युगांडा की Vice President Jessica Alupo पहुंचीं Agra, किया Taj Mahal का दीदार
युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो सोमवार को आगरा पहुंचीं और मशहूर ताजमहल का दौरा किया। ताजमहल के दौरे के दौरान, उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो ने हाथ हिलाकर और "नमस्ते" कहकर पर्यटकों का अभिवादन किया। इससे पहले, रविवार को ब्रिक्स समिट के दौरान नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपराष्ट्रपति अलुपो के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और अहम क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। बैठक के दौरान, पीएम मोदी ने एक बदले हुए और समृद्ध युगांडा के लिए युगांडा के 'विज़न 2040' के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया। साथ ही, दोनों पक्षों ने टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, क्षमता निर्माण, ज्ञान साझा करने, निवेश को आसान बनाने और प्राइवेट सेक्टर के सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
इसे भी पढ़ें: बेंगलुरु दक्षिण में जाली नोट छापने का भंडाफोड़, पुलिस ने सात आरोपियों को किया गिरफ्तार
दोनों नेताओं ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत और युगांडा के बीच विकास साझेदारी दोनों देशों के लिए मज़बूती का स्रोत है और उन्होंने इस रिश्ते को मज़बूत बनाने में लोगों के बीच आपसी संबंधों के महत्व को रेखांकित किया। एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो से मिलकर खुशी हुई। मैंने 2018 में युगांडा की अपनी यादगार यात्रा और कंपाला सिद्धांतों को याद किया, जो अफ्रीका के साथ भारत के जुड़ाव का मार्गदर्शन करते हैं। हमने स्वास्थ्य सेवा, कृषि, डिजिटल तकनीकों और क्षमता निर्माण में सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। भारत और युगांडा द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मज़बूत करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।
इसे भी पढ़ें: Devaraaya में श्री कृष्णदेवराय बने Kichcha Sudeepa के दाढ़ी वाले लुक पर छिड़ा विवाद, ऐतिहासिक सटीकता पर उठे सवाल
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, दोनों नेताओं ने 'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ को मज़बूत करने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया। पीएम मोदी ने ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए अलुपो का धन्यवाद किया। MEA ने X पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट के दौरान युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका रोज़ एपेल अलुपो के साथ एक गर्मजोशी भरी और सार्थक द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत और युगांडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। उन्होंने दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, क्षमता निर्माण, ज्ञान साझा करने, निवेश को आसान बनाने और प्राइवेट सेक्टर के सहयोग के ज़रिए अहम प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि लोगों के बीच आपसी संबंध इस साझेदारी को मज़बूती देते हैं।
Kandahar Hijack के बाद Taliban ने Osama Bin Laden को सुरक्षा बढ़ाने के लिए कहा था, CIA का खुलासा
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 14 सितंबर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की ओर से जारी खुफिया दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि 1999 के अंत में इंडियन एयरलाइंस के एक विमान के कंधार में अपहरण के बाद अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने अलकायदा के आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए आगाह किया था। तालिबान की ओर से आगाह किये जाने का उल्लेख जनवरी 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के समक्ष प्रस्तुत किए गए ‘प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ्स (पीडीबी)’ में किया गया था। ये दस्तावेज 11 सितंबर 2001 के हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर जारी किए गए ऐसे 71 दस्तावेजों में शामिल हैं।
तीन जनवरी, 2000 के इस दस्तावेज में कहा गया, ‘‘तालिबान ने... (कुछ अंश हटाए गए हैं) पिछले हफ्ते लादेन को अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए आगाह किया था, ताकि कंधार में बंधक संकट का इस्तेमाल...। इससे पता चलता है कि... बिन लादेन का मुख्य समर्थक बना हुआ है।’’ काठमांडू से नयी दिल्ली जा रहे इंडियन एयरलाइंस के एक विमान का 24 दिसंबर, 1999 को हरकत-उल-मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था और उसे जबरन कंधार ले जाया गया था। उड़ान संख्या आईसी 814 से जुड़ा यह संकट 31 दिसंबर, 1999 को उस समय खत्म हुआ, जब भारत ने तीन आतंकवादियों को रिहा कर उन्हें तालिबान को सौंप दिया।
क्लिंटन के समक्ष 28 अगस्त, 1998 को प्रस्तुत एक अन्य पीडीबी में संकेत दिया गया था कि लादेन मिस्र, अरब प्रायद्वीप—विशेषकर कुवैत, सऊदी अरब और यमन—भारत, पाकिस्तान, युगांडा और संभवतः नाइजीरिया में हमले करने की साजिश रच रहा था। इसमें कहा गया था कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में लादेन के मजबूत नेटवर्क से संकेत मिलता है कि वह इन क्षेत्रों में भी अमेरिका से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है। सबसे शुरुआती दस्तावेज 13 फरवरी, 1998 का था।
इसमें कहा गया था कि बिन लादेन और अन्य इस्लामी चरमपंथियों ने ‘‘... (हटाए गए अंश) से मुलाकात की और खुले बाजार से अज्ञात रासायनिक, जैविक और परमाणु पदार्थ हासिल करने पर सहमति जताई।’’ रिपोर्ट में कहा गया था कि लादेन के पास ‘‘वैध कंपनियां, कारोबारी संबंध और एक वित्तीय साम्राज्य है, जो उसे’’ ऐसे हथियार हासिल करने के प्रयास में मदद कर सकते हैं। सीआईए द्वारा जारी किए गए कुछ पीडीबी तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के लिए 12 अक्टूबर, 2000 को यमन के अदन बंदरगाह में युद्धपोत यूएसएस कोल पर हुए बम हमले की अमेरिका-यमन जांच के शुरुआती नतीजों के आधार पर तैयार किए गए थे। सीआईए की ओर से जारी दस्तावेज़ों में आखिरी दस्तावेज 12 सितंबर, 2001 का है।
यह तारीख वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन से विमानों के टकराने के अगले दिन की है। ‘‘स्थिति रिपोर्ट’’ में हमले से पहले लादेन से जुड़ी नवीनतम खुफिया जानकारी का विवरण दिया गया था, जिसमें उसकी संभावित संलिप्तता से जुड़े ब्योरे भी शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘उपलब्ध साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि अफगानिस्तान और फारस की खाड़ी क्षेत्र के सुन्नी चरमपंथियों को लादेन के निर्देश पर होने वाले हमलों की भनक थी।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi




