MF Return: म्यूचुअल फंड का रिटर्न देखते समय न करें ये गलती, समझें CAGR और XIRR का फर्क
म्यूचुअल फंड में निवेश करने के बाद सबसे पहले निवेशक यह जानना चाहता है कि उसके पैसे ने कितना रिटर्न दिया लेकिन सिर्फ रिटर्न का प्रतिशत देखना काफी नहीं है। सीएजीआर, XIRR और एबसोल्यूट रिटर्न तीनों अलग-अलग तरीके से निवेश के प्रदर्शन को मापते हैं। इसलिए सही तस्वीर पाने के लिए यह समझना जरूरी है कि किस तरह के निवेश में कौन-सा रिटर्न देखना चाहिए।
गलत रिटर्न इंडिकेटर का इस्तेमाल करने पर निवेशक को अपने पोर्टफोलियो की वास्तविक ग्रोथ के बारे में भ्रम हो सकता। खासकर एसआईपी करने वाले निवेशकों के लिए यह समझना ज्यादा जरूरी है, क्योंकि इसमें पैसा एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग तारीखों पर निवेश होता है।
लंपसंम निवेश में CAGR ज्यादा उपयोगी
अगर आपने किसी म्यूचुअल फंड में एकमुश्त यानी लंपसंप पैसा लगाया है और उसे कई साल तक निवेशित रखा है, तो सीएजीआर आपके लिए ज्यादा उपयोगी हो सकता है। CAGR यानी Compounded Annual Growth Rate यह बताता है कि निवेश ने औसतन हर साल कितनी दर से ग्रोथ की।
उदाहरण के लिए, अगर एकमुश्त निवेश पांच साल तक रखा गया, तो सीएजीआर निवेश की सालाना औसत वृद्धि को समझने में मदद करता है। इसमें साल-दर-साल होने वाले उतार-चढ़ाव को एक औसत वार्षिक दर में दिखाया जाता है। हालांकि, सीएजीआर ऐसे निवेश के लिए सही पैमाना नहीं है जिसमें अलग-अलग समय पर लगातार पैसा लगाया गया हो।
SIP के लिए XIRR क्यों जरूरी?
एसआईपी में हर किस्त अलग तारीख को निवेश होती है। अलग-अलग तारीखों पर निवेश होने के कारण हर किस्त को बाजार में पैसा बढ़ाने के लिए अलग समय मिलता है। ऐसे में सिर्फ सीएजीआर या एबसोल्यूट रिटर्न देखने से पोर्टफोलियो की सही तस्वीर नहीं मिल सकती।
यहीं XIRR यानी एक्सटेंडेट इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न काम आता है। XIRR अलग-अलग तारीखों पर किए गए निवेश और निकासी को ध्यान में रखकर सालाना रिटर्न की गणना करता है। इसलिए इसमें निवेश की रकम के साथ-साथ पैसा कब लगाया गया और कब निकाला गया, दोनों चीजें शामिल होती हैं। इसी वजह से नियमित SIP और बीच-बीच में किए गए टॉप-अप वाले निवेश के लिए XIRR आमतौर पर ज्यादा उपयोगी माना जाता है।
Absolute Return क्या बताता है?
एबसोल्यूट रिटर्न सबसे आसान तरीके से निवेश पर हुए कुल लाभ या नुकसान को बताता है। इसमें यह देखा जाता है कि शुरुआती निवेश की तुलना में मौजूदा वैल्यू कितनी बढ़ी या घटी है।
यह तरीका खासकर कम अवधि के निवेश, जैसे एक साल से कम समय के लिए, उपयोगी हो सकता है। समान अवधि के दो निवेशों की तुलना करने में भी एबसोल्यूट रिटर्न मददगार है। लेकिन इसमें यह नहीं देखा जाता कि पैसा कितने समय तक निवेशित रहा। मसलन, तीन साल में मिला 45% रिटर्न और एक साल में मिला 45% रिटर्न एक जैसी ग्रोथ नहीं दर्शाते। इसलिए अलग-अलग अवधि वाले निवेशों की तुलना एबसोल्यूट रिटर्न के आधार पर करना सही नहीं होगा।
किस स्थिति में कौन-सा रिटर्न देखें?
