6 महीने में सिर्फ एक बार टॉयलेट ब्रेक! चीन के स्कूल का अजब-गजब फरमान, 3 बार गए तो गार्जियन तलब
इस तुगलकी फरमान का खुलासा तब हुआ जब स्कूल के ही एक टीचर ने स्टाफ मीटिंग में दिखाए गए पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) की तस्वीर इंटरनेट पर लीक कर दी। पीपीटी के इस स्लाइड में क्लासरूम मैनेजमेंट के जो कड़े नियम लिखे थे, वे हैरान करने वाले हैं।
घर अपना, कमाई की चिंता नहीं; रिवर्स मॉर्गेज से ऐसे मिलेगी हर महीने रकम
रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी परेशानी कई बार कमाई नहीं, बल्कि हर महीने आने वाले पैसे की कमी होती है। घर करोड़ों का हो सकता, लेकिन पेंशन सीमित। ऐसे में घर बेचकर पैसे जुटाना आसान रास्ता लगता है, लेकिन उससे रहने का ठिकाना छिन सकता। यहीं रिवर्स मॉर्गेज काम आ सकता।
इसमें वरिष्ठ नागरिक अपना घर बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के पास गिरवी रखते। बदले में उन्हें नियमित पैसा मिलता है। खास बात यह है कि घर में रहना जारी रहता है और सामान्य लोन की तरह हर महीने ईएमआई नहीं चुकानी पड़ती।
कौन ले सकता रिवर्स मॉर्गेज है?
रिवर्स मॉर्गेज के लिए आवेदक भारतीय नागरिक और 60 साल से अधिक उम्र का होना चाहिए। पति-पत्नी संयुक्त रूप से भी आवेदन कर सकते हैं। ऐसे मामलों में कम से कम एक की उम्र 60 साल से ज्यादा और दूसरे की आम तौर पर 55 साल से कम नहीं होनी चाहिए।
घर भारत में होना चाहिए। उसका मालिकाना हक साफ होना चाहिए और उस पर कोई बकाया या कानूनी बोझ नहीं होना चाहिए। यह वही घर होना चाहिए, जिसमें आवेदक खुद रहता हो।
रिवर्स मॉर्गेज में पैसा कैसे मिलता है?
बैंक घर की कीमत, आवेदक की उम्र और उस समय की ब्याज दरों को देखकर लोन की रकम तय करता है। पैसा हर महीने, तीन महीने, छह महीने या साल में मिल सकता है। कुछ मामलों में एकमुश्त रकम या जरूरत के समय इस्तेमाल होने वाली क्रेडिट सुविधा भी मिल सकती है।
इस पैसे का इस्तेमाल पेंशन बढ़ाने, इलाज, घर की मरम्मत, रखरखाव और दूसरी जरूरी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। हालांकि इसे सट्टेबाजी, कारोबार या ट्रेडिंग जैसे कामों में लगाने की अनुमति नहीं है।
यह सबसे जरूरी बात है। रिवर्स मॉर्गेज में भुगतान की अधिकतम अवधि 20 साल है। यानी यह जरूरी नहीं कि पैसा पूरी जिंदगी आता रहे। 20 साल की अवधि खत्म होने पर भुगतान रुक सकता है, लेकिन शर्तें पूरी होने तक घर में रहना संभव है। इसलिए लोन लेने से पहले बैंक से साफ पूछना जरूरी है कि कितने साल तक भुगतान मिलेगा और उसके बाद क्या होगा।
रिवर्स मॉर्गेज से होनी वाली कमाई पर आयकर में छूट
रिवर्स मॉर्गेज से मिलने वाली रकम सामान्य आमदनी नहीं मानी जाती। एनएचबी के मुताबिक, इसके तहत मिलने वाले भुगतान पर आयकर अधिनियम की धारा 10(43) के तहत आयकर छूट है।
रिवर्स मॉर्गेज लेने का मतलब यह नहीं कि बच्चों का घर चला गया। आम तौर पर आखिरी जीवित उधारकर्ता की मृत्यु, घर बेचने या स्थायी रूप से वहां से चले जाने पर लोन चुकाना होता है।
वारिस चाहें तो बकाया रकम और जमा ब्याज चुकाकर घर को अपने पास रख सकते हैं। अगर घर बेचकर लोन चुकाया जाता है तो बकाया रकम निकालने के बाद बचा पैसा वारिसों को मिलता है।
घर की कीमत घटे तो क्या?
यह पैसा मुफ्त नहीं है। समय के साथ लोन पर ब्याज जुड़ता रहता है। इससे बकाया रकम बढ़ती है और घर में बची आपकी हिस्सेदारी कम हो सकती है। बैंक संपत्ति का दोबारा मूल्यांकन भी कर सकता है, आम तौर पर कम से कम पांच साल में एक बार।
हालांकि इसमें ‘नो निगेटिव इक्विटी’ की सुरक्षा होती है। यानी तय शर्तें पूरी करने पर घर की बिक्री से जितनी रकम मिल सकती है, उससे ज्यादा की देनदारी उधारकर्ता या उसके वारिसों पर नहीं आती।
इसलिए रिवर्स मॉर्गेज उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनके पास घर तो है, लेकिन रिटायरमेंट में नियमित नकदी की कमी है। लेकिन अगर पेंशन और निवेश से पर्याप्त आमदनी है या बच्चों के लिए घर की पूरी कीमत बचाना प्राथमिकता है, तो यह विकल्प सोच-समझकर ही चुनना चाहिए।
(प्रियंका कुमारी)
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