RCFL case: सीबीआई ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड मामले में दाखिल की सप्लीमेंट्री चार्जशीट, 17 नए नाम शामिल
RCFL case: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मुंबई स्थित एक विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े धोखाधड़ी मामले में अपनी पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर कर दी है। इस नवीनतम चार्जशीट में कुल 17 नए आरोपियों के नाम जोड़े गए हैं, जिनमें रिलायंस एडीए (ADA) ग्रुप के तीन वरिष्ठ अधिकारी, आठ अलग-अलग कंपनियां और छह बैंक अधिकारी शामिल हैं।
किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?
जांच एजेंसी द्वारा इन सभी नामजद आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधानों के अंतर्गत आपराधिक साजिश रचने, आपराधिक विश्वासघात (हेराफेरी) और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, इन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के सुसंगत नियमों के तहत भी कानूनी कार्रवाई का शिकंजा कसा गया है।
फंड के हेरफेर और वित्तीय नुकसान का खुलासा
सामने आई जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह बात प्रकाश में आई है कि आरसीएफएल (RCFL) द्वारा प्राप्त किए गए कुल 6,229.54 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को विभिन्न मध्यवर्ती (intermediary) कंपनियों और अन्य माध्यमों का उपयोग करके रिलायंस एडीए ग्रुप की दूसरी अन्य कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया था। इस कथित हेरफेर और वित्तीय अनियमितता के कारण बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
विभिन्न बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य कर्जदाताओं को हुए इस समग्र वित्तीय नुकसान का कुल आकलन लगभग 9,280 करोड़ रुपये लगाया गया है। इस नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट के दाखिल होने के बाद, अब इस बहुचर्चित मामले में कुल अभियुक्तों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण से जुड़ी आगे की तहकीकात और जांच अभी भी जारी है।
भारत के पावर ट्रांसमिशन सेक्टर में एल्युमीनियम की बढ़ेगी मांग, 9.15 लाख करोड़ रुपये के निवेश से मिलेगा बूस्ट
Aluminium demand India: भारत सरकार देश में रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने और बिजली की बढ़ती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है। इस बड़े बदलाव के चलते आने वाले वर्षों में एल्युमीनियम की मांग में जबरदस्त उछाल आने की पूरी संभावना है, और विभिन्न इलेक्ट्रिकल एप्लीकेशंस में इस धातु की खपत में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
एल्युमीनियम की खपत में भारी इजाफा
माइंस मिनिस्ट्री के एल्युमीनियम विजन डॉक्यूमेंट के मुताबिक, विद्युत क्षेत्र में एल्युमीनियम की खपत वित्तीय वर्ष 2024 में लगभग 2.4 मिलियन टन थी। इसके वित्तीय वर्ष 2030 तक बढ़कर 4 मिलियन टन और वित्तीय वर्ष 2047 तक 12.9 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। यह आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि देश के इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में एल्युमीनियम की भूमिका कितनी अहम होती जा रही है।
ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर की मुख्य भूमिका
यह अवसर खास तौर पर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर के लिए बेहद खास है, जो देश में कुल एल्युमीनियम की खपत का एक बहुत बड़ा हिस्सा उपयोग करता है। भारत में इस्तेमाल होने वाले कुल एल्युमीनियम का करीब 48 फीसदी हिस्सा अकेले बिजली के ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र में ही खपत होता है। नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान (2023-2032) के तहत देश के ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर 9.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम निवेश करने की योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत 1.91 लाख सर्किट किलोमीटर से ज्यादा नई ट्रांसमिशन लाइनें बिछाई जाएंगी और लगभग 1,270 जीवीए (GVA) की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता तैयार की जाएगी।
एल्युमीनियम क्यों है सबसे बेहतर विकल्प?
ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइनों में एल्युमीनियम का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है क्योंकि यह कॉपर के मुकाबले काफी हल्का होता है और लंबी दूरी तक फैले होने पर इसके लटकने (सैगिंग) की संभावना कम होती है। एल्युमीनियम में इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी, कम वजन और मजबूती का बेहतरीन संतुलन पाया जाता है, जो इसे लंबी दूरी तक बिजली की सप्लाई के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है। इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और डेटा सेंटर जैसे उभरते हुए क्षेत्रों से भी बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है।
घरेलू उत्पादकों और वेदांता की स्थिति
भारत के एल्युमीनियम उद्योग के लिए यह विकास का एक नया जरिया साबित हो रहा है। वेदांता जैसी एकीकृत एल्युमीनियम और डाउनस्ट्रीम क्षमता वाली कंपनियां इस बदलाव का पूरा फायदा उठाने की स्थिति में हैं। वेदांता की कुल एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता करीब 2.4 मिलियन टन है और यह वायर रॉड, बिलेट, इनगॉट और रोल्ड उत्पादों का निर्माण करती है। वेदांता दुनिया में इलेक्ट्रिकल ग्रेड वायर रॉड की सबसे बड़ी उत्पादक भी है, जो पावर ट्रांसमिशन को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही है।
इस सेक्टर की संभावनाओं को देखते हुए प्रमुख ब्रोकरेज हाउस भी वेदांता के शेयरों को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं:
- Systematix: Buy रेटिंग, टारगेट प्राइस ₹598 (12 महीने)
- Nuvama / MOSL: Buy रेटिंग, टारगेट प्राइस ₹540 (12 महीने)
- ICICI Securities: Buy रेटिंग, टारगेट प्राइस ₹520 (12 महीने)
- Geojit: Buy रेटिंग, टारगेट प्राइस ₹498 (12 महीने)
वेदांता के एक प्रवक्ता ने इस अवसर पर कहा कि भारत का पावर ट्रांजिशन तेजी से एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की शक्ल ले रहा है, जिसमें ट्रांसमिशन सबसे मुख्य हिस्सा होगा। रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन बढ़ने और नए खपत केंद्र बनने के साथ भरोसेमंद तरीके से बिजली पहुंचाना उतना ही जरूरी है जितना कि उसका उत्पादन करना। इस प्रकार, लगातार हो रहे ग्रिड आधुनिकीकरण और निवेश से एल्युमीनियम देश के एनर्जी ट्रांजिशन को एक नई दिशा दे रहा है।
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