Chocolate Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर ट्राई करें चॉकलेट मोदक, कम समय में बन जाएगी ये स्वादिष्ट मिठाई
Chocolate Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर इस बार भोग में कुछ नया और बच्चों को पसंद आने वाला बनाना चाहते हैं, तो चॉकलेट मोदक ट्राई कर सकते हैं। यह पारंपरिक मोदक से थोड़ा अलग है और इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है।
डार्क चॉकलेट के साथ नारियल, काजू, बादाम और पिस्ता का स्वाद इस मिठाई को खास बनाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामान या लंबी तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती। जानें चॉकलेट मोदक बनाने की आसान रेसिपी।
चॉकलेट मोदक बनाने के लिए सामग्री
- डार्क चॉकलेट- 250 ग्राम
- नारियल का बुरादा- 100 ग्राम
- काजू- 2 चम्मच, बारीक कटे हुए
- बादाम- 2 चम्मच, बारीक कटे हुए
- पिस्ता- 2 चम्मच, बारीक कटा हुआ
- कंडेंस्ड मिल्क- 50 ग्राम
- घी- 1 चम्मच
कैसे बनाएं चॉकलेट मोदक?
1. सबसे पहले पिघलाएं चॉकलेट
एक पैन में थोड़ा पानी गर्म करें। अब इसके ऊपर एक कटोरी रखें और उसमें डार्क चॉकलेट डालें। धीमी आंच पर चॉकलेट को धीरे-धीरे पिघलाएं। चॉकलेट को सीधे तेज आंच पर गर्म करने से बचें।
2. ड्राई फ्रूट्स और नारियल भूनें
दूसरे पैन में एक चम्मच घी डालकर गर्म करें। इसमें कटे हुए काजू, बादाम, पिस्ता और नारियल का बुरादा डालें। इन्हें हल्का सुनहरा होने तक धीमी आंच पर भूनें। ध्यान रखें कि नारियल या ड्राई फ्रूट्स ज्यादा न भुनें।
3. कंडेंस्ड मिल्क से तैयार करें मिश्रण
अब भुने हुए मिश्रण में कंडेंस्ड मिल्क डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इसे तब तक चलाएं, जब तक सभी चीजें आपस में अच्छी तरह मिलकर थोड़ा गाढ़ा मिश्रण न बन जाएं।
4. अब मिलाएं पिघली हुई चॉकलेट
तैयार मिश्रण में पिघली हुई डार्क चॉकलेट डालें और अच्छी तरह मिक्स करें। मिश्रण को कुछ देर ठंडा होने दें, ताकि इसे आसानी से मोदक का आकार दिया जा सके।
5. सांचे में भरकर बनाएं मोदक
मोदक के सांचे पर हल्की-सी घी की परत लगा दें। अब तैयार चॉकलेट मिश्रण को सांचे में भरें और हल्के हाथ से दबाएं। सांचे को खोलकर मोदक को सावधानी से बाहर निकाल लें।
6. कुछ देर सेट होने दें
सभी मोदक तैयार करने के बाद इन्हें कुछ देर के लिए सेट होने दें। आप इन्हें ठंडा करके सर्व कर सकते हैं। गणेश चतुर्थी पर भोग के साथ घर आए मेहमानों और बच्चों को भी ये चॉकलेट मोदक खिलाए जा सकते हैं।
चॉकलेट मोदक को खास बनाता है ये कॉम्बिनेशन
चॉकलेट के साथ नारियल और ड्राई फ्रूट्स का स्वाद इस मोदक को पारंपरिक मिठाई से अलग बनाता है। अगर घर में बच्चों को मोदक पसंद नहीं आते, तो चॉकलेट वाला यह ट्विस्ट उन्हें पसंद आ सकता है।
टिप: चॉकलेट को पिघलाते समय सीधे गैस पर रखने के बजाय डबल बॉयलर तरीके का इस्तेमाल करें। इससे चॉकलेट को धीरे-धीरे पिघलाने में मदद मिलती है। वहीं, मोदक को सांचे से आसानी से निकालने के लिए उसमें पहले हल्की-सी घी की परत जरूर लगा लें।
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Brain Health Tips: छोटी-छोटी बातें भूल रहे हैं? दिमाग को एक्टिव रखने के लिए अपनाएं ये 5 आदतें
Brain Health Tips: क्या छोटी-छोटी बातें याद रखने में परेशानी होती है या काम करते समय दिमाग जल्दी थक जाता है? आपकी रोज की लाइफस्टाइल का सीधा असर याददाश्त, फोकस और मानसिक ऊर्जा पर पड़ सकता है।
दिमाग को एक्टिव रखने के लिए किसी मुश्किल रूटीन की जरूरत नहीं है। अच्छी नींद, सही खान-पान, शरीर को एक्टिव रखना और तनाव को कंट्रोल करना जैसी छोटी आदतें लंबे समय में ब्रेन हेल्थ के लिए मददगार हो सकती हैं।
1. पूरी नींद लें, दिमाग को भी दें आराम
रात में देर तक जागना और लगातार नींद पूरी न होना शरीर के साथ दिमाग को भी थका सकता है। सोते समय शरीर को आराम मिलने के साथ दिमाग को भी रिकवर होने का समय मिलता है। इसलिए रोज एक तय समय पर सोने और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें।
2. दिनभर बैठे रहने की आदत बदलें
लगातार कई घंटों तक एक ही जगह बैठे रहना शरीर के लिए ही नहीं, दिमाग के लिए भी अच्छा नहीं माना जाता। दिन में थोड़ी देर पैदल चलना, स्ट्रेचिंग करना या कोई हल्की एक्सरसाइज करना रूटीन का हिस्सा बनाएं।
3. हर वक्त तनाव में न रहें
लगातार तनाव रहने पर दिमाग को आराम नहीं मिल पाता। इसका असर फोकस और मूड पर भी पड़ सकता है। काम के बीच छोटे ब्रेक लें, कुछ देर गहरी सांस लें या ऐसी एक्टिविटी करें जिससे आपको मानसिक सुकून मिले।
4. खाने की प्लेट पर दें ध्यान
बहुत ज्यादा मीठे पेय और प्रोसेस्ड फूड को रोज की डाइट का हिस्सा बनाने से बचें। इसके बजाय फल, सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स और दूसरे पौष्टिक विकल्पों को डाइट में जगह देना बेहतर हो सकता है।
5. लोगों से जुड़े रहना भी है जरूरी
लगातार अकेले रहना और लोगों से दूरी बना लेना मूड और मानसिक सेहत पर असर डाल सकता है। परिवार या दोस्तों के साथ बातचीत करना, साथ समय बिताना और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होना दिमाग को एक्टिव रखने वाली अच्छी आदतों में शामिल किया जा सकता है।
नोट: अगर याददाश्त में लगातार गिरावट, बहुत ज्यादा मानसिक थकान या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने जैसी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
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