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क्या AI इंसानों की जान ले सकता है? Anthropic CEO Dario Amodei ने दी बड़ी चेतावनी

एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोडेई ने एक बार फिर कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की जरूरत है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे एआई ज्यादा ताकतवर हो रहा है, वैसे-वैसे उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करने का समय भी मिलना चाहिए।

सही रास्ता चुना तो खतरा बहुत कम होगा

डारियो अमोडेई ने कहा कि अगर एआई को लेकर सही फैसले लिए जाते हैं तो कुछ गलत होने की संभावना बहुत कम हो सकती है। लेकिन अगर गलत रास्ता चुना गया तो खतरा काफी बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसलिए सिर्फ इस बात पर चर्चा नहीं होनी चाहिए कि एआई से कितना खतरा है, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि कंपनियां और सरकारें आगे क्या फैसले लेती हैं।

क्या एआई इंसानों की जान ले सकता है?

अमोडेई से जब पूछा गया कि क्या भविष्य में एआई इंसानों की जान ले सकता है, तो उन्होंने कहा कि वह इस चिंता से काफी हद तक सहमत हैं। उन्होंने एंथ्रोपिक के पूर्व कर्मचारी जैकब कॉक्सन की चिंताओं का भी जिक्र किया।

कॉक्सन ने हाल ही में एंथ्रोपिक की नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने खुले तौर पर एआई के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि बड़ी एआई कंपनियां ज्यादा ताकतवर तकनीक बनाने की दौड़ में ऐसे खतरे उठा रही हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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पूर्व कर्मचारी की बात से सहमत हैं अमोडेई

अमोडेई ने कहा कि वह जैकब कॉक्सन की बातों से असहमत होने के बजाय उनसे ज्यादा सहमत हैं। उन्होंने बताया कि कॉक्सन ने एंथ्रोपिक को गैर-जिम्मेदार कंपनी नहीं बताया था। उनका कहना था कि एंथ्रोपिक इन खतरों को लेकर काफी जागरूक है, लेकिन पूरी एआई इंडस्ट्री बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है।

सिर्फ प्रतिशत बताने से बात साफ नहीं होगी

अमोडेई ने कहा कि एआई के खतरे को सिर्फ किसी प्रतिशत के रूप में बताना सही तरीका नहीं है। जैसे अगर कोई कहे कि खतरा 10 प्रतिशत है, तो ऐसा लगता है जैसे सब कुछ किस्मत के भरोसे है। उनके मुताबिक, असल सवाल यह है कि हम कौन सा रास्ता चुनते हैं। अगर सही फैसले लिए गए तो खतरा कम किया जा सकता है। वहीं गलत फैसलों से स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है।

सरकारों और कंपनियों को मिलकर काम करना होगा

अमोडेई ने कहा कि एआई को सुरक्षित बनाने के लिए कंपनियों और सरकारों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने माना कि एआई के विकास को बहुत ज्यादा धीमा करना भी सही नहीं होगा। उनका मानना है कि अगर जिम्मेदार लोग इस तकनीक के विकास से पीछे रह गए, तो गलत लोगों के हाथ में इसकी कमान जाने का खतरा बढ़ सकता है।

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पूर्व कर्मचारी के इस्तीफे के बाद बढ़ी बहस

अमोडेई का यह बयान जैकब कॉक्सन के इस्तीफे के बाद आया है। कॉक्सन एंथ्रोपिक और ओपनएआई दोनों में काम कर चुके हैं। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने बड़ी एआई कंपनियों पर बेहद ताकतवर तकनीक बनाने की दौड़ में ज्यादा जोखिम लेने का आरोप लगाया था।

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Putin की नजर डोभाल पर पड़ी, फिर हुआ कुछ ऐसा...

