BRICS Summit घोषणापत्र भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, विशेषज्ञों ने सराहा
(कुणाल दत्त) नयी दिल्ली, 14 सितंबर सामरिक मामलों के कई विशेषज्ञों ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साझा घोषणापत्र को सोमवार को भारत के लिए एक कूटनीतिक सफलता बताया जबकि कुछ जानकारों ने ब्रिक्स के रुख को आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के भारत के आह्वान का समर्थन करार दिया। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की ब्रिक्स नेताओं द्वारा कड़े शब्दों में निंदा किए जाने से नयी दिल्ली घोषणापत्र भारत के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया। पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान के बीच गहरे मतभेदों को दूर करने के बाद समूह ने 12 सितंबर को सर्वसम्मति से साझा घोषणापत्र जारी किया, जिसमें ईरान पर अमेरिकी हमलों के लिए अमेरिका का सीधा उल्लेख नहीं किया गया।
घोषणापत्र के मसौदे पर बातचीत अंतिम समय तक चली क्योंकि शुरुआत में ईरान और यूएई दोनों ने कड़ा रुख अपनाया था। साल 2003 से 2006 तक बांग्लादेश में भारत की उच्चायुक्त रहीं वीणा सीकरी ने इस घोषणापत्र को भारत के लिए एक जबरदस्त कूटनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा, अब कोई अगर-मगर नहीं है।
दुनिया के शीर्ष मंच पर आज भारत का प्रभाव है। यह बड़ी सफलता मुख्य रूप से (भारतीय) प्रधानमंत्री की (ईरानी) राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और अबू धाबी के युवराज (शेख खालिद बिन मोहम्मद) के साथ हुईं द्विपक्षीय बैठकों का परिणाम है। निश्चित रूप से शेरपा, राजदूत सुधाकर दलेला और मंत्री के नेतृत्व वाली पूरी टीम ने मेहनत की और 24 घंटे काम किया।
वे एक मसौदे पर सहमति बनाने के लिए तड़के 3-4 बजे तक सभी से बात कर रहे थे। सीकरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि को देखते हुए दिल्ली में अबू धाबी के युवराज और ईरानी राष्ट्रपति के बीच द्विपक्षीय बैठक भी महत्वपूर्ण थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पहले दिन के विचार-विमर्श के बाद घोषणापत्र को स्वीकार करने की घोषणा की थी।
सीकरी ने कहा कि नयी दिल्ली घोषणापत्र का संदर्भ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने हमेशा यह माना और कहा है कि ब्रिक्स एक गैर-पश्चिमी समूह है, लेकिन यह पश्चिम-विरोधी समूह नहीं है , और यह बात बहुत स्पष्ट रूप से सामने आई है। पूर्व विदेश सचिव निरुपमा मेनन राव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने एक विखंडित होती दुनिया में भारत की हैसियत की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश की।” उन्होंने लिखा, “भारत गैर पश्चिमी देशों के इस समूह को स्पष्ट रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानता है। लेकिन इसे (ब्रिक्स) स्पष्ट रूप से पश्चिम-विरोधी बनने देने में भारत को बहुत फायदा नहीं दिखता।
भारत का उद्देश्य बिना किसी टकराव के चीजें बेहतर बनाना है। भारत चाहता है कि पश्चिमी देशों के बाज़ारों, उनकी पूंजी और प्रौद्योगिकी से दूरी बनाए बगैर एक अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था बने, ग्लोबल साउथ को अधिक अधिकार मिलें और आर्थिक दबाव से सुरक्षा मिले।” राव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह कहकर इस अंतर को स्पष्ट कर दिया कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं है।” उन्होंने कहा कि भारत ने इस शिखर सम्मेलन को अमेरिका विरोधी बयानबाजी का मंच बनाने के प्रयासों का विरोध किया। उन्होंने कहा, किसी साझा ब्रिक्स मुद्रा का समर्थन या डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की कोई नाटकीय घोषणा नहीं हुई।
ध्यान राष्ट्रीय मुद्रा में भुगतान, विभिन्न देशों के बीच तेजी से भुगतान, सुविधाजनक आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्वास्थ्य, भोजन व ऊर्जा सुरक्षा, और संयुक्त राष्ट्र, आईएमएफ व विश्व बैंक के सुधार पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा, पश्चिम एशिया को लेकर ईरान और यूएई के बीच भारी मतभेदों के बावजूद भारत ने सर्वसम्मति से नयी दिल्ली घोषणापत्र जारी करने में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता हासिल की। सावधानीपूर्वक तैयार किए गए घोषणापत्र के माध्यम से आम सहमति बनाए रखी गई।
ब्रिक्स नेताओं ने घोषणापत्र में पश्चिम एशिया संघर्ष के संदर्भ में अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कार्यों से बचने का आह्वान किया है, जिनसे स्थिति और बिगड़ने की आशंका हो। भारत ने हमेशा कहा है कि किसी भी संघर्ष को सुलझाने का रास्ता संवाद और कूटनीति ही है। यूनेस्को में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा ने इस साझा घोषणापत्र को दुनिया भर में भारत के मजबूत नेतृत्व के प्रति समर्थन करार दिया।
उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन से पहले 30 भारतीय शहरों में 400 से अधिक बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। शर्मा ने पेरिस से फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए कहा, ब्रिक्स भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया समूह है, जिसका उद्देश्य है कि दुनिया बहुध्रवीय बने, जिसमें मजबूत साझेदारिया हों। इसलिए मुझे लगता है कि यह (घोषणापत्र) दुनिया भर में भारत के नेतृत्व के प्रति एक बड़ी स्वीकार्यता है।” उन्होंने आतंकवाद पर ब्रिक्स के रुख और पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा किए जाने की भी सराहना की।
ब्रिक्स देशों ने घोषणापत्र में आतंकवाद के किसी भी रूप को कतई बर्दाश्त नहीं करने और इस खतरे से निपटने में दोहरे मानदंडों को खत्म करने के भारत के आह्वान का पूरी तरह से समर्थन किया। समूह के शीर्ष नेता इस चुनौती से निपटने के लिए एक ठोस दृष्टिकोण रखने पर सहमत हुए।
हमारी सरकार ने जनवरी से लेकर अब तक 10 गैंगस्टरों को विदेशों से पंजाब वापस लाने में सफलता हासिल की: CM मान
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को कहा कि एक ओर उनकी सरकार गैंगस्टरों और नशों की बुराई के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ रही है, दूसरी ओर विपक्षी दल पंजाब के लिए कोई दृष्टिकोण पेश करने के बजाय मीडिया की सुर्खियां बटोरने के लिए हर दुखद घटना का सहारा लेकर 'गिद्धों वाली राजनीति' कर रहा है. उन्होंने बताया कि जनवरी से अब तक 10 गैंगस्टरों को विदेशों से पंजाब वापस लाया गया है और सरकार की सख्ती के बाद पाकिस्तान से आने वाले लगभग 80 प्रतिशत नशों का खात्मा कर दिया गया है.
भाजपा पर सीधा निशाना साधा
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार अब गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान से हो रही नशों की सप्लाई पर शिकंजा कसेगी. उन्होंने यह भी कहा कि "गैंगस्टरों को पालने वाली" कांग्रेस और अकाली दल को कानून-व्यवस्था पर बोलने का कोई हक नहीं है .
जानबूझकर की गई कोशिश
मुख्यमंत्री ने कहा, "नशे, गैंगस्टरों और संगठित अपराध के खिलाफ पंजाब सरकार की सख्त कार्रवाई की सराहना करने के बजाय विपक्षी दल सियासी फायदे के लिए जानबूझकर डर का माहौल पैदा करने और पंजाब को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है. पंजाब सिर्फ एक सीमावर्ती राज्य नहीं है बल्कि देश का प्रवेश द्वार (गेटवे) और भारत का गहना है. कुछ इक्का-दुक्का घटनाओं के नजरिए से पूरे राज्य को चित्रित करने की कोई भी कोशिश पंजाब और इसके लोगों को बदनाम करने की जानबूझकर की गई कोशिश है."
लगातार पीछा किया जा रहा
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सरकार ने नशों, गैंगस्टरों और संगठित अपराध के गठजोड़ को तोड़ने के लिए एक व्यापक रूपरेखा को अमल में लाई. मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी लड़ाई सिर्फ गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है. हम नेटवर्क की पहचान कर रहे हैं, खेपों की सप्लाई रोक रहे हैं, वित्तीय साधन बंद कर रहे हैं और दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. पंजाब पुलिस दिन-रात काम कर रही है और हमने अपराधियों को सूबे का एजेंडा तय करने की इजाजत नहीं दी. नशों और गैंगस्टर गतिविधियों में शामिल लोगों का बिना किसी सियासी सांझ या प्रभाव के लगातार पीछा किया जा रहा है."
असफल कोशिशें की जा रही
मुख्यमंत्री ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से तस्करी को रोकना मुख्य तौर पर केंद्र की जिम्मेदारी है, फिर भी पंजाब सरकार ने नशों को रोकने के लिए अपने फंडों से एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए हैं. गुजरात में लाखों टन नशे जब्त किए जा रहे हैं पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती, जबकि पंजाब ने नशों के खिलाफ देश की सबसे बड़ी मुहिम शुरू की है."
हजारों के खिलाफ लगातार कार्रवाई
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "हमने नशों, गैंगस्टरों और संगठित अपराध के खिलाफ व्यापक रोडमैप अपनाया है. यह सिर्फ व्यक्तियों को गिरफ्तार करने के बारे में नहीं है. हम नेटवर्क तबाह कर रहे हैं, उनकी सप्लाई चेन को तोड़ रहे हैं, उनके वित्तीय साधनों पर हमला कर रहे हैं और इन अपराधिक सिंडिकेट चलाने वालों का पीछा कर रहे हैं."
गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, " सरकार ने गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है, जिसमें बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां और संगठित अपराध और अपराधिक नेटवर्कों से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ देश निकाले की कार्रवाई शामिल है. मौजूदा सरकार को भाषण देने के बजाय विपक्षी दल बताएं कि उनके अपने कार्यकाल के दौरान गैंगस्टर कल्चर और नशा नेटवर्क को बढ़ने-फूलने की इजाजत क्यों दी गई?"
पुलिस ने बड़ी बरामदगी की
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि लोग हल चाहते हैं, विवाद नहीं. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "सूबा सरकार नशों और संगठित अपराध के खिलाफ अपने रोडमैप पर बिना किसी समझौते के काम करना जारी रखेगी. पंजाब नशों के खिलाफ लड़ाई में मोहरी होकर उभरा है, पंजाब पुलिस ने बड़ी बरामदगी की है और सप्लाई नेटवर्क को तबाह किया है."उन्होंने कहा कि सरकार पंजाब को ऐसी समस्या के लिए बलि का बकरा नहीं बनने देगी जिसके नेटवर्क सूबे से बहुत दूर तक फैले हुए हैं.
सियासी पार्टियों को यात्राओं, बयानों और बिरतांत गढ़कर लोगों को गुमराह करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पंजाबियों को हमेशा के लिए गुमराह नहीं कर सकते. मुख्यमंत्री ने कहा, "आप पंजाबियों को हमेशा के लिए गुमराह नहीं कर सकते. सूबे के समझदार लोग जानते हैं कि नशों और गैंगस्टरों के खिलाफ कौन लड़ा और किसने अपराधियों को सियासी पनाह दी. इसी तरह लोग यह भी अच्छी तरह जानते हैं कि कौन सूबे की भलाई के लिए काम कर रहा है और कौन सिर्फ कैमरे की तलाश में है."
कुर्बानी और सेवा की जरूरत पड़ी
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने ऐतिहासिक तौर पर देश के लिए बड़ा योगदान दिया है और जब भी देश को साहस, कुर्बानी और सेवा की जरूरत पड़ी है, पंजाब हमेशा अग्रणी रहा है. उन्होंने कहा, "पंजाब योद्धाओं, किसानों, खिलाड़ियों, उद्यमियों और मेहनती लोगों की धरती है. सियासी फायदे के लिए किसी को भी पंजाब को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी."मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार पंजाब को अधिक सुरक्षित, नशा मुक्त और खुशहाल बनाने के लिए वचनबद्ध है और सूबे की अमन-शांति और सुरक्षा को खतरे में डालने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी.
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