एस्सार ग्रुप की ईईटी रिटेल ने ब्रिटेन के अग्रणी फ्यूल रिटेल नेटवर्क एसजीएन रिटेल का किया अधिग्रहण, 2031 तक 800 फ्यूल स्टेशन का लक्ष्य
एस्सार एनर्जी ट्रांजिशन फ्यूल्स (ईईटी फ्यूल्स) की रिटेल इकाई ईईटी रिटेल लिमिटेड (ईईटी रिटेल) ने ब्रिटेन के प्रमुख स्वतंत्र फ्यूल फोरकोर्ट ऑपरेटर एसजीएन रिटेल के 100 प्रतिशत अधिग्रहण के लिए एक समझौते की घोषणा की है। इस अधिग्रहण के साथ ईईटी रिटेल के नेटवर्क में 118 नए फ्यूल स्टेशन जुड़ जाएंगे।
इस सौदे के बाद ईईटी रिटेल के मौजूदा 117 फोरकोर्ट स्थलों और एसजीएन रिटेल के 118 स्थलों को मिलाकर कुल 235 फ्यूल स्टेशन का देशव्यापी नेटवर्क बन जाएगा। संयुक्त नेटवर्क की वार्षिक ईंधन आपूर्ति क्षमता 65 करोड़ लीटर से अधिक होगी। इसके साथ ही कंपनी ब्रिटेन की दूसरी सबसे बड़ी बैकवर्ड-इंटीग्रेटेड फोरकोर्ट ऑपरेटर बन जाएगी।
ईईटी रिटेल और उसकी मूल कंपनी एस्सार एनर्जी ट्रांजिशन का लक्ष्य ब्रिटेन में एक ऐसा एकीकृत मॉडल विकसित करना है, जिसमें ईंधन उत्पादन से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति की पूरी शृंखला एक ही समूह के नियंत्रण में हो।
कंपनी का कहना है कि पिछले दो दशकों में ब्रिटेन का ईंधन बाजार काफी बिखर गया है। कई बड़ी तेल कंपनियों ने घरेलू रिफाइनिंग में निवेश कम कर दिया, जिसके कारण आपूर्ति शृंखला अधिक जटिल और आयात पर निर्भर होती चली गई। ऐसे में एस्सार ग्रुप अब "रिफाइनरी-टू-पंप" मॉडल विकसित कर इस व्यवस्था को सरल और अधिक विश्वसनीय बनाना चाहता है।
कंपनी की स्टैनलो रिफाइनरी पहले से ही ब्रिटेन की कुल सड़क परिवहन ईंधन आवश्यकता का लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन करती है। अब इस रिफाइनरी में तैयार ईंधन सीधे ईईटी रिटेल के फोरकोर्ट नेटवर्क तक पहुंचाया जाएगा।
2031 तक 800 फोरकोर्ट का लक्ष्य
एसजीएन रिटेल के अधिग्रहण से ईईटी रिटेल की दीर्घकालिक विस्तार रणनीति को बड़ी गति मिलेगी। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2031 तक 800 फोरकोर्ट का नेटवर्क विकसित करना है, जो ब्रिटेन के फोरकोर्ट बाजार में लगभग 9 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर होगा।
कंपनी का मानना है कि जनसंख्या वृद्धि, एक से अधिक वाहन रखने वाले परिवारों की बढ़ती संख्या और ब्रिटेन में फ्यूल स्टेशनों की घटती संख्या भविष्य में इस क्षेत्र को आकर्षक निवेश अवसर बनाती है।
उपभोक्ताओं को फायदा और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा
ईईटी रिटेल के अनुसार, स्टैनलो में रिफाइन किए गए ईंधन को सीधे उसके पेट्रोल स्टेशनों तक पहुंचाने से आपूर्ति लागत कम होगी और वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों के दौरान ब्रिटेन की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
कंपनी का दावा है कि उत्पादन और खुदरा बिक्री को एकीकृत करने से वितरण शृंखला की कई अतिरिक्त लागतें समाप्त होंगी, जिसका लाभ अंततः वाहन चालकों को प्रतिस्पर्धी कीमतों के रूप में मिल सकता है।
ईईटी रिटेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरवन रुइया ने कहा कि बड़े पैमाने पर एकीकृत फोरकोर्ट नेटवर्क बनाना कंपनी की ब्रिटेन रणनीति का अहम हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि एसजीएन रिटेल ब्रिटेन के सर्वश्रेष्ठ फोरकोर्ट नेटवर्कों में से एक है और यह अधिग्रहण कंपनी को देशभर में 800 स्थलों वाले नेटवर्क के लक्ष्य तक तेजी से पहुंचने में मदद करेगा।
वहीं, एस्सार एनर्जी ट्रांजिशन में रणनीतिक लेनदेन प्रमुख विरल गाथानी ने कहा कि यह कंपनी की विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाला अवसर है। उन्होंने बताया कि इस सौदे को वित्तपोषित करने के लिए चार महाद्वीपों के प्रमुख बैंकिंग संस्थानों का समर्थन प्राप्त हुआ है।
250 मिलियन पाउंड के ऋण से होगा वित्तपोषण
इस अधिग्रहण का वित्तपोषण नकदी और 250 मिलियन पाउंड की नई वरिष्ठ ऋण सुविधा के माध्यम से किया जाएगा। इस वित्तपोषण व्यवस्था में फर्स्ट अबू धाबी बैंक, मैक्वेरी बैंक, रॉयल बैंक ऑफ कनाडा, एसएमबीसी बैंक इंटरनेशनल, ओकनॉर्थ बैंक सहित कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान शामिल हैं।
ईईटी फ्यूल और ईईटी रिटेल को आरबीसी कैपिटल मार्केट्स ने वित्तीय सलाहकार के रूप में और हर्बर्ट स्मिथ फ्रीहिल्स, क्रेमर और वेटमैन्स ने कानूनी सलाहकार के रूप में सलाह दी।
ऐसे में, यह अधिग्रहण केवल एक रिटेल विस्तार नहीं बल्कि ब्रिटेन के ऊर्जा बाजार में एस्सार की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे कंपनी को उत्पादन, वितरण और खुदरा बिक्री की पूरी मूल्य शृंखला पर अधिक नियंत्रण मिलेगा तथा ऊर्जा सुरक्षा और फ्यूल आपूर्ति के क्षेत्र में उसकी स्थिति और मजबूत होगी।
(DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
3500 किलो मेहंदी और अविवाहित युवाओं की भीड़... जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर की सिंजारा रस्म क्यों है खास?