 जब रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई तो यह तस्वीर दुनिया ने देखी। इस मुलाकात की गर्मजशी पर खूब चर्चा हुई। लेकिन इस हाई प्रोफाइल फ्रेम में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब पीएम मोदी से बात करते-करते पुतिन की नजर पीछे खड़े अजीत डोभाल पर गई। पुतिन और डोभाल दोनों के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान तैर गई। पुतिन ने अपना हाथ ऊपर उठाकर एक खास अंदाज में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का अभिवादन किया।  कूटनीति की दुनिया में कोई राष्ट्र अध्यक्ष जब किसी देश के सुरक्षा सलाहकार को इस तरह व्यक्तिगत तौर पर अहमियत देता है तो यह बहुत बड़ी बात मानी जाती है। लेकिन यहां आपको जानना चाहिए कि पुतिन और डोभाल में एक खास कनेक्शन है या यूं कहें कि खुफिया कनेक्शन है। पुतिन और डोभाल का अतीत एक जैसा रहा है। दोनों स्पाई रहे हैं। इसलिए पुतिन और डोभाल के बीच 2 सेकंड के इस अभिवादन को सोशल मीडिया ने स्पाई टू स्पाई सैल्यूट का नाम दिया। 

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सोशल मीडिया पर इसे इंटेलिजेंस ब्रदरहुड कहा जा रहा है। आप इसे डोभाल और पुतिन का स्पाइस सैल्यूट भी कह सकते हैं। पुतिन और डोभाल के बीच इस अदृश्य बॉन्ड को समझने के लिए आपको दोनों का बैकग्राउंड समझना चाहिए। व्लादमीर पुतिन ने 16 साल तक सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी केजीबी में काम किया। वो लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से रिटायर हुए। दूसरी तरफ अजीत डोभाल ने 33 साल तक भारत की इंटेलिजेंस ब्यूरो में अपनी सेवाएं दी। वो 7 साल तक पाकिस्तान के लाहौर में अंडर कवर एजेंट बनकर रहे। बस दोनों के बीच अंतर इतना है कि व्लादिमर पुतिन एक खुफिया एजेंट से लीडर बन गए हैं। और अजीत डोभाल एक सीक्रेट एजेंट से लीडर के सुरक्षा सलाहकार। पुतिन और डोभाल के बीच इस बॉन्डिंग की वजह दोनों की शख्सियत में तीन समानताओं के जरिए भी समझी जा सकती है। पहली दोनों ही शब्दों से ज्यादा बॉडी लैंग्वेज यानी परछाइयों की भाषा पढ़ने में माहिर है। दूसरी दोनों हार्ड पावर में यकीन रखते हैं। यानी दोनों मानते हैं कि अगर दुश्मन को बातों से नहीं मानता दुश्मन तो ताकत से झुकाया जा सकता है।

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दोनों अपने देश के लिए अत्यधिक राष्ट्रवादी हैं और जीरो एरर नीति पर काम करते हैं। इसलिए जब पुतिन ने डोभाल को देखकर मुस्कुराते हुए हाथ उठाया तो वह किसी राजनयिक को हेलो नहीं कह रहे थे। बल्कि यह एक मास्टर स्पाई द्वारा दूसरे मास्टर स्पाई की रणनीतिक क्षमता का सम्मान था। राष्ट्रपति पुतिन और एनएसए अजीत डोभाल के बीच ये इंटेलिजेंस ब्रदरहुड रातोंरात स्थापित नहीं हुआ है। इतिहास गवाह है कि जब भी दुनिया में कोई बड़ा संकट आया है। अजीत डोभाल ने मॉस्को जाकर सीधे राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की है। आमतौर पर पुतिन किसी दूसरे देश के एनएसए को अकेले में मिलने का समय नहीं देते। लेकिन डोभाल के लिए क्रिमिनल के दरवाजे हमेशा खुले रहे। अगस्त 2025 में जब डोभाल रूस के दौरे पर थे तब राष्ट्रपति पुतिन के साथ कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। सितंबर 2024 में ब्रिक्स सुरक्षा प्रमुखों की मीटिंग में जब डोभाल रूस गए तो सेंट पीटर्सबर्ग में पुतिन ने उनके साथ अकेले में बैठक की। फरवरी 2023 में रूस यूक्रेन जंग के भारी तनाव के बीच अजीत डोभाल मॉस्को पहुंचे थे।

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