PM Modi-Putin Meeting: पुतिन को पीएम मोदी ने दी ‘तिरुक्कुरल’, जानें 1,330 दोहों वाले इस ग्रंथ की खासियत और रूस कनेक्शन
PM Modi-Putin Meeting: नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक खास उपहार दिया। पीएम मोदी ने पुतिन को प्राचीन तमिल क्लासिक ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया। यह किताब सिर्फ एक साहित्यिक कृति नहीं है, बल्कि इसमें नैतिकता, शासन, समाज और मानवीय रिश्तों से जुड़े विचारों को बेहद सरल तरीके से रखा गया है।
पीएम मोदी की ओर से दिया गया यह उपहार इसलिए भी खास है क्योंकि तिरुक्कुरल और रूस के बीच साहित्यिक जुड़ाव काफी पुराना माना जाता है। भारतीय दर्शन और साहित्य में रूसी लेखकों और बुद्धिजीवियों की रुचि लंबे समय से रही है।
क्या है तिरुक्कुरल?
Delhi | Prime Minister Narendra Modi presented Russian President Vladimir Putin with a Russian translation of the Thirukkural, an ancient Tamil classic. https://t.co/P8cuEpNfVl pic.twitter.com/sn5n9LUmFL
— ANI (@ANI) September 11, 2026
तिरुक्कुरल तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना है। इसमें कुल 133 अध्याय और 1,330 दोहे हैं। छोटे-छोटे दोहों के माध्यम से जीवन, नैतिकता, परिवार, समाज, राजनीति, शासन और प्रेम जैसे विषयों पर विचार दिए गए हैं।
तिरुक्कुरल को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है
- भाग विषय अध्याय
- अरम धर्म, सदाचार और सही आचरण 1-38
- पोरुल समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और शासन 39-108
- इन्बम प्रेम, स्नेह और रिश्ते 109-133
इस तरह तिरुक्कुरल व्यक्ति के निजी जीवन से लेकर समाज और शासन तक के लिए विचार प्रस्तुत करता है।
तिरुक्कुरल का रूस से क्या है कनेक्शन?
तिरुक्कुरल का प्रभाव भारत तक सीमित नहीं रहा। इसके विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हुए और इसी के जरिए यह दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचा। रूस में भी भारतीय दर्शन और साहित्य के प्रति रुचि काफी पुरानी रही है।
19वीं सदी में लियो टॉल्स्टॉय जैसे रूसी साहित्यकारों तक भारतीय विचारों की पहुंच बनी। तिरुक्कुरल के सदाचार, करुणा और अहिंसा जैसे विचारों को टॉल्स्टॉय के दार्शनिक चिंतन से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, टॉल्स्टॉय पर तिरुक्कुरल के प्रभाव की वास्तविक सीमा को लेकर इतिहासकारों के बीच पूरी तरह निश्चित निष्कर्ष नहीं है।
टॉल्स्टॉय और महात्मा गांधी के बीच हुए पत्राचार के संदर्भ में भी तिरुक्कुरल का उल्लेख किया जाता है। लेकिन इस बात के पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं कि टॉल्स्टॉय ने सीधे गांधी को तिरुक्कुरल पढ़ने की सलाह दी थी या गांधी के अहिंसा संबंधी विचारों पर इसका कितना प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा।
पुतिन को दिया गया रूसी संस्करण क्यों खास है?
पीएम मोदी ने जब पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया, तो यह उपहार भारत की तमिल साहित्यिक परंपरा और रूस के पुराने साहित्यिक जुड़ाव को जोड़ने वाला संदेश भी बन गया।
इस संस्करण को सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल ने प्रकाशित किया है। इसमें मूल तमिल छंदों के साथ उनका लिप्यंतरण और रूसी अनुवाद शामिल है। रूसी अनुवाद नायरा म्क्र्तच्यन (Naira Mkrtchyan) ने किया है।
तिरुक्कुरल में क्यों महत्वपूर्ण हैं अरम, पोरुल और इन्बम?