म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन को समझने के लिए सिर्फ सबसे बड़ा रिटर्न प्रतिशत देखना सही तरीका नहीं है। एकमुश्त और लंबे समय के निवेश में CAGR, अलग-अलग तारीखों पर किए गए निवेश या एसआईपी में XIRR, जबकि छोटी और समान अवधि के निवेश में एबसोल्यूट रिटर्न ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
यानी सही रिटर्न वही है जो आपके निवेश के तरीके और अवधि को ध्यान में रखकर गणना किया गया हो। नियमित SIP से लंबी अवधि में पैसा बनाने वाले निवेशकों के लिए XIRR पोर्टफोलियो की वास्तविक परफॉर्मेंस समझने का ज्यादा बेहतर पैमाना हो सकता है।
बेटी के भविष्य के लिए बचत: पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि में कौन सा विकल्प बेहतर? जानें पूरा गणित
बेटी की पढ़ाई, शादी या भविष्य की दूसरी जरूरतों के लिए समय रहते बचत शुरू करना हर माता-पिता की प्राथमिकता होती है। ऐसे में सही निवेश विकल्प चुनना आसान नहीं होता। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) दोनों ही सरकार समर्थित बचत योजनाएं हैं, लेकिन इनके नियम, ब्याज दर, निवेश अवधि और पैसे निकालने की सुविधा अलग-अलग है।
फिलहाल सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2% और PPF पर 7.1% ब्याज मिल रहा। यानी ब्याज के मामले में SSY आगे है, लेकिन इसमें पैसे निकालने की सुविधा काफी सीमित है। पीपीएफ में ब्याज थोड़ा कम है, लेकिन जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने और खाते को आगे जारी रखने के ज्यादा विकल्प मिलते हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना: बेटी के लिए खास और ज्यादा ब्याज वाली योजना
सुकन्या समृद्धि योजना खास तौर पर 10 साल से कम उम्र की बच्ची के लिए खोली जा सकती। खाते की मैच्योरिटी खाता खोलने की तारीख से 21 साल बाद होती है। हालांकि, इसमें पैसा जमा करने की जरूरत सिर्फ शुरुआती 15 साल तक होती है।
SSY उन माता-पिता के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है, जो अपनी बेटी के लिए अलग से लंबी अवधि का फंड बनाना चाहते हैं और उन्हें बीच में इस पैसे की जरूरत पड़ने की संभावना कम है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका 8.2% ब्याज है। हालांकि, ज्यादा ब्याज के साथ पैसे तक पहुंच के नियम भी सख्त हैं।
18 साल के बाद निकाला जा सकता है 50% पैसा
सुकन्या समृद्धि योजना में सामान्य जरूरत के लिए कभी भी पैसा निकालने की सुविधा नहीं है। बच्ची के 18 साल की उम्र पूरी करने के बाद खाते में मौजूद राशि का अधिकतम 50% निकाला जा सकता है। यह सुविधा मुख्य रूप से उच्च शिक्षा के खर्च के लिए दी जाती है।
निकासी की सीमा पिछले वित्त वर्ष के अंत में खाते में मौजूद राशि के आधार पर तय होती है। पूरी रकम एक साथ निकालना जरूरी नहीं है। जरूरत के हिसाब से निर्धारित नियमों के तहत किस्तों में भी राशि निकाली जा सकती है।
कुछ विशेष परिस्थितियों में खाता 21 साल पूरे होने से पहले बंद भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, बच्ची की 18 साल की उम्र के बाद शादी होने पर लागू शर्तों के अनुसार खाता बंद किया जा सकता है। खाताधारक की मृत्यु या गंभीर आर्थिक परिस्थितियों जैसे मामलों में भी निर्धारित नियमों के तहत समय से पहले बंद करने की अनुमति मिल सकती है।
PPF में कम ब्याज, लेकिन ज्यादा लचीलापन
पीपीएफ की शुरुआती अवधि 15 साल है। इसके बाद खाते को 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाया जा सकता है। यही नहीं, तय अवधि पूरी होने के बाद इसमें आंशिक निकासी और लोन जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।
पीपीएफ में समय से पहले खाता बंद करने की सुविधा भी है, लेकिन इसके लिए खाता खोलने वाले वित्त वर्ष के अंत से 5 साल पूरे होना जरूरी है और निर्धारित कारण होना चाहिए। इनमें खाताधारक, उसके पति/पत्नी, बच्चों या आश्रित माता-पिता की गंभीर बीमारी का इलाज, खाताधारक या उसके बच्चों की उच्च शिक्षा और खाताधारक की आवासीय स्थिति में बदलाव जैसे कारण शामिल हैं।
यानी PPF उन माता-पिता के लिए उपयोगी हो सकता है, जो बेटी के भविष्य के लिए बचत तो करना चाहते हैं, लेकिन पूरी रकम को सिर्फ बेटी से जुड़ी जरूरतों के लिए लॉक नहीं करना चाहते।
तो किसे चुनना बेहतर?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दोनों योजनाएं सरकारी समर्थन वाली हैं, लेकिन इनकी पात्रता, अवधि, ब्याज और निकासी के नियम अलग हैं। इसलिए चुनाव बच्चे की उम्र, निवेश की अवधि और पैसे के उद्देश्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
अगर लक्ष्य बेटी के नाम पर लंबी अवधि का एक समर्पित फंड तैयार करना है और बीच में पैसे की जरूरत नहीं होगी, तो SSY अपने ज्यादा ब्याज और विशेष संरचना के कारण बेहतर विकल्प हो सकती है।
वहीं, अगर लचीलापन ज्यादा महत्वपूर्ण है, तो पीपीएफ बेहतर साबित हो सकता है। यह बेटी की पढ़ाई के साथ परिवार के दूसरे दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
ऐसा भी जरूरी नहीं कि दोनों में से सिर्फ एक ही योजना चुनी जाए। आर्थिक क्षमता होने पर SSY में बेटी के लिए अलग फंड और PPF में परिवार के व्यापक दीर्घकालिक लक्ष्य के लिए निवेश किया जा सकता है। इस तरह दोनों योजनाओं की अलग-अलग खूबियों का फायदा उठाया जा सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
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