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Mumbai's Richest Ganpati Pandal: न लालबागचा राजा, न सिद्धिविनायक, ये हैं पूरे मुंबई का सबसे अमीर गणपति पंडाल
Mumbai's Richest Ganpati Pandal: आज से गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू हो गया है. यह हिंदू धर्म का एक बड़ा त्योहार है लेकिन इस महाराष्ट्र में इसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. मुंबई में गणेशोत्सव का जिक्र होता है तो लालबागचा राजा और सिद्धिविनायक का नाम सबसे पहले आता है. लेकिन एक और गणपति पंडाल है जिनके दरबार में आस्था के साथ-साथ लक्ष्मी भी लोगों को हैरान कर देती है. जी हां, इस गणपति पंडाल को मुंबई का सबसे अमीर पंडाल कहा जाता है. यहां के बप्पा को भी सबसे अमीर बप्पा कहते हैं. इस मशहूर पंडाल में NRI से लेकर कई अमीर घराने चंदा देते हैं. दरअसल, किंग्स सर्कल स्थित जीएसबी सेवा मंडल के गणपति जी को सबसे अमीर कहा जाता है.
66 किलो गोल्ड और 335 किलो चांदी
इस वर्ष GSB सेवा मंडल के बप्पा को 66 किलो सोने और 335 किलो चांदी के आभूषणों से सजाया गया है. जबकि उनकी सुरक्षा के लिए 703.27 करोड़ रुपए का बीमा करवाया गया हैं. इस पंडाल में गणेशोत्सव पांच दिनों तक चलता है. इसमें देश ही नहीं विदेशों से भी बड़ी संख्या में भक्त और सेवादार आते हैं.
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72वां गणेशोत्सव मना रहा GSB मंडल
GSB सेवा मंडल इस वर्ष अपना 72वां गणेशोत्सव मना रहा है. इस पंडाल के गणपति का भव्य अंदाज लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है. बप्पा की प्रतिमा पर 66 किलो सोने तो वहीं चांदी भी कई किलो में सजाई गई है. ये भी एक बड़ी वजह है कि हर साल लाखों भक्त दर्शन करने आते हैं. इस मंडल ने गणपति जी की सुरक्षा के लिए 703.27 करोड़ रुपये का बीमा कवर भी लिया है. इस बीमे में सिर्फ गणेश जी की मूर्ति और आभूषण नहीं बल्कि दर्शन करने के लिए आने वाले भक्तों, स्वयंसेवकों और आयोजन को भी शामिल किया गया है. इसे मुंबई के भव्य गणपति आयोजनों में सबसे बड़े बीमा कवरेज में से एक माना जाता है.
विदेश से आते हैं NRI सेवक
बता दें कि इस पंडाल में गणेश जी सिर्फ पांच दिनों के लिए विराजते हैं. मगर उनकी सेवा करने के लिए देश नहीं बल्कि विदेश से भी भक्त आते हैं. मुंबई के इस पंडाल का पूरा आयोजन स्वयंसेवकों द्वारा ही चलाया जाता है. GSB मंडल के अनुसार, गणेशोत्सव के दौरान इस पंडाल में करीब 1 लाख से ज्यादा विशेष पूजा-अनुष्ठानों के आयोजन होते हैं. यहां तुलादान की परंपरा भी होती है. जिस भक्त की मन्नत पूरी होती है, वह अपने वजन के बराबर दान करता है. इसके साथ ही पांच दिन के पंडाल में 1 लाख से ज्यादा भक्तों को भोजन भी करवाया जाता है. इसलिए, इस पंडाल को सिर्फ भक्त या पूजा तक सीमित नहीं रखा जाता बल्कि सेवा और दान का मुख्य केंद्र भी माना जाता है.
आखिर कैसे बप्पा को 66 किलो सोना मिला?
इस मंडल के गणपति जी के पास 66 किलो सोना है. यह कोई एक दिन की बात या किसी एक भक्त द्वारा न्यौछावर देन नहीं है. GSB सेवा मंडल का यह संग्रह पिछले सात दशकों से धीरे-धीरे पूरा तैयार हुआ है. वर्ष 1950 के दशक में शुरू हुए गणेशोत्सव के दौरान भक्तों ने मन्नत पूरी होने पर सोने के सिक्के, कंगन, चेन, हार जैसे कई अन्य आभूषण बप्पा के चरणों में अर्पित किए थे. समय के साथ-साथ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी गौड़ सरस्वत समुदाय और अन्य लोग इस परंपरा से जुड़ते गए. इसके नतीजा है कि हर साल भक्तों ने बढ़-चढ़कर दान दिया. इस चढ़ावे ने GSB मंडल को सबसे अमीर पंडाल में शामिल कर दिया.
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