Moti Dungri Ganesh Temple: देशभर में आज गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जा रहा है. भक्तों ने घर और पंडालों में गणेश जी की स्थापना की है. इस दिन उनका जन्मोत्सव होता है और भव्य पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर ही माता पार्वती ने उबटन से गणेश जी का निर्माण किया था और उन्हें जीवन दिया था. हालांकि, गणेश चतुर्थी का त्योहार महाराष्ट्र में बहुत ज्यादा प्रचलित और गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है. मगर राजस्थान की राजधानी जयपुर में मोती डूंगरी मंदिर में सिंधारा रस्म की विशेष मान्यता है. इस रस्म के लिए मंदिर में बड़ी संख्या में अविवाहित युवा आते हैं और प्रसाद के रूप में मेहंदी लेकर जाते हैं. सिंजारा या सिंधारा जयपुर की एक पुरानी परंपरा है. कहा जाता है कि जिन लोगों की शादी नहीं हो रही है, उन्हें ये मेहंदी लगानी चाहिए. इसलिए, हर साल बड़ी संख्या में अविवाहित युवक-युवती यहां पहुंचते हैं.
मेहंदी की है विशेष आस्था
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले सिंधारा की रस्म होती है. इस रस्म की मेहंदी को लेकर गहरी आस्था है. इस अवसर पर गणपति जी को विशेष पोशाक पहनाई जाती है. उन्हें स्वर्ण मुकुट, नौलखा हार तथा चांदी के सिंहासन से सजाया जाता है. इसके बाद भगवान को चढ़ाए जाने के बाद मेहंदी भक्तों को बांटी जाती है. इस मंदिर में सिर्फ राजस्थान नहीं बल्कि हरियाणा, गुजरात और पंजाब से भी युवक आते हैं. इस परंपरा के लिए गणेश चतुर्थी का उत्सव प्रमुख माना गया है.
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पूरी होती है मनोकामना
धार्मिक मान्यता है कि मेहंदी सिंधारे पर भक्त जो भी मनोकमना लेकर आते हैं, वह पूरी हो जाती है. मेहंदी का संबंध से होता है इसलिए जो लोग विवाह करने की सोच रहे हैं और उनका विवाह काफी समय से नहीं हो रहा है. उन्हें विवाह करना होता है, अगर वे हाथों पर प्रसाद की मेहंदी रचाते हैं तो एक साल के अंदर ही विवाह संपन्न हो जाता है.
इस साल 3500 किलो मेहंदी बांटी गई
मोती डूंगरी मंदिर के पुजारियों ने बताय है कि इस बार मेहंदी सिंधारे की रस्म के लिए 3500 किलो मेहंदी आई है. मंदिर में दर्शनार्थियों का तांता लगेगा और 8 जगहों पर मेहंदी बांटी जाएगी. ऐसे में मंदिर प्रशासन की कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की बांटी जाए और कोई हाथ खाली न जाए. गणेश चतुर्थी के उत्सव का शुभारंभ होते ही इस मंदिर की भी चर्चाएं तेज हो जाती हैं.
क्या है इस मंदिर का इतिहास?
जयपुर के मोती डूंगली मंदिर को प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है. इस गणेश मंदिर का इतिहास सालों पुराना है. मंदिर में स्थापित गणेश जी की प्रतिमा को लेकर मान्यता है कि इसे राजस्थान के मावली क्षेत्र से जयपुर लाया गया. कहते हैं कि एक बैलगाड़ी में प्रतिमा को जयपुर लाया जा रहा था और बैलगाड़ी जहां रुकी, वहीं पर भगवान गणेश की स्थापना करने का निर्णय लिया गया. बाद में मोती डूंगरी की पहाड़ी के नीचे मंदिर निर्माण हुआ. वर्तमान मंदिर का 18वीं शताब्दी में निर्माण हुआ था.
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