UP Election 2027: रायबरेली में विधानसभा सीटों का गणित, क्या कांग्रेस का पलड़ा है भारी?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में रायबरेली को लंबे वक्त से कांग्रेस का मजबूत किला माना जाता रहा है. नेहरू-गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ी इस सीट ने 2024 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस के पक्ष में बड़ा संदेश दिया, जब राहुल गांधी ने यहां से करीब 3.90 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. मगर विधानसभा चुनाव की बात करें तो तस्वीर कांग्रेस के लिए उतनी आसान नहीं है. जिले की छह विधानसभा सीटों में फिलहाल कांग्रेस का एक भी विधायक मौजूद नहीं है.
रायबरेली जिले में कितनी विधानसभा सीटें?
रायबरेली जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं-बछरावां (एससी), हरचंदपुर, रायबरेली, सलोन (एससी), सरेनी और ऊंचाहार. इनमें से पांच सीटें रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में आती हैं, जबकि सलोन विधानसभा अमेठी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. जिला प्रशासन की मौजूदा सूची भी इन छह विधानसभा क्षेत्रों की पुष्टि करती है.
2022 में क्या था विधानसभा परिणाम?
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए रायबरेली का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था. जिले की छह सीटों में से चार पर समाजवादी पार्टी और दो पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. सपा ने बछरावां, हरचंदपुर, सरेनी और ऊंचाहार सीट जीती, जबकि भाजपा के खाते में रायबरेली सदर और सलोन गईं. कांग्रेस किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी.
2022 के आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस का पारंपरिक प्रभाव विधानसभा स्तर पर काफी कमजोर हो चुका था. रायबरेली सदर जैसी पारंपरिक कांग्रेस सीट भी बीजेपी के खाते में चली गई थी. यहां अदिति सिंह ने सपा के राम प्रताप यादव को करीब 7,175 वोटों से हराया था.
फिर 2024 में बदली तस्वीर
लोकसभा चुनाव 2024 ने रायबरेली की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव जरूर दिखाया. राहुल गांधी ने रायबरेली लोकसभा सीट से भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह को करीब 3.90 लाख वोटों के अंतर मात दी. खास बात यह रही कि रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सभी पांच विधानसभा सीटों में कांग्रेस को बढ़त मिली. विधानसभा-वार आंकड़े कांग्रेस के लिए खासतौर पर रायबरेली सदर में मजबूत संदेश देते हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली विधानसभा खंड में राहुल गांधी को करीब 1.56 लाख वोट मिले, वहीं भाजपा को करीब 53.5 हजार वोट मिले. यानी कांग्रेस की बढ़त करीब एक लाख से ज्यादा रही.
कांग्रेस के सामने क्या है चुनौती?
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि लोकसभा की जीत को विधानसभा सीटों में बदलना आसान नहीं होगा. 2022 में कांग्रेस का संगठन और वोट आधार विधानसभा स्तर पर काफी कमजोर नजर आया था. इसके अलावा सपा का यहां पर मजबूत जमीनी आधार रहा है. 2022 में चार सीटें सपा के खाते में जाना इसका प्रमाण है.
ऊंचाहार का समीकरण भी काफी अहम है. यहां से 2022 में सपा के मनोज कुमार पांडेय ने जीत दर्ज की थी. मगर बाद में उन्होंने भाजपा का समर्थन किया. इसके कारण विधानसभा स्तर पर सपा का प्रभाव एक सीट पर कमजोर हो गया.
क्या कांग्रेस का पलड़ा भारी है?
लोकसभा के लिहाज से कांग्रेस निश्चित तौर पर मजबूत स्थिति में है. मगर विधानसभा के लिहाज से अभी उसे भारी कहना जल्दबाजी होगा. 2024 में राहुल गांधी की में राहुल गांधी की बड़ी जीत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह जरूर पैदा किया है और पार्टी को अपना पुराना जनाधार वापस पाने का मौका दिया है. मगर 2022 के विधानसभा नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस को संगठन, स्थानीय नेतृत्व और बूथ स्तर पर काफी मेहनत करनी होगी.
अगर कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन और वोट ट्रांसफर को प्रभावी ढंग से कायम रख पाती है, तो रायबरेली की कई सीटों पर मुकाबला उसके पक्ष हो सकता है. वहीं भाजपा के लिए चुनौती होगी कि वह 2022 में जीती रायबरेली और सलोन जैसी सीटों को बचाए. इस तरह से लोकसभा में कांग्रेस की बढ़त को विधानसभा के चुनाव में रोका जा सकता है.
कांग्रेस के लिए बेहतर माहौल
लबोलबाब है कि कुल मिलाकर रायबरेली में कांग्रेस का राजनीतिक माहौल जरूर बेहतर हुआ है. लेकिन विधानसभा का मौजूदा गणित अभी कांग्रेस के पक्ष में नहीं है. 2027 के चुनाव में असली मुकाबला इस बात पर होगा कि राहुल गांधी की लोकसभा वाली लोकप्रियता कितनी प्रभावी तरीके से विधानसभा सीटों तक पहुंचती है और सपा-कांग्रेस के बीच वोटों का कितना ट्रांसफर होता है.
जिला सहकारी बैंक के नए दिग्गजों से मिले सीएम धामी, बोले- ग्रामीण आर्थिकी की असली ताकत है सहकारिता
Uttarakhand News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में जिला सहकारी बैंक के चुनाव में विजयी हुए नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की. इस दौरान नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अपनी जीत से अवगत कराया और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया.
सीएम धामी ने दी बधाई
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिला सहकारी बैंक के चुनाव में विजय प्राप्त करने वाले सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि चुनाव में मिली जीत जनता एवं प्रतिनिधियों के विश्वास का प्रतीक है और इसके साथ नई जिम्मेदारी भी जुड़ी है. उन्होंने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से अपेक्षा की कि वे पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए सहकारिता क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य करेंगे.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है सहकारिता
मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है. सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं. राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है.
अंतिम पंक्ति तक पहुंचना सरकार की प्राथमिकता
सीएम धामी ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास और आर्थिक अवसरों का लाभ पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से अपने अनुभव एवं ऊर्जा का उपयोग करते हुए बैंक की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा आमजन के हित में कार्य करने का आह्वान किया.
नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने जताया आभार
नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे उन्हें मिली जिम्मेदारी का पूरी प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करेंगे और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सक्रियता से कार्य करेंगे. इस अवसर पर जिला सहकारी बैंक, उत्तरकाशी की नवनिर्वाचित अध्यक्ष मती शारदा राणा, नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष हरिमोहन सिंह चंद, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सतेंद्र राणा, नवनिर्वाचित निदेशक जगमोहन राणा तथा भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान उपस्थित रहे.
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