High Uric Acid: बढ़े हुए यूरिक एसिड से हैं परेशान? डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें, मिलेगा फायदा
High Uric Acid: यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या आजकल काफी आम हो गई है। शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होने पर यह क्रिस्टल के रूप में जोड़ों में जमा हो सकता है, जिससे दर्द, सूजन और गाउट की समस्या हो सकती है। ऐसे में दवाओं के साथ खान-पान पर ध्यान देना भी जरूरी माना जाता है।
अगर आपका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो डाइट में कुछ ऐसी चीजों को शामिल किया जा सकता है, जो संतुलित खान-पान का हिस्सा बनकर मदद कर सकती हैं। हालांकि, केवल डाइट के भरोसे यूरिक एसिड को कंट्रोल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह और जरूरत पड़ने पर दवा भी जरूरी है।
चेरी को डाइट में करें शामिल
चेरी में एंथोसाइनिन जैसे पौधों के प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। कुछ अध्ययनों में चेरी या टार्ट चेरी के सेवन और गाउट अटैक के कम जोखिम के बीच संबंध देखा गया है।
हालांकि, चेरी को यूरिक एसिड की दवा नहीं माना जा सकता। इसे संतुलित मात्रा में फल के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है।
लो-फैट दूध और दही
कम वसा वाला दूध और दही प्रोटीन और कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। डेयरी उत्पादों को लेकर हुए अध्ययनों में लो-फैट डेयरी का सेवन गाउट के कम जोखिम से जुड़ा पाया गया है।
इसलिए डाइट में बिना ज्यादा चीनी वाला लो-फैट दही या दूध शामिल किया जा सकता है।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
यूरिक एसिड को मैनेज करने में पर्याप्त पानी पीना भी महत्वपूर्ण है। पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है और किडनी के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है।
हालांकि, पानी की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। किडनी, हृदय या अन्य बीमारी होने पर तरल पदार्थ की मात्रा डॉक्टर की सलाह से तय करें।
विटामिन-C वाले फल
संतरा, मौसंबी, अमरूद जैसे फल विटामिन-C प्रदान करते हैं। कुछ शोधों में विटामिन-C सेवन और यूरिक एसिड के स्तर के बीच संबंध देखा गया है।
लेकिन फलों का सेवन पूरे फल के रूप में करना बेहतर है। मीठे पैकेज्ड जूस या ज्यादा चीनी वाले फलों के पेय से बचना चाहिए।
साबुत अनाज और फाइबर वाली चीजें
ओट्स, ब्राउन राइस, जौ और अन्य साबुत अनाज संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। इनमें फाइबर पाया जाता है और ये लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं।
यूरिक एसिड बढ़ने पर डाइट में सिर्फ एक चीज जोड़ने के बजाय संपूर्ण खान-पान को संतुलित करना ज्यादा जरूरी है।
इन चीजों से बनाएं दूरी
यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो सिर्फ क्या खाना है, यह जानना काफी नहीं है। रेड मीट, ऑर्गन मीट और कुछ सी-फूड में प्यूरीन अधिक होता है, इसलिए इनका सेवन सीमित करना पड़ सकता है।
इसके अलावा शराब और ज्यादा फ्रुक्टोज वाली मीठी ड्रिंक्स भी गाउट के जोखिम से जुड़ी हैं। इसलिए मीठे पेय, शुगर वाली ड्रिंक्स और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी रखना बेहतर है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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खास बात यह है कि इन देसी खाद को तैयार करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत या किसी खास सामान की जरूरत नहीं पड़ती। किचन से निकलने वाले कुछ जैविक अवशेषों का सही तरीके से इस्तेमाल करके पौधों के लिए उपयोगी खाद तैयार की जा सकती है। हालांकि, खाद का इस्तेमाल पौधे की जरूरत और मिट्टी की स्थिति देखकर सीमित मात्रा में करना जरूरी है।
सब्जियों और फलों के छिलकों से बनाएं खाद
घर में निकलने वाले सब्जियों और फलों के छिलकों को सीधे फेंकने के बजाय कंपोस्ट बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटकर सूखी पत्तियों, मिट्टी और थोड़े जैविक कचरे के साथ एक डिब्बे या गमले में डालें।
इसे ढककर कुछ समय तक सड़ने दें और बीच-बीच में सामग्री को पलटते रहें। धीरे-धीरे यह सामग्री टूटकर कंपोस्ट में बदल जाएगी। तैयार कंपोस्ट को पौधे की मिट्टी में थोड़ी मात्रा में मिलाया जा सकता है।
सूखी पत्तियों से तैयार करें प्राकृतिक खाद
बगीचे में गिरने वाली सूखी पत्तियां भी बेकार नहीं हैं। इन्हें मिट्टी में मिलाकर या कंपोस्ट के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। सूखी पत्तियां धीरे-धीरे विघटित होकर मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद करती हैं।
इन्हें छोटे टुकड़ों में करके गमले की मिट्टी में मिलाना बेहतर रहता है। इससे मिट्टी की संरचना और नमी बनाए रखने की क्षमता में भी मदद मिल सकती है।
वर्मी कंपोस्ट है पौधों के लिए अच्छा विकल्प
अगर आपके पास थोड़ी ज्यादा जगह है तो वर्मी कंपोस्ट भी तैयार किया जा सकता है। इसमें केंचुओं की मदद से जैविक कचरे को कंपोस्ट में बदला जाता है। इससे तैयार खाद पोषक तत्वों से भरपूर होती है और पौधों की मिट्टी के लिए उपयोगी हो सकती है।
हालांकि, वर्मी कंपोस्ट बनाते समय नमी, तापमान और जैविक सामग्री का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
खाद डालते समय रखें इन बातों का ध्यान
प्राकृतिक खाद होने का मतलब यह नहीं है कि इसे बहुत ज्यादा मात्रा में डाल दिया जाए। जरूरत से ज्यादा खाद पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए शुरुआत हमेशा कम मात्रा से करें।
ताजी रसोई की सामग्री सीधे गमले में डालने के बजाय उसे अच्छी तरह कंपोस्ट होने देना बेहतर है। साथ ही, फफूंद लगी, बदबूदार या ठीक से सड़ी हुई सामग्री को पौधे की मिट्टी में न डालें।
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लेखक: (कीर्ति)
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