तिरुक्कुरल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जीवन को अलग-अलग पहलुओं से देखने की कोशिश करता है। अरम में व्यक्ति के अच्छे आचरण और नैतिक जिम्मेदारियों पर जोर है। पोरुल में समाज, शासन, राजनीति और आर्थिक जीवन से जुड़े विषय आते हैं। वहीं इन्बम में प्रेम और मानवीय रिश्तों की बात की गई है।
इसके तीन हिस्से भारतीय चिंतन की धर्म, अर्थ और काम जैसी अवधारणाओं से कुछ समानता रखते हैं। हालांकि, तिरुक्कुरल में इन तीनों के साथ मोक्ष को अलग विषय के रूप में शामिल नहीं किया गया है।
तिरुक्कुरल क्यों है खास?
- इसमें 1,330 दोहे हैं।
- रचना 133 अध्यायों में विभाजित है।
- इसमें नैतिकता से लेकर शासन तक की चर्चा है।
- यह मूल रूप से तमिल भाषा की महान साहित्यिक कृतियों में शामिल है।
- इसके कई भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं।
- इसके विचार आज भी सामाजिक जीवन, प्रशासन और मानवीय रिश्तों के संदर्भ में प्रासंगिक माने जाते हैं।
कुल मिलाकर, पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी संस्करण भेंट करना सिर्फ एक किताब देना नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन साहित्यिक विरासत को रूस के साथ साझा करने का प्रतीकात्मक संदेश भी है। यह उपहार तमिल संस्कृति, भारतीय दर्शन और भारत-रूस के पुराने बौद्धिक संबंधों को एक साथ सामने लाता है।
पुतिन को PM मोदी ने क्यों दी ‘तिरुक्कुरल’ की रूसी प्रति? 1,330 दोहों वाले इस ग्रंथ का रूस से है पुराना कनेक्शन
FAQ
तिरुक्कुरल क्या है?
तिरुक्कुरल तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना है। इसमें नैतिकता, समाज, शासन, प्रेम और मानवीय जीवन से जुड़े विचारों को 1,330 दोहों में प्रस्तुत किया गया है।
तिरुक्कुरल में कितने दोहे हैं?
तिरुक्कुरल में कुल 1,330 दोहे हैं, जो 133 अध्यायों में विभाजित हैं।
तिरुक्कुरल के तीन भाग कौन से हैं?
तिरुक्कुरल के तीन प्रमुख भाग अरम, पोरुल और इन्बम हैं। इनमें क्रमशः सदाचार, समाज-शासन और प्रेम से जुड़े विषयों की चर्चा है।
पीएम मोदी ने पुतिन को क्या भेंट किया?
BRICS Summit 2026 के दौरान पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया।
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कालीघाट मंदिर: सुवेंदु अधिकारी ने खाया मछली का भोग, BJP बोली- अब नॉनवेज विवाद खत्म होना चाहिए
पश्चिम बंगाल में धार्मिक परंपराओं और खान-पान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कालीघाट मंदिर तक पहुंच गया है। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली हिंदुओं से मांसाहार छोड़ने की अपील के बाद बंगाल में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। इसी बीच बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कौशिकी अमावस्या के अवसर पर कोलकाता के कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की और पारंपरिक मछली का भोग ग्रहण किया।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान बंगाल में मांस और शराब की दुकानें बंद रखने की अपील की थी। उनके बयान पर बंगाल में राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई। आलोचकों का कहना था कि बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में मछली का विशेष स्थान है और कई शाक्त परंपराओं में इसे देवी को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है।
बीजेपी का राजनीतिक संतुलन
इस पूरे विवाद के बीच बीजेपी नेताओं के बयानों में बंगाल की स्थानीय संस्कृति और खान-पान की परंपराओं पर जोर दिया गया। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल के लोगों के खान-पान का फैसला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं कर सकता। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सुवेंदु अधिकारी के कालीघाट में मछली का भोग ग्रहण करने को बंगाल की आस्था और जीवनशैली के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि नॉनवेज को लेकर विवाद अब खत्म होना चाहिए।
कालीघाट और बंगाल की शाक्त परंपरा
बंगाल की शाक्त परंपरा में मछली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रहा है। कालीघाट में देवी को विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए जाने की परंपरा है। इसी वजह से सुवेंदु अधिकारी का मछली का भोग ग्रहण करना मौजूदा राजनीतिक विवाद के बीच खासा चर्चा में आया है।
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