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Global हिट बनी Maruti Fronx! 90 देशों में डिमांड, 2 लाख Export का Record

मारुति सुज़ुकी ने घोषणा की है कि फ्रॉन्क्स (Fronx) ने 38 महीने से भी कम समय में 2 लाख एक्सपोर्ट का आंकड़ा पार कर लिया है। यह 'मेड-इन-इंडिया' SUV के लिए एक नया रिकॉर्ड है। मारुति ने जून 2023 में फ्रॉन्क्स का एक्सपोर्ट शुरू किया था। पहले 1 लाख वाहन 25 महीने से भी कम समय में एक्सपोर्ट किए गए और अगले 1 लाख यूनिट लगभग 13 महीनों में एक्सपोर्ट किए गए। फ्रॉन्क्स का निर्माण गुजरात में मारुति सुज़ुकी की हंसलपुर फैसिलिटी में किया जाता है। इसे लगभग 90 देशों में एक्सपोर्ट किया जाता है, जिसमें ब्रांड का घरेलू बाज़ार जापान भी शामिल है।
 

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मारुति सुज़ुकी के MD और CEO, हिसाशी ताकेउची ने कहा कि फ्रॉन्क्स, मारुति सुज़ुकी की एक्सपोर्ट सफलता में एक अहम योगदानकर्ता रही है। FY 24-25 से यह भारत की नंबर 1 एक्सपोर्ट होने वाली पैसेंजर गाड़ी रही है और अब इसे लगभग 90 देशों में भेजा जाता है। रिकॉर्ड समय में 1 लाख एक्सपोर्ट का आंकड़ा पार करने के बाद, फ्रॉन्क्स ने बहुत तेज़ी से 2 लाख का आंकड़ा छुआ, जो इंटरनेशनल मार्केट में इसकी बढ़ती मांग को दिखाता है। 

मारुति सुजुकी पिछले 5 सालों से लगातार पैसेंजर गाड़ियों की सबसे बड़ी निर्यातक रही है। यह कंपनी लगभग 120 देशों में 17 मॉडल एक्सपोर्ट करती है। FY2026-27 की पहली तिमाही में Fronx, Jimny 5-door, e Vitara, Dzire और Baleno सबसे ज़्यादा एक्सपोर्ट किए जाने वाले मॉडल थे। इसी तिमाही में, भारत से होने वाले PV एक्सपोर्ट में कंपनी की हिस्सेदारी 55% से ज़्यादा थी। फ्रोंक्स के पांच वेरिएंट- सिग्मा, डेल्टा, डेल्टा +, जीटा और अल्फा में पेश किया गया था। एक है 1.0 लीटर 3 सिलेंडर टर्बो पैट्रोल बूस्टर जेट इंजन जबकि दूसरा है 

1.2 लीटर 4 सिलेंडर। 1.0 टर्बो पैट्रोल 3 सिलेंडर वाला 100 एचपी की पावर और 147.6 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है। दूसरे वैरिंट की बात करें तो यह 90 एचपी की पावर और 113 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट कर सकता है। इसे मैनुअल और ऑटोमेटिक गियर बॉक्स विकल्प के साथ मार्केट में लाया गया है। फ्रोंक्स की बाहरी विशेषताओं में एलईडी डीआरएल के साथ एलईडी मल्टी-रिफ्लेक्टर हेडलैंप, स्वचालित हेडलैंप, एलईडी रियर कॉम्बिनेशन लैंप, शार्क फिन एंटीना और 16 इंच के अलॉय व्हील हैं।
 

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नए फ्रोंक्स के केबिन के अंदर, 9-इंच एचडी स्मार्ट प्ले प्रो + इंफोटेनमेंट सिस्टम, वायरलेस ऐप्पल कारप्ले और एंड्रॉइड ऑटो कनेक्टिविटी, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन के साथ हेड-अप डिस्प्ले, 360-डिग्री व्यू कैमरा और वायरलेस चार्जर जैसी विशेषताएं हैं। एसयूवी में छह एयरबैग हैं। अन्य सुरक्षा सुविधाओं में तीन-बिंदु ELR सीटबेल्ट, हिल-होल्ड असिस्ट और रोलओवर मिटिगेशन के साथ ESP, EBD और ब्रेक असिस्ट के साथ ABS और Isofix चाइल्ड सीट माउंट शामिल हैं। कार के पिछले हिस्से में एक तराशी हुई सीधी प्रोफाइल है जिसमें व्यापक स्वीपिंग कनेक्टेड एलईडी रियर है। अंदर, एसयूवी में केबिन में ब्लैक और बोर्डो कॉन्ट्रास्टिंग कलर स्कीम और डैशबोर्ड पर मेटल जैसी मैट फिनिश है।

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मानसून में कार चलाने वालों के लिए अलर्ट! ये छोटी-छोटी गलतियां बन सकती हैं बड़े हादसे की वजह

मानसून अपने साथ ठंडी हवाएं और भीषण गर्मी से राहत लेकर आता है, लेकिन यही मौसम वाहन चालकों के लिए कई नई चुनौतियां भी खड़ी कर देता है। बारिश के दौरान फिसलन भरी सड़कें, जलभराव, कम दृश्यता और अचानक ब्रेकडाउन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में अगर आपकी कार पहले से तैयार नहीं है, तो छोटी-सी लापरवाही बड़ी परेशानी में बदल सकती है।

खास बात यह है कि मानसून के लिए कार तैयार करने के लिए महंगे रिपेयर या सर्विस पैकेज की जरूरत नहीं होती। केवल कुछ जरूरी निरीक्षण और नियमित रखरखाव आपकी कार को सुरक्षित, भरोसेमंद और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करने योग्य बनाए रख सकते हैं।

बारिश में सबसे पहले टायरों की जांच करें

बरसात के मौसम में सड़क पर कार की पकड़ पूरी तरह टायरों पर निर्भर करती है। यदि टायर का ट्रेड घिस चुका है, तो पानी बाहर निकालने की क्षमता कम हो जाती है और हाइड्रोप्लानिंग यानी वाहन के फिसलने का खतरा बढ़ जाता है।

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टायरों की ट्रेड डेप्थ की जांच करें और जरूरत पड़ने पर उन्हें बदल दें। साथ ही सभी टायरों और स्टेपनी का एयर प्रेशर कंपनी के निर्धारित स्तर के अनुसार रखें। सही प्रेशर से ब्रेकिंग और वाहन की स्थिरता बेहतर बनी रहती है।

साफ दृश्य के लिए वाइपर और विंडशील्ड रखें दुरुस्त

तेज बारिश में साफ दिखाई देना सुरक्षित ड्राइविंग की पहली शर्त है। यदि वाइपर कांच पर धब्बे छोड़ रहे हैं, आवाज कर रहे हैं या पानी ठीक से साफ नहीं कर रहे हैं, तो उन्हें तुरंत बदल देना चाहिए।

इसके साथ ही विंडशील्ड वॉशर फ्लूइड भी भरकर रखें, ताकि सड़क की मिट्टी, कीचड़ और धूल आसानी से हटाई जा सके।

सभी लाइटों का सही तरीके से काम करना जरूरी

मानसून में कम दृश्यता के कारण कार की लाइटें आपकी सुरक्षा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हेडलाइट, टेल लाइट, ब्रेक लाइट, इंडिकेटर, रिवर्स लाइट और फॉग लाइट की जांच जरूर करें।

यदि कोई बल्ब खराब हो या हेडलाइट का कवर धुंधला हो गया हो, तो उसे समय रहते बदलवा या साफ करवा लें।

ब्रेक और बैटरी की अनदेखी न करें

गीली सड़क पर ब्रेकिंग सिस्टम पूरी तरह सही होना चाहिए। यदि ब्रेक लगाते समय आवाज आए, कंपन महसूस हो या गाड़ी देर से रुके, तो तुरंत सर्विस सेंटर पर जांच करवाएं। पानी भरे रास्ते से निकलने के बाद हल्के ब्रेक लगाने से ब्रेक डिस्क पर मौजूद नमी हटाने में मदद मिलती है।
 
इसके अलावा बैटरी के टर्मिनलों पर जंग, ढीले कनेक्शन या कमजोर बैटरी मानसून में अचानक स्टार्टिंग की समस्या पैदा कर सकती है। पुरानी बैटरी की समय रहते जांच करवा लेना बेहतर विकल्प है।

जरूरी फ्लूइड्स और एयर कंडीशनर पर भी दें ध्यान

इंजन ऑयल, कूलेंट, ब्रेक फ्लूइड, पावर स्टीयरिंग फ्लूइड और विंडशील्ड वॉशर फ्लूइड का स्तर सही होना चाहिए। इनकी कमी वाहन की कार्यक्षमता और सुरक्षा दोनों को प्रभावित कर सकती है।

एयर कंडीशनर केवल ठंडक ही नहीं देता, बल्कि बारिश के दौरान शीशों पर जमने वाली धुंध को भी जल्दी हटाता है। यदि एसी की कूलिंग कम हो गई है या डिफॉगर सही काम नहीं कर रहा, तो उसकी सर्विस जरूर कराएं।

रबर सील और इमरजेंसी किट रखें तैयार

दरवाजों और खिड़कियों की रबर बीडिंग खराब होने पर बारिश का पानी केबिन में प्रवेश कर सकता है, जिससे बदबू, नमी और इलेक्ट्रिकल खराबी की आशंका बढ़ जाती है। यदि रबर में दरार या गैप दिखाई दे, तो उसे बदलवा दें।

साथ ही कार में टॉर्च, जम्पर केबल, टायर इनफ्लेटर, पंचर रिपेयर किट, टो रोप, फर्स्ट-एड किट, रिफ्लेक्टिव वार्निंग ट्रायंगल, मोबाइल चार्जर, छाता और वाटरप्रूफ दस्ताने जैसे जरूरी सामान हमेशा रखें।

सुरक्षित ड्राइविंग ही सबसे बड़ा बचाव

मानसून में केवल अच्छी कार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही ड्राइविंग आदतें भी उतनी ही जरूरी हैं। तेज बारिश के दौरान गति नियंत्रित रखें, आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें और अचानक ब्रेक या तेज मोड़ लेने से बचें।
 
यदि किसी सड़क पर जलभराव हो और उसकी गहराई का अनुमान न हो, तो वहां से वाहन निकालने का जोखिम न लें। गहरे पानी से इंजन, ट्रांसमिशन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। नियमित सर्विसिंग और समय पर छोटे-छोटे मेंटेनेंस कार्य करवाने से मानसून में ब्रेकडाउन और दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।

- डॉ. अनिमेष शर्मा

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