बढ़ती बॉन्ड यील्ड युवा इन्वेस्टर्स के लिए क्यों फायदेमंद है?
Bond Yields: सस्ते लोन का दौर अब खत्म हो गया है. 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस से लेकर मिड 2022 तक, US का 10 ईयर बॉन्ड यील्ड 2% से 3% के बीच रहा. लेकिन पिछले छह महीनों में यह यील्ड 4% से बढ़कर लगभग 5% हो गया. भारत में भी ऐसा ही ट्रेंड देखा गया है. जहां इसी दौरान 10 ईयर रुपये बॉन्ड का यील्ड 6.7% से बढ़कर 7% हो गया. यह स्थिति केवल भारत या US तक सीमित नहीं है. लगभग हर बड़ी इकॉनमी में बॉन्ड यील्ड बढ़ रही हैं.
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब क्या है?
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब है कि उधार लेने वाले लोग इन्वेस्टर्स की सेविंग्स के लिए कॉम्पिटिशन कर रहे हैं. इसलिए इन्वेस्टर्स को आकर्षित करने के लिए उन्हें ज्यादा रिटर्न देना पड़ता है. यह स्थिति पिछले 20 सालों के मुकाबले बिल्कुल विपरीत है. पहले ईजी मनी यानी सस्ता कर्ज इतना आम था कि इन्वेस्टर्स के लिए सेफ एसेट्स से महंगाई से ज्यादा रिटर्न कमाना मुश्किल हो गया था.
बॉन्ड यील्ड बढ़ क्यों रही हैं?
बॉन्ड यील्ड बढ़ने के कई कारण हैं. लेकिन 3 मुख्य फैक्टर्स जो इसे ड्राइव कर रहे हैं, वो ये हैं-
1. महंगाई बढ़ने की उम्मीद
2. इकॉनमिक ग्रोथ की उम्मीद
3. मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव
US फेड चेयर केविन वॉर्श ईजी मनी पॉलिसी के आलोचक रहे हैं. और क्योंकि US की मॉनेटरी पॉलिसी दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड पर असर डालती है, इसलिए इस बदलाव को ग्लोबल लेवल पर महसूस किया जा रहा है.
बढ़ती बॉन्ड यील्ड युवा इन्वेस्टर्स के लिए क्यों फायदेमंद है?
सबसे पहले आइए समझते हैं युवा इन्वेस्टर कौन हैं? