ईरान करने वाला है सरेंडर? राष्ट्रपति ट्रंप ने किया बड़ा दावा, तेल कीमतों पर कर दी ये भविष्यवाणी
US Iran War: अमेरिका ईरान युद्ध के बीच हथियारों की जंग के साथ जुबानी जंग भी चल रही है. एक तरफ अमेरिका लगातार युद्ध रोकने के लिए ईरान की प्रार्थना का दावा करते हैं, वहीं ईरान राष्ट्रपति ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर देता है. एक बार फिर ट्रंप ने ईरान के समझौते करने की चाहत का दावा किया है. साथ ही उन्होंने कच्चे तेल की कीमतों पर भी भविष्यवाणी की है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि ईरान अमेरिका के साथ जल्द से जल्द समझौता करना चाहता है. ट्रंप ने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच चल रहा संघर्ष खत्म होता है तो दुनिया में ऊर्जा और तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है. उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने में सफलता हासिल की है.
The failing Nation of Iran wants to make a deal, quickly and badly. I will determine whether or not the U.S.A. will choose to engage - The concept of which we are open to. Thank you for your attention to this matter! President DONALD J. TRUMP
— Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) September 14, 2026
( TS: Sep 14 2026, 11:32 AM ET )… pic.twitter.com/l6nWbFvOkf
समझौते के लिए ईरान को बताया उत्सुक
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट किए. इनमें उन्होंने ईरान के साथ संभावित बातचीत, दुनिया में तेल और ऊर्जा की आपूर्ति, अमेरिका के रक्षा उत्पादन और देश में महंगाई जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी. ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौते के लिए काफी उत्सुक है. उन्होंने बताया कि अमेरिका इस समय यह विचार कर रहा है कि तेहरान के साथ बातचीत शुरू की जाए या नहीं. ट्रंप के मुताबिक, अगर दोनों पक्षों के बीच समझौता होता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ेगा और तेल की कीमतें नीचे आ सकती हैं.
ईरान को बताया कमजोर देश
पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि ईरान जैसा कमजोर होता देश जल्द से जल्द और अपनी शर्तों से समझौता करना चाहता है. हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि अमेरिका इस समझौते में शामिल होना चाहता है या नहीं. इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद.
मदीना में मिला 11 करोड़ टन रेयर अर्थ मिनरल्स और यूरेनियम का भंडार, सऊदी अरब ने किया दावा
Saudi Arabia Uranium Reserves: सऊदी अरब में तेल के बाद यूरेनियम और दुर्लभ खनिजों का भंडार मिलने की बात सामने आई है. सऊदी अरब के सरकारी टीवी ने देश के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज बिन सलमान के हवाले से बताया है कि मदीना इलाके में यूरेनियम और दूसरे रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) वाले लगभग 11 करोड़ टन कच्चे माल का पता चला है.
कौन से रेयर अर्थ मिनरल्स मिलने का सऊदी अरब ने किया दावा?
'अरब न्यूज़' के मुताबिक, वियना में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की जनरल कॉन्फ्रेंस में प्रिंस बिन सलमान ने कहा कि जबल सायद में की गई खोज और जियोलॉजिकल स्टडीज से पता चला है कि यहां रेयर अर्थ एलिमेंट्स की भारी मात्रा के साथ-साथ यूरेनियम की भी अच्छी-खासी मात्रा भई मौजूद है. इसके साथ ही प्रिंस बिन सलमान ने कहा, "मदीना में जबल सायद प्रोजेक्ट पर खोज और जियोलॉजिकल स्टडीज से लगभग 11 करोड़ टन अयस्क के भंडार का पता चला है, जिसमें रेयर अर्थ मिनरल्स- खासकर भारी एलिमेंट्स और यूरेनियम की अच्छी मात्रा मौजूद है."
ऊर्जा मंत्री ने आगे कहा कि सऊदी अरब अपने अलग-अलग तरह के ऊर्जा और खनिज संसाधनों का फायदा उठाना चाहता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और सप्लाई की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विविधता लाना जरूरी हो गया है. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में एक सक्रिय पार्टनर के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत की है.
सऊदी अरब की परमाणु महत्वाकांक्षाएं
अल-अरबिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम और अमेरिका के साथ हाल ही में हुए अहम समझौते पर बात करते हुए प्रिंस अब्दुल अजीज ने कहा कि यह डील '123 एग्रीमेंट', 'खास स्वैच्छिक सुरक्षा इंतजोमों' और IAEA की निगरानी में होगी. इसके साथ ही सऊदी अरब के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि देश का इरादा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग रहकर या गुप्त गतिविधियों या छिपी हुई सुविधाओं के जरिए अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम विकसित करने का नहीं है.
'पारदर्शिता-अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित नीति अपनाता है सऊदी अरब'
ऊर्जा मंत्री ने कहा, "सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग रहकर, या गुप्त गतिविधियों या पहाड़ों के अंदर छिपी सुविधाओं के जरिए न्यूक्लियर प्रोग्राम विकसित नहीं करना चाहता." उनका यह बयान ईरान के दशकों से चल रहे भूमिगत न्यूक्लियर प्रोग्राम की ओर इशारा करता है. उन्होंने आगे कहा, "सऊदी अरब पारदर्शिता, खुलेपन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित एक स्पष्ट नीति अपनाता है."
सऊदी अरब के लिए क्यों अहम है यूरेनियम की खोज?
बता दें कि सऊदी अरब अपनी 'विजन 2030' रणनीति के तहत अपने ऊर्जा और खनिज संसाधनों में विविधता लाने के लिए लगातार निवेश कर रहा है. देश अपनी व्यापक ऊर्जा विविधता मुहिम के हिस्से के तौर पर घरेलू स्तर पर यूरेनियम निकालने और सिविल न्यूक्लियर पावर पर भी काम कर रहा है. ऐसे में प्राकृतिक तौर पर मिलने वाले यूरेनियम-युक्त अयस्क की खोज अहम है, क्योंकि यह सऊदी अरब में नागरिक परमाणु कार्यक्रम विकसित करने के लिए अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते के कुछ समय बाद ही हुई है.
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बता दें कि दोनों देशों ने जुलाई में इस समझौते और एक द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे 'दशकों तक चलने वाली, अरबों डॉलर की साझेदारी' की नींव पड़ी. इस समझौते के तहत, अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब को उसका नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने में मदद करेंगी. यह डील रियाद को अमेरिका की सीधी निगरानी के बिना देश के भीतर ही यूरेनियम को समृद्ध (एनरिच) करने का विकल्प भी देती है.
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