Share Market: ईरान-अमेरिका तनाव से सहमा बाजार, Nifty 23,850 पर फिसला; इन शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
Share Market Opening: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में Nifty 50 करीब 50 अंक गिरकर 23,850 के आसपास पहुंच गया, जबकि Bank Nifty भी 135 अंक टूटकर 57,250 के करीब कारोबार करता दिखा। बाजार के ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में हैं और मीडिया शेयरों पर सबसे ज्यादा बिकवाली का दबाव नजर आ रहा है।
भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सप्ताह की शुरुआत दबाव के साथ हुई। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच निवेशकों की धारणा कमजोर नजर आई। बाजार खुलते ही Nifty 50 और Bank Nifty में गिरावट देखने को मिली।
शुरुआती कारोबार में Nifty करीब 50 अंक टूटकर 23,850 के आसपास कारोबार करता रहा। वहीं Bank Nifty में करीब 135 अंकों की गिरावट रही और यह 57,250 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा था।
ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में
आज के कारोबारी सत्र में बाजार के ज्यादातर सेक्टर दबाव में नजर आए। इनमें मीडिया शेयरों पर सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव से जुड़े घटनाक्रम पर बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। तेल की कीमतों में लगातार तेजी से महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की चिंता बाजार में बनी रहती है।
ग्लोबल बाजारों में भी दबाव
भारतीय बाजार के अलावा एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख दिखाई दिया। हैंगसेंग और शंघाई कंपोजिट में करीब 290 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर जापान के निक्केई में तेजी रही और यह करीब 1.77 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया।
अमेरिकी बाजार के संकेत भी कमजोर रहे। डॉव फ्यूचर्स में करीब 191 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू बाजार की शुरुआती धारणा पर भी दबाव देखने को मिला।
11 शेयरों में खरीदारी, 39 में बिकवाली
शुरुआती कारोबार में निफ्टी का Advance-Decline Ratio 11:39 रहा। यानी निफ्टी के 11 शेयर बढ़त में कारोबार कर रहे थे, जबकि 39 शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इससे बाजार में बिकवाली के व्यापक दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
ये शेयर बढ़त में निफ्टी के शुरुआती कारोबार में इटरनल, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, कोल इंडिया और अपोलो हॉस्पिटल टॉप गेनर्स में शामिल रहे।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी
वहीं, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, बजाज ऑटो, एचडीएफसी लाइफ और अल्ट्राटेक सीमेंट शुरुआती कारोबार में प्रमुख लूजर्स में रहे।
निवेशकों की नजर अब दिनभर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों के रुख और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े नए घटनाक्रम पर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों को शेयरों में कारोबार करते समय जोखिम और अपनी निवेश रणनीति का ध्यान रखना चाहिए।
USD vs Rupee: आरबीआई की डॉलर आमदनी से रुपया मजबूत, 10 हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा
भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 94.4850 पर बंद हुआ। यह करीब 10 हफ्ते का सबसे मजबूत क्लोजिंग स्तर है। रुपये में एक दिन में 0.5% की तेजी आई और यह 27 जुलाई के बाद की सबसे बड़ी दैनिक बढ़त रही।
RBI की स्कीम से उम्मीद से ज्यादा डॉलर आया
रुपये की मजबूती की सबसे बड़ी वजह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की विशेष योजना के तहत उम्मीद से ज्यादा डॉलर का भारत आना रहा। बाजार को इससे संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक के पास अब रुपये को संभालने के लिए पर्याप्त डॉलर उपलब्ध हैं और वह जरूरत पड़ने पर ज्यादा सक्रिय तरीके से बाजार में दखल दे सकता है।
शिनहन बैंक के ट्रेजरी हेड कुणाल सोढ़ानी के मुताबिक, उम्मीद से ज्यादा डॉलर की आमद भारतीय रिजर्व बैंक की स्थिति को काफी मजबूत करती। उनके अनुसार, केंद्रीय बैंक की रणनीति अब सिर्फ रुपये को गिरने से रोकने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह दोनों दिशाओं में रुपये को मैनेज कर सकता है।
सुबह 94.30 पर खुला रुपया, फिर मुनाफा घटा
भारतीय रुपया गुरुवार को 94.30 प्रति डॉलर पर खुला था। शुरुआती तेजी के बाद आयातकों की डॉलर मांग बढ़ी और रुपये की बढ़त कुछ कम हो गई। कारोबार के दौरान यह 94.49 तक कमजोर हुआ, लेकिन अंत में 94.4850 पर बंद हुआ।
RBI की फॉरवर्ड डॉलर पोजीशन पहले ही करीब 137 अरब डॉलर है। ऐसे में ज्यादा डॉलर सप्लाई मिलने से केंद्रीय बैंक के पास तेज उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए अतिरिक्त गुंजाइश बनती है।
महंगा कच्चा तेल बन सकता है बड़ी चिंता
फिलहाल रुपये को राहत जरूर मिली है, लेकिन आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए बड़ी चिंता बनी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े सैन्य तनाव से क्रूड की कीमतों में तेजी आई है।
अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है तो भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे व्यापार घाटे पर दबाव आएगा। ऐसे माहौल में आयातक पहले से डॉलर खरीदकर अपनी जरूरत सुरक्षित करने की कोशिश कर सकते हैं। इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
यूएस में ब्याज दर बढ़ने की आशंका से भी दबाव
कच्चे तेल की तेजी से महंगाई की चिंता बढ़ी है। इसका असर दुनियाभर के बॉन्ड यील्ड पर पड़ा है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की इस महीने ब्याज दर बढ़ाने की संभावना भी मजबूत हुई है।
10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब 4.78% रही, जो लगभग तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर के आसपास है। सितंबर में फेड की ब्याज दर बढ़ाने की संभावना करीब 63% आंकी जा रही है।
यानी फिलहाल RBI की डॉलर आमद से रुपये को मजबूती मिली है, लेकिन महंगा तेल और अमेरिकी ब्याज दरों की तस्वीर आने वाले दिनों में इसकी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
(प्रियंका कुमारी)
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