Responsive Scrollable Menu

शेफ़ाली-दीप्ति के तूफान से India Women ने Bangladesh को रौंदा, Asia Cup Final में एंट्री

शेफ़ाली वर्मा की जबरदस्त पारी और दीप्ति शर्मा की शानदार गेंदबाज़ी के दम पर, हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने गुरुवार को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में बांग्लादेश को हराकर एशिया कप 2026 के फ़ाइनल में जगह बना ली। फ़ाइनल मैच रविवार को खेला जाएगा। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए, भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही क्योंकि स्मृति मंधाना सिर्फ़ दो रन पर आउट हो गईं। हालाँकि, वर्मा और प्रतिका रावल ने टीम की पारी को संभाला। 10वें ओवर में रावल (24 गेंदों में 20 रन) के आउट होने के बाद भी वर्मा ने खेलना जारी रखा और बांग्लादेशी गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की।
 

इसे भी पढ़ें: Edgbaston Test में फिर बिखरी Pakistan Team, Debutant Razaullah की रफ्तार ने खींचा ध्यान


'प्लेयर ऑफ़ द मैच' चुनी गईं वर्मा को हरमनप्रीत कौर (28 गेंदों में 24 रन), ऋचा घोष (16 गेंदों में 21 रन) और दीप्ति शर्मा (छह गेंदों में 13 रन) का भी अच्छा साथ मिला, जिससे भारतीय टीम ने बांग्लादेश के सामने जीत के लिए 150 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। बांग्लादेशी टीम ने संभलकर शुरुआत की; दिलारा अख्तर (26 गेंद पर 21 रन) और जुएरिया फिरदौस (18 गेंद पर 14 रन) ने पहले पांच ओवर में 26 रन बनाए। हालांकि, भारत लगातार विकेट लेता रहा; शोभना मोस्तरी, निगार सुल्ताना और शोर्ना अख्तर ने क्रमशः 24 गेंद पर 18, 17 गेंद पर 19 और 18 गेंद पर 22 रन बनाए।

वहीं, शर्मिन अख्तर और फहिमा खातून ने क्रमशः दो गेंद पर एक और 14 गेंद पर 14 रन बनाए। भारतीय महिला टीम के लिए दीप्ति शर्मा सबसे सफल गेंदबाज रहीं; उन्होंने चार ओवर में सिर्फ 26 रन देकर तीन विकेट लिए। नंदनी शर्मा ने भी दो ओवर में सिर्फ 10 रन देकर दो विकेट लिए। वहीं, श्री चरानी और प्रेमा रावत ने एक-एक विकेट लिया। बाद में, कौर ने कहा कि वह टीम के प्रदर्शन से खुश हैं। उन्होंने कहा कि दोनों टीमों के स्पिनरों ने बहुत अच्छी गेंदबाजी की, जिससे बल्लेबाजों के लिए रन बनाना मुश्किल हो गया।
 

इसे भी पढ़ें: Rohit Sharma का 2027 World Cup खेलने पर सस्पेंस बरकरार, क्या होगा भविष्य?


भारतीय महिला टीम की कप्तान ने कहा कि आज बैटिंग के दौरान हमारी सभी साझेदारियां बहुत अहम रहीं, और ऋचा घोष की बैटिंग भी। उन्होंने कुछ बहुत अच्छे शॉट्स खेले। और गेंदबाज़ी में दीप्ति शानदार रहीं। जब भी हमें ज़रूरत पड़ी, उन्होंने आकर हमें अहम विकेट दिलाए। भारतीय महिला क्रिकेट टीम अब रविवार को दुबई में एशिया कप 2026 का फ़ाइनल खेलेगी। वहीं, दूसरा सेमीफ़ाइनल शुक्रवार को दुबई में श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा।
 
For more updates and in-depth coverage on cricket, visit Cricket News in Hindi at Prabhasakshi. 

Continue reading on the app

Shri Krishna Janmashtami 2026: रोहिणी नक्षत्र में होगा कान्हा का जन्म, जानें Shubh Muhurat और पूरी पूजा विधि

सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवाँ अवतार माना जाता है। उनका जीवन प्रेम, धर्म, नीति, करुणा, कर्म और भक्ति का अद्भुत संदेश देता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत और विश्व के अनेक देशों में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई जाती है। हालांकि मथुरा, वृंदावन, द्वारका और देश के विभिन्न श्रीकृष्ण मंदिरों में इस पर्व की छटा अत्यंत मनोहर रूप लिये हुए होती है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार करते हैं, झांकियां सजाते हैं और मध्यरात्रि में उनके जन्मोत्सव का आयोजन करते हैं।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 की तिथि


वर्ष 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, विशेष रूप से रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा का विशेष आयोजन रात्रि में किया जाता है। तिथि और पूजा के समय में स्थान तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है, अतः श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पूजा मुहूर्त की पुष्टि करनी चाहिए।

इसे भी पढ़ें: Krishna Janmashtami 2026: ऐश्वर्य एवं वैराग्य का अद्भुत संगम है श्रीकृष्ण

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व


श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक भी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार जब मथुरा के अत्याचारी राजा कंस के अत्याचार बढ़ गए और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु के अवतार की आवश्यकता हुई, तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया।

