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Uttarakhand News: देवप्रयाग के 68 मेधावी छात्रों से मिले सीएम धामी, बोले- दृढ़ संकल्प से ही रचा जाता है इतिहास

Uttarakhand News: उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में छिपी प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें व्यापक अनुभव दिलाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम उठाया गया है. कीर्तिनगर विकासखंड स्थित स्वामी मनमथन प्रेक्षागृह में एक भव्य और उत्साहवर्धक कार्यक्रम आयोजित हुआ. यहां देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के 68 मेधावी छात्र-छात्राओं का दल जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंचा, तो माहौल में एक अलग ही उमंग और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था. यह दल भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण के 10वें संस्करण के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों और बड़े संस्थानों की यात्रा पर रवाना हो रहा है. मुख्यमंत्री ने सभी छात्रों से सीधा संवाद स्थापित किया, उनकी यात्रा की रूपरेखा जानी और पूरे दल को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि किताबी ज्ञान बहुत जरूरी है, लेकिन जब वही ज्ञान खुले आसमान के नीचे व्यावहारिक अनुभवों से जुड़ता है, तो व्यक्तित्व का असली विकास होता है.

देश की विविधता और उपलब्धियों को समझने का अवसर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत दर्शन केवल एक सैर-सपाटा नहीं है, बल्कि यह सीखने का एक बहुत बड़ा मंच है. जब पहाड़ी क्षेत्रों के बच्चे देश के अलग-अलग हिस्सों में जाएंगे, तो वे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली इतिहास, आधुनिक विज्ञान और तकनीक के विकास को अपनी आंखों से प्रत्यक्ष देख सकेंगे. कक्षाओं की चारदीवारी से बाहर निकलकर मिलने वाला यह अनुभव विद्यार्थियों की सोच का दायरा बढ़ा देता है. मुख्यमंत्री ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे भ्रमण के दौरान जहां भी जाएं, वहां की सामाजिक विशेषताओं को समझें और यह जानने की कोशिश करें कि उस क्षेत्र ने किस तरह तरक्की की है. यात्रा पूरी होने के बाद इन अनुभवों को अपने सहपाठियों के साथ साझा करना चाहिए, ताकि ज्ञान का यह प्रकाश समाज के अन्य बच्चों तक भी पहुंचे.

दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास ही बनाते हैं असाधारण

छात्रों को जीवन में सफलता का मूलमंत्र देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में जितने भी लोगों ने इतिहास रचा है, वे कभी सामान्य ही थे. सामान्य से असामान्य बनने का सफर केवल और केवल लगातार मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति से तय होता है. उन्होंने कहा कि युवावस्था में ही जीवन का एक निश्चित उद्देश्य तय कर लेना चाहिए. जब लक्ष्य स्पष्ट हो, संकल्प मजबूत हो और मन में सच्ची लगन हो, तो कोई भी रुकावट व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती. इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से अपने माता-पिता और गुरुजनों के प्रति हमेशा आदर और श्रद्धाभाव बनाए रखने का आग्रह किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार और शिक्षकों का आशीर्वाद ही मनुष्य को कठिन समय में सही राह दिखाता है और उसे जमीन से जोड़े रखता है.

अग्रणी उत्तराखंड और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

मुख्यमंत्री ने देश के समग्र विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज पूरा देश विकसित भारत के निर्माण की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस राष्ट्रीय अभियान में उत्तराखंड भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है. राज्य सरकार विकास के हर क्षेत्र में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम कर रही है. उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए बताया कि नीति आयोग द्वारा तय किए गए सतत विकास लक्ष्यों की सूची में उत्तराखंड ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया है. इसके अलावा उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का ऐसा पहला राज्य बन चुका है, जिसने समान नागरिक संहिता को लागू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है. युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए राज्य में बेहद कड़ा नकल विरोधी कानून बनाया गया है, जिससे अब केवल मेहनती बच्चों को ही उनकी योग्यता के आधार पर नौकरियां मिल रही हैं.

दशक भर से चल रहा शैक्षिक अभियान

इस सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री ने देवप्रयाग के विधायक विनोद कंडारी के प्रयासों की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक या शैक्षिक कार्यक्रम को बिना रुके लगातार 10 सालों तक चलाना बहुत बड़ी साधना है. यह पहल दूर-दराज के गांवों में पढ़ने वाले बच्चों के भीतर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना जगा रही है. वहीं विधायक विनोद कंडारी ने इस अवसर को क्षेत्र के लिए गौरवशाली बताते हुए कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के साधारण परिवारों के बच्चों का प्रदेश के मुख्यमंत्री से सीधे मिलना और उनसे मार्गदर्शन पाना जीवन का सबसे बड़ा सपना सच होने जैसा है. उन्होंने बताया कि एक दशक पहले जब यह यात्रा शुरू की गई थी, तब बहुत सारी दिक्कतें सामने आई थीं, लेकिन आज इसके परिणाम देखकर दिल को असीम संतोष मिलता है. अब क्षेत्र के बच्चे पढ़ाई में कड़ी मेहनत कर रहे हैं और बोर्ड परीक्षाओं में 96 प्रतिशत तक अंक हासिल कर रहे हैं.

प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य लोग रहे मौजूद

प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही कई प्रमुख शिक्षाविद और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम में जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे और मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने भी बच्चों का हौसला बढ़ाया. साथ ही हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय रावत, उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह, कीर्तिनगर की ब्लॉक प्रमुख अंचला खण्डेलवाल, देवप्रयाग के ब्लॉक प्रमुख विनोद बिष्ट और नगर पंचायत अध्यक्ष राकेश मोहन मैठाणी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे. सभी अतिथियों ने एक स्वर में मेधावी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उनके दल को हरी झंडी दिखाकर यात्रा के लिए विदा किया.

यह भी पढ़ें: मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन में गूंजा विकसित उत्तराखंड का संकल्प, विद्यार्थियों ने साझा किए अपने सपने और सुझाव

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BRICS में परोसे गए वेज डिनर मेन्यू पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, कहा- मांसाहारी खाना भी स्वादिष्ट होता है; BJP ने कही ये बात

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान राजकीय रात्रिभोज के मेन्यू को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है. भारत मंडपम में आयोजित इस डिनर में मेहमानों को पूरी तरह शाकाहारी भारतीय व्यंजन परोसे गए. इसके बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर तंज कसा. वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए शाकाहारी भोजन की विविधता और भारतीय परंपरा का बचाव किया. 

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि रिकॉर्ड के लिए भारत के 80 प्रतिशत लोग मांसाहारी हैं और भारतीय मांसाहारी खाना स्वादिष्ट होता है. उन्होंने इसके साथ छोले-भटूरे की तस्वीर भी शेयर की. उनका यह बयान BRICS समिट के दौरान आयोजित उस डिनर के बाद आया, जिसमें केवल शाकाहारी भोजन परोसा गया था.

राहुल गांधी की टिप्पणी को BRICS डिनर के मेन्यू पर सरकार की अप्रत्यक्ष आलोचना के तौर पर देखा जा रहा है. इस मुद्दे ने भोजन, भारतीय संस्कृति और देश की विविध खान-पान की आदतों को लेकर राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है.

किरेन रिजिजू ने दिया जवाब

राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया. रिजिजू ने शाकाहारी भारतीय भोजन की विविधता और पोषण को सामने रखा. उन्होंने कहा कि भारत की शाकाहारी खाद्य परंपरा बेहद समृद्ध है और अलग-अलग राज्यों के व्यंजनों के जरिए देश की सांस्कृतिक विविधता को दुनिया के सामने रखा जा सकता है. बीजेपी की ओर से भी कांग्रेस की आलोचना को अनावश्यक राजनीति बताया गया. 

डिनर में क्या-क्या परोसा गया?

BRICS के राजकीय डिनर में भारतीय शाकाहारी व्यंजनों को प्रमुखता दी गई. मेहमानों के लिए खांडवी मिले, खुंब गलौटी, पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, बाजरा पुलाव और चुकंदर रायता जैसे व्यंजन शामिल किए गए थे. मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी और शहतूत फिरनी परोसी गई. मेन्यू के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के भारतीय स्वाद और पारंपरिक खाद्य संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने पेश करने की कोशिश की गई. 

खाने के मेन्यू पर क्यों छिड़ी बहस?

दरअसल, BRICS सम्मेलन भारत के लिए केवल कूटनीतिक आयोजन नहीं था, बल्कि दुनिया के सामने भारतीय संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करने का भी एक बड़ा अवसर था. ऐसे में डिनर के मेन्यू को लेकर भी काफी ध्यान गया. एक तरफ सरकार और बीजेपी का तर्क है कि शाकाहारी भारतीय व्यंजनों के जरिए देश की पारंपरिक और क्षेत्रीय खान-पान की विविधता को दिखाया गया. दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि भारत में अलग-अलग तरह की खान-पान की परंपराएं हैं और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए मेन्यू में इस विविधता को भी जगह मिलनी चाहिए. हालांकि, इस विवाद का केंद्र अब सिर्फ खाना नहीं रह गया है. यह मामला राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन गया है.

BRICS समिट में भारत की मेजबानी

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए. सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, तकनीक और वैश्विक शासन व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS को ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने वाला मंच बताया. इस बीच, डिनर के मेन्यू को लेकर शुरू हुआ विवाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. राहुल गांधी के बयान और किरेन रिजिजू के जवाब के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच इस मुद्दे पर जुबानी जंग तेज होती दिखाई दे रही है.

 

 

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