकर समाज सेवा के कार्य करते हैं। कपल द्वारा संचालित यशो मार्ग फाउंडेशन कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में जल संकट और किसानों की समस्याओं पर केंद्रित होकर काम करता है। फाउंडेशन ने कर्नाटक के कोप्पल जिले की तल्लूर झील के पुनरुद्धार पर करीब 4 करोड़ रुपए खर्च किए थे, जिससे कई गांवों के ग्राउंड वाटर लेवल और खेती को फायदा हुआ। सूखे के समय उत्तर कर्नाटक के गांवों में पीने का पानी पहुंचाया गया। इसके अलावा किसानों और मजदूरों की आर्थिक मदद, वृक्षारोपण अभियान और 2018 में मदिकेरी जिले में आई बाढ़ में राहत कार्य भी किए गए। यश की अपकमिंग फिल्में साल 2026 में यश की दो बड़ी फिल्में रिलीज होंगी। पहली फिल्म टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स है, जिसे गीतू मोहनदास डायरेक्ट कर रही हैं। यह एक पीरियड गैंगस्टर ड्रामा फिल्म है और 19 मार्च 2026 को रिलीज होगी। एक्टर की दूसरी फिल्म रामायण: पार्ट 1 है, जिसमें यश रावण की भूमिका निभाएंगे। यह फिल्म इस साल दिवाली के मौके पर रिलीज होगी। इसमें यश के साथ रणबीर कपूर भी नजर आएंगे। फिल्म में रणबीर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, रवि दुबे लक्ष्मण, लारा दत्ता कैकेयी और सनी देओल हनुमान के रोल में नजर आएंगे। ..................................... बॉलीवुड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें.... दिलजीत @42, लोगों ने कहा पगड़ी वाले हीरो नहीं बनते:दिल लुमिनाटी टूर पर विवाद, पाकिस्तानी एक्ट्रेस के साथ काम करने पर देशद्रोह का आरोप पंजाब के फिल्लौर तहसील के दोसांझ कलां गांव में एक साधारण सिख परिवार में जन्मे दिलजीत दोसांझ की ग्लोबल स्टार बनने की कहानी इतनी भी आसान नहीं है। उनका बचपन आर्थिक दिक्कतों के बीच गुजरा है। इसलिए सिर्फ दसवीं तक ही पढ़ाई कर पाए। पूरी खबर यहां पढ़ें .....

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देहरादून विकास कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की समीक्षा बैठक, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

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