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन अनेक प्रेरणाओं से भरा हुआ है। बाल्यकाल में उन्होंने पूतना, तृणावर्त और कालिय नाग जैसे दुष्टों का अंत किया तथा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। आगे चलकर उन्होंने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया, जिसमें निष्काम कर्म, भक्ति और ज्ञान का संदेश दिया गया। जन्माष्टमी का पर्व भक्तों को यह प्रेरणा देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां हों, सत्य, धर्म और कर्तव्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजन विधि


जन्माष्टमी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल को स्वच्छ करके भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की प्रतिमा स्थापित करें। यदि प्रतिमा पहले से स्थापित है तो उसे स्नान कराकर नए वस्त्र और आभूषणों से सजाया जा सकता है। पूजा के लिए सामान्यतः निम्न सामग्री का उपयोग किया जाता है—

लड्डू गोपाल अथवा भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा
पंचामृत
गंगाजल या स्वच्छ जल
चंदन और रोली
अक्षत
पुष्प और माला
तुलसी दल
माखन और मिश्री
फल और मिठाई
धूप और दीप
नए वस्त्र और श्रृंगार सामग्री

संध्या अथवा रात्रि में पूजा स्थल को सुंदर ढंग से सजाएं और भगवान श्रीकृष्ण की झांकी तैयार करें। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। लड्डू गोपाल को पंचामृत और जल से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें स्वच्छ वस्त्र पहनाकर चंदन, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। माखन-मिश्री, फल और अन्य सात्त्विक भोग लगाएं। धूप-दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। पूजा के दौरान श्रद्धालु “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप कर सकते हैं। श्रीकृष्ण के नामों का स्मरण, भजन-कीर्तन और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ भी इस दिन विशेष रूप से किया जाता है।

जन्माष्टमी व्रत का महत्व


जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत रखते हैं। कई लोग दिनभर फलाहार करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद अथवा अगले दिन व्रत का पारण करते हैं। व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। क्रोध, असत्य और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर भगवान का स्मरण, भजन और सेवा करना इस पर्व का प्रमुख भाव है। परंपराओं के अनुसार व्रत की विधि और पारण का समय अलग-अलग हो सकता है, इसलिए अपने परिवार की धार्मिक परंपरा या स्थानीय पंचांग का पालन करना उचित है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की व्रत कथा


पौराणिक कथा के अनुसार मथुरा के राजा उग्रसेन के पुत्र कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह वसुदेव के साथ किया। विवाह के समय आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवाँ पुत्र कंस के वध का कारण बनेगा। यह सुनकर कंस भयभीत और क्रोधित हो गया। उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। देवकी की संतानों के जन्म लेते ही कंस उन्हें मार देता था। समय बीतता गया और देवकी के आठवें पुत्र के जन्म का समय आया। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में देवकी की कोख से अवतार लिया। कहा जाता है कि भगवान के जन्म के समय कारागार के पहरेदार गहरी निद्रा में चले गए और कारागार के द्वार स्वयं खुल गए। वसुदेव भगवान श्रीकृष्ण को एक टोकरी में लेकर यमुना नदी पार कर गोकुल पहुंचे। गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के घर उसी समय एक कन्या ने जन्म लिया था। वसुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास छोड़कर उस कन्या को लेकर वापस कारागार लौट आए।

जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म की सूचना मिली, तो वह उसे मारने के लिए पहुंचा। लेकिन जैसे ही उसने उस कन्या को पकड़कर भूमि पर पटकने का प्रयास किया, वह दिव्य रूप धारण कर आकाश में प्रकट हो गई। देवी ने कंस से कहा कि उसका वध करने वाला जन्म ले चुका है और वह सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया है। यह सुनकर कंस और अधिक भयभीत हो गया। आगे चलकर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल में अनेक दुष्ट शक्तियों का अंत किया और अंततः मथुरा पहुंचकर अत्याचारी कंस का वध किया। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना और अधर्म का विनाश किया।

इस प्रकार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आस्था, भक्ति और आनंद का महान पर्व है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, करुणा, साहस, कर्तव्य और धर्म का संदेश देता है। उनकी शिक्षाएं आज भी मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करती हैं। वर्ष 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु व्रत, पूजा, भजन-कीर्तन और श्रीकृष्ण जन्म की कथा का श्रवण कर भगवान से सुख, शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि की कामना कर सकते हैं। जय श्रीकृष्ण!

- शुभा दुबे

Continue reading on the app

  Sports

लगातार दूसरी टी20 सीरीज जीतकर गदगद कप्तान श्रेयस अय्यर, बोले- जो चाहा वो मिला

shreyas iyer statement: श्रेयर अय्यर बतौर कप्तान भारत को लगातार दूसरी टी20 सीरीज जिताकर काफी खुश हैं. उनकी कप्तानी की शुरुआत अच्छी नहीं रही, जब आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टीम इंडिया को शमर्नाक हार का सामना करना पड़ा, लेकिन जिम्बाब्वे और अफगानिस्तान के खिलाफ लगातार सीरीज जीत ने अय्यर के कॉन्फिडेंस को बूस्ट किया है. Wed, 16 Sep 2026 00:09:51 +0530

  Videos
See all

Russia Ukraine War Live : खुफिया ट्रेन पर रूसी हमला, मरते-मरते बचे पूर्व प्रधानमंत्री? Putin | Trump #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-15T23:46:11+00:00

सांप पकड़ना पड़ा भारी, रेस्क्यू के दौरान मनीष पाटिल को डसा! | #Viral #Shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-15T23:40:38+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers