Hindi Diwas 2026: CM पुष्कर सिंह धामी बोले- किताबों और कक्षाओं तक सीमित न रहे हिंदी, विज्ञान-तकनीक और डिजिटल दुनिया में भी बढ़े दायरा
देहरादून: हिंदी दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदी को बदलती तकनीक और भविष्य की जरूरतों के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक का दौर है। ऐसे में हिंदी को केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे विज्ञान, तकनीक, शोध और डिजिटल दुनिया की भी मजबूत भाषा बनाना होगा।
कार्यक्रम में साहित्यकारों, लेखकों, भाषाविदों, विद्यार्थियों और हिंदी प्रेमियों को शुभकामनाएं देते हुए सीएम धामी ने हिंदी को राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी ने देश के अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं, बोलियों और संस्कृतियों के बीच संवाद का सेतु बनकर ‘विविधता में एकता’ की भावना को मजबूत किया है।
नई तकनीक सीखें, अपनी भाषा पर गर्व भी रखें
मुख्यमंत्री ने युवाओं से नई तकनीक और दूसरी भाषाएं सीखने के साथ अपनी हिंदी और मातृभाषा पर गर्व बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल हिंदी को दुनिया के हर मंच तक पहुंचाने के लिए किया जाना चाहिए। सीएम धामी ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। हिंदी दिवस अपनी भाषा, राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक गौरव पर गर्व करने का अवसर भी है।
उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार भी होती है। जो समाज अपनी भाषा को सहेजता है, वह अपनी संस्कृति और पहचान को भी सुरक्षित रखता है।
उत्तराखंड की लोकभाषाओं को भी सहेजेगी सरकार
मुख्यमंत्री ने हिंदी के साथ उत्तराखंड की लोकभाषाओं और बोलियों के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, भोटिया, थारू और बंगाणी जैसी लोकभाषाओं और बोलियों को प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर बताया।
उत्तराखंड की साहित्यिक विरासत का जिक्र करते हुए उन्होंने राष्ट्रकवि सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’, कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल और प्रसून जोशी के योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार क्षेत्रीय भाषाओं, साहित्य और साहित्यकारों के संरक्षण एवं सम्मान के लिए काम कर रही है।
साहित्यकारों को 5.51 लाख रुपए तक सम्मान राशि
राज्य सरकार ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ के तहत जीवनभर साहित्य साधना करने वाले साहित्यकारों को 5 लाख रुपए की सम्मान राशि दे रही है। वहीं, ‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्यकारों को 5 लाख 51 हजार रुपए की सम्मान राशि दी जा रही है।
‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के जरिए हिंदी के साथ गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, पंजाबी और उर्दू सहित अलग-अलग भाषाओं के साहित्यकारों को भी सम्मानित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने ‘बुके नहीं, बुक देंगे’ पहल का भी जिक्र किया। इसके जरिए पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ रचनाकारों को पुस्तक प्रकाशन के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। भाषा संस्थान के माध्यम से उत्तराखंड के अप्रकाशित और अलग-अलग जगह बिखरे साहित्य के संग्रह, संरक्षण और प्रकाशन की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
साहित्यिक प्रतियोगिताओं के 126 विजेता विद्यार्थी सम्मानित
हिंदी दिवस समारोह में साहित्यिक और रचनात्मक लेखन प्रतियोगिताओं के 126 विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, भाषा विभाग के सचिव उमेश नारायण पांडे और निदेशक भाषा मायावती ढकरियाल सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए सीएम धामी ने कहा कि उनके नेतृत्व में भारतीय संस्कृति और भाषाओं को वैश्विक मंचों पर नई प्रतिष्ठा मिली है। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों पर गर्व के साथ नई तकनीक को अपनाकर हिंदी का दायरा और व्यापक किया जा सकता है।
BCCI का ACC पर बड़ा इल्जाम! Mohsin Naqvi ने क्यों बदले नियम? क्या है ट्रॉफी विवाद का पूरा सच
Womens Asia Cup 2026: दुबई में खेले गए विमेंस एशिया कप 2026 के फाइनल में भारतीय महिला टीम ने श्रीलंका को 72 रनों से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार खिताब जीता. लेकिन जीत के बाद भारतीय टीम ने मंच पर मौजूद ACC और PCB अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से साफ इनकार कर दिया. हालांकि इसके बाद BCCI की ओर से ACC पर एक इल्जाम लगाया गया. बीसीसीआई की ओर से रहा गया कि ACC में यह पुरानी परंपरा रही है कि अगर कोई देश किसी विशिष्ट प्रतिनिधि से पुरस्कार लेने में असहज है, तो वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है. बीसीसीआई ने फाइनल से पहले ही एसीसी अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया था कि भारतीय टीम नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी. बीसीसीआई ने सुझाव दिया था कि उनकी जगह एसीसी के उपाध्यक्ष खालिद महमूद ट्रॉफी सौंप दें. इसके बावजूद, नकवी खुद मंच पर अड़ गए, जिसे बीसीसीआई ने नियमों और खेल भावना के खिलाफ एक 'ड्रामा' करार दिया.
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