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Rajasthan में BJP और RLP उम्मीदवार को मिला सिर्फ एक वोट, प्रत्याशी खुद को भी नहीं चुन सका; जानें अजब चुनावी खेल

Parbatsar Nikay Chunav Result: लोकतंत्र में जनता का एक-एक मत सरकारें बना और गिरा सकता है, लेकिन जब किसी प्रत्याशी को कुल मिलाकर सिर्फ एक ही मत मिले तो यह बात हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है. राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के परबतसर नगर पालिका चुनाव से ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां दो अलग-अलग वार्डों में चुनाव लड़े दो प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को जनता ने पूरी तरह नकार दिया और दोनों को केवल एक-एक वोट ही नसीब हुआ. सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को मिले इकलौते वोट की हो रही है. आलम यह रहा कि प्रत्याशी खुद को भी मत नहीं दे सका, क्योंकि जिस वार्ड से वह अपनी किस्मत आजमा रहा था, वहां की मतदाता सूची में उसका नाम तक दर्ज नहीं था.

खुद का वोट भी नहीं डाल पाए कैलाश चंद्र

परबतसर नगर पालिका के वार्ड संख्या तेरह में बीजेपी ने कैलाश चंद्र को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा था. चुनाव परिणाम की घोषणा हुई तो हर कोई दंग रह गया. कैलाश चंद्र के बस्ते में केवल एक वोट पड़ा था. इस नतीजे के पीछे का कारण जब सामने आया तो मामला और भी दिलचस्प हो गया. दरअसल कैलाश चंद्र वार्ड संख्या बारह के पंजीकृत मतदाता हैं. उनका पूरा परिवार भी वार्ड संख्या बारह की मतदाता सूची में शामिल है. नियम के मुताबिक वह केवल अपने वार्ड में ही मतदान कर सकते थे. इस वजह से वह वार्ड संख्या तेरह में खुद अपने चुनाव चिन्ह पर मोहर नहीं लगा सके.

कांग्रेस की हिना खानम ने दर्ज की बड़ी जीत

वार्ड संख्या तेरह के पूरे चुनावी आंकड़े पर नजर डालें तो यहां मुकाबला बेहद एकतरफा रहा. इस वार्ड से कांग्रेस की प्रत्याशी हिना खानम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन सौ छिहत्तर वोट हासिल किए और एकतरफा जीत दर्ज की. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंक रहे रसीद खां भी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाने में सफल रहे और उन्होंने एक सौ पचानवे वोट जुटाए. इन दोनों प्रत्याशियों के सामने बीजेपी जैसे बड़े दल का उम्मीदवार बिल्कुल बेअसर साबित हुआ और केवल एक वोट पाकर सिमट गया. इस परिणाम के बाद अब क्षेत्र के लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर वह इकलौता मतदाता कौन था जिसने कैलाश चंद्र पर अपना भरोसा जताया.

क्या सिर्फ खानापूर्ति के लिए बनाया था प्रत्याशी?

स्थानीय स्तर पर इस बात को लेकर खूब सुगबुगाहट है कि वार्ड संख्या तेरह में बीजेपी संगठन को कोई मजबूत स्थानीय चेहरा चुनाव लड़ने के लिए नहीं मिल रहा था. कांग्रेस को निर्विरोध जीत हासिल करने से रोकने के लिए संगठन ने जल्दबाजी में रणनीति बनाई. पार्टी नेताओं के कहने पर ही कैलाश चंद्र ने वार्ड संख्या बारह के निवासी होते हुए भी वार्ड तेरह से पर्चा भरा था. बिना किसी जमीनी तैयारी और स्थानीय पकड़ के चुनाव मैदान में उतरने का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा. हालांकि इस पूरे घटनाक्रम और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पर संगठन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

RLP के भंवरलाल का भी यही हाल

इस चुनाव में सिर्फ बीजेपी ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी के प्रत्याशी की भी भारी किरकिरी हुई है. परबतसर नगर पालिका के ही वार्ड संख्या बीस से आरएलपी प्रत्याशी भंवरलाल चुनावी रण में उतरे थे. जब ईवीएम खुली और वोटों की गिनती हुई तो भंवरलाल के खाते में भी महज एक ही वोट निकला. नागौर और आसपास के इलाकों में आरएलपी की अच्छी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है और पार्टी कई नगर निकायों में बेहतर प्रदर्शन भी करती रही है. ऐसे मजबूत जनाधार वाले दल के प्रत्याशी का एक वोट पर अटक जाना राजनीतिक जानकारों को भी हैरान कर रहा है.

उम्मीदवार चयन पर उठने लगे गंभीर सवाल

परबतसर नगर पालिका चुनाव के इन दोनों वार्डों के नतीजों ने राजनीतिक दलों के भीतर जमीनी सर्वे और टिकट वितरण प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है. जब कोई राष्ट्रीय या प्रादेशिक दल अपने उम्मीदवार तय करता है तो उम्मीद की जाती है कि प्रत्याशी का उस क्षेत्र में सीधा प्रभाव होगा. लेकिन बिना जनाधार वाले और दूसरे वार्ड के व्यक्ति को प्रत्याशी बना देने से कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिरता है. दोनों ही वार्डों में जनता ने यह साफ संदेश दे दिया है कि केवल पार्टी के सिंबल के दम पर चुनाव नहीं जीता जा सकता. सोशल मीडिया से लेकर चाय की चौपालों तक अब इस एक-एक वोट वाले नतीजे की जमकर चर्चा हो रही है.

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