Japan Earthquake | पश्चिमी जापान में शक्तिशाली भूकंप, सुनामी का कोई खतरा नहीं: अधिकारी
पश्चिमी जापान में मंगलवार को शक्तिशाली भूकंप आया लेकिन इससे सुनामी का कोई खतरा नहीं है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भूकंप की तीव्रता 6.2 थी और यह उत्तर-पश्चिमी जापान के शिमाने प्रांत में आया। प्रांतीय राजधानी मात्सुए और तोत्तोरी प्रांत के कुछ शहर समेत आसपास के शहरों में सबसे अधिक झटके महसूस किए गए।
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एजेंसी ने बताया कि भूकंप का केंद्र लगभग 10 किलोमीटर (6.2 मील) की गहराई में था। उसने साथ ही कहा कि सुनामी का कोई खतरा नहीं है। भूकंप से जान-माल के किसी प्रकार के नुकसान की फिलहाल कोई सूचना नहीं मिली है।
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परमाणु विनियमन प्राधिकरण ने कहा कि क्षेत्र में शिमाने परमाणु बिजली संयंत्र और एक संबंधित केंद्र में कोई असामान्यता नहीं पाई गई। जापान, प्रशांत के ‘रिंग ऑफ फायर’ कहलाने वाले क्षेत्र पर स्थित है जो भूकंप के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है।
Iran Protests Escalate | ईरान में विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत, 1,200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया
ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज़ हुए: ईरानी सुरक्षा बलों, जिसमें IRGC भी शामिल है, ने मालेकशही (इलाम प्रांत) में प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसक झड़प की, जिसमें रेजा अज़ीमज़ादेह और मेहदी इमामीपुर सहित कम से कम 3-4 नागरिकों की मौत हो गई, और 30 से ज़्यादा लोग गोली लगने से घायल हो गए। और इन मौतों के बाद अब तक इस प्रदर्शन 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हूं। ये प्रदर्शन, जो अब एक हफ़्ते से ज़्यादा पुराने हो गए हैं, कम होने के कोई संकेत नहीं दिखा रहे हैं। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि गिरफ्तारियां बढ़ रही हैं और दोनों तरफ से हिंसा भी बढ़ी है।
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ईरान में विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत
ईरान में खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है और इन प्रदर्शनों के थमने के कोई आसार भी नजर नहीं आ रहे। एक मानवाधिकार एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अमेरिका की ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ ने बताया कि एक सप्ताह से अधिक समय से जारी इन प्रदर्शनों के दौरान 1,200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।
ईरान के 31 में से 27 प्रांतों के 250 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हो रहे हैं
एजेंसी ने बताया कि मारे गए लोगों में 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और ईरान के सुरक्षाबलों के दो सदस्य हैं। इसके अनुसार, ईरान के 31 में से 27 प्रांतों के 250 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। यह समूह ईरान के भीतर मौजूद कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के जरिए आंकड़े जुटाता है और पिछली बार अशांति के दौरान इसकी जानकारी सही साबित हुई थी।
अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ ने सोमवार देर रात बताया कि प्रदर्शनों के दौरान लगभग 250 पुलिसकर्मी और ‘बसीज’ बल के 45 सदस्य घायल हुए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने के साथ यह आशंका भी जताई जा रही है कि अमेरिका इसमें हस्तक्षेप कर सकता है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर तेहरान शांतिपूर्वक विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करता है तो अमेरिका ‘‘उन्हें बचाने के लिए आगे आएगा।’’ हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप हस्तक्षेप करेंगे या नहीं और यदि करेंगे तो किस तरह करेंगे, लेकिन उनके बयानों को लेकर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरानी अधिकारियों ने पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी।
ईरान से बाहर भी विरोध प्रदर्शन क्यों मायने रखते हैं
बढ़ती मौतों ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ़्ते तेहरान को प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा बल प्रयोग न करने की चेतावनी दी थी। उनकी टिप्पणियों पर ईरानी अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी सेनाओं के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की धमकी दी। हालांकि यह अभी भी साफ नहीं है कि वाशिंगटन कार्रवाई करने की योजना बना रहा है या नहीं, लेकिन सप्ताहांत में अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पकड़ने के बाद इन टिप्पणियों का महत्व और बढ़ गया। तेहरान काराकास को अपना करीबी सहयोगी मानता है।
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ये विरोध प्रदर्शन 2022 में पुलिस हिरासत में महसा अमिनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों के बाद सबसे महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, कार्यकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा आंदोलन अभी तक उतनी तीव्रता या पैमाने तक नहीं पहुंचा है।
आर्थिक दबाव एक मुख्य कारण लगता है। नए प्रतिबंधों और इज़राइल के साथ छोटे संघर्ष के प्रभाव के बाद दिसंबर में ईरान की मुद्रा गिर गई, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। विरोध प्रदर्शनों के असली आकार का आकलन करना अभी भी मुश्किल है। सरकारी मीडिया में कवरेज सीमित है। पत्रकारों की यात्रा पर कड़े नियंत्रण हैं, और उन्हें गिरफ्तारी का खतरा है। ऑनलाइन वीडियो में ज़मीनी घटनाओं की केवल संक्षिप्त, बिना पुष्टि वाली झलक मिलती है।
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