80's AI Photo Trend: बॉलीवुड सितारों पर चढ़ा 80s का खुमार! रवि किशन से परिणीति-राघव के Viral रेट्रो लुक ने खींचा ध्यान
80's AI Photo Trend: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नया AI ट्रेंड तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है। चैटजीपीटी (ChatGPT) के 80s ट्रेंड में लोग अपनी तस्वीरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 1980 के दशक के रेट्रो अंदाज में बदल रहे हैं। इंस्टाग्राम पर इस ट्रेंड की तस्वीरें लगातार वायरल हो रही हैं और अब बॉलीवुड के सितारे भी इसमें शामिल हो चुके हैं।
इस ट्रेंड की खास बात यह है कि इसमें किसी पुरानी तस्वीर की जरूरत नहीं पड़ती। लोग अपनी मौजूदा फोटो को AI टूल पर अपलोड करके उसे 80s के फैशन, हेयरस्टाइल, रंगों और सिनेमाई माहौल के साथ दोबारा तैयार करवा रहे हैं।
रवि किशन का दिखा देसी रेट्रो अंदाज
अभिनेता रवि किशन भी इस ट्रेंड का हिस्सा बने और अपनी तस्वीर को 80 के दशक के लुक में बदलवाया। उनके AI अवतार में उस दौर की झलक साफ नजर आती है।
The 80s called.
— Ravi Kishan (@ravikishann) September 10, 2026
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नुसरत भरूचा ने भी आजमाया AI का जादू
अभिनेत्री नुसरत भरूचा भी ChatGPT के इस ट्रेंड से खुद को दूर नहीं रख पाईं। उनकी तस्वीर में 80s के ग्लैमर और फैशन का टच देखने को मिला।
परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की जोड़ी ने जीता ध्यान
इस वायरल ट्रेंड में सबसे ज्यादा दिलचस्प तस्वीरों में से एक परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की जोड़ी की भी रही। दोनों ने अपनी तस्वीर को 80s के दौर की शैली में बदलवाया।
हिना खान की तस्वीरों पर फैंस फिदा
एक्ट्रेस हिना खान ने भी इस वायरल एआई ट्रेंड को फॉलो करते हुए अपनी तस्वीर को 80 के दशक के रेट्रो लुक में बदला है।
अर्जुन बिजलानी भी बने 80s हीरो
टीवी अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने भी AI के इस ट्रेंड को ट्राई किया। उनकी तस्वीर में 80 के दशक के फिल्मी हीरो वाला अंदाज नजर आया।
अमीषा पटेल का भी दिखा विंटेज लुक
अभिनेत्री अमीषा पटेल ने भी अपनी तस्वीर को 80s के अंदाज में बदलकर इस ट्रेंड का हिस्सा बनाया। उनके AI लुक में रेट्रो ग्लैमर की झलक दिखाई दी।
Jumping on the 80’s era trend ????????!! pic.twitter.com/8Oc11Gu6j7
— ameesha patel (@ameesha_patel) September 10, 2026
आखिर क्यों वायरल हो रहा है ChatGPT 80s Trend?
इस ट्रेंड की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह इसका आसान और मजेदार होना है। यूजर्स को सिर्फ अपनी तस्वीर के साथ AI से 80s स्टाइल में उसे बदलने के लिए कहना होता है। इसके बाद आउटफिट, हेयरस्टाइल, बैकग्राउंड, लाइटिंग और कलर टोन में बदलाव के जरिए तस्वीर को रेट्रो रूप दिया जाता है।
बॉलीवुड सितारों के इस ट्रेंड में शामिल होने के बाद इसकी चर्चा और तेज हो गई है। रवि किशन, नुसरत भरूचा, परिणीति चोपड़ा-राघव चड्ढा, अर्जुन बिजलानी और अमीषा पटेल जैसे सितारों के रेट्रो AI लुक सोशल मीडिया पर लोगों के बीच खासा आकर्षण पैदा कर रहे हैं।
Nepal Flood Loss And Damage:नेपाल ने चीन, भारत और अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार; 5 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग
नेपाल में हिमालयी ग्लेशियर फटने और भोटेकोशी-त्रिशूली क्षेत्र में आई तबाही के बाद देश में भारी आक्रोश है। नेपाल सरकार ने अपनी कूटनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए वैश्विक समुदाय के सामने दो टूक रुख अपनाया है।
नेपाल का साफ कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सिर्फ चैरिटी या तात्कालिक राहत सामग्री मांगना अब पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस विनाश के लिए जिम्मेदार बड़े उत्सर्जक देशों को इसका आर्थिक मुआवजा देना होगा।
'दान नहीं, मुआवजा चाहिए': नेपाल की नई कूटनीतिक नीति
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, नेपाल अपनी पुरानी नीति को बदलते हुए अब "मदद और सहायता" के बजाय "जलवायु न्याय और कानूनी मुआवजे" की मांग को प्राथमिकता दे रहा है।
नेपाल का तर्क है कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में उसकी भागीदारी 0.1 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर पिघलने का सबसे गंभीर नुकसान उसे भुगतना पड़ रहा है। नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के 'लॉस एंड डैमेज फंड' से 5 अरब डॉलर के तत्काल क्लाइमेट कंपेंसेशन की मांग की है।
चीन, अमेरिका और भारत को ठहराया ऐतिहासिक रूप से जिम्मेदार
नेपाल ने दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक और कार्बन उत्सर्जक देशों- चीन, अमेरिका और भारत को इस संकट के लिए उत्तरदायी माना है। नेपाल का कहना है कि इन बड़े देशों के अनियंत्रित औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन की वजह से हिमालयी क्षेत्र और ग्लेशियर दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में तीन गुना तेजी से पिघल रहे हैं।
इसके साथ ही, 26 अगस्त को तिब्बत की ओर ग्लेशियर टूटने की समय रहते सूचना नेपाल को न देने पर स्थानीय स्तर पर चीन के प्रति गंभीर नाराजगी भी देखने को मिली है।
2 अरब से अधिक आबादी के अस्तित्व पर संकट की चेतावनी
नेपाल सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों ने अपनी नीतियां नहीं बदलीं और मुआवजा नहीं दिया, तो पूरा हिमालयी इकोसिस्टम ढह जाएगा। इससे नेपाल ही नहीं, बल्कि गंगा, ब्रह्मपुत्र और त्रिशूली जैसी नदियों पर निर्भर पूरे दक्षिण एशिया की करीब 2 अरब से अधिक आबादी का जल और खाद्य सुरक्षा ढांचा हमेशा के लिए तबाह हो जाएगा।
भारत का पक्ष: राहत सहायता के साथ विकसित देशों पर सवाल
दूसरी ओर, भारत ने नेपाल के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए आपदा के तुरंत बाद एनडीआरएफ की टीमें, राहत सामग्री और फॉरेंसिक सहायता भेजी है।
वहीं जलवायु नीति पर भारत का स्टैंड रहा है कि ऐतिहासिक रूप से कार्बन बजट को खत्म करने की मुख्य जिम्मेदारी पश्चिमी और विकसित राष्ट्रों की है। भारत प्रति व्यक्ति कम उत्सर्जन का हवाला देकर विकासशील और पड़ोसी देशों के अधिकारों की पैरवी करता रहा है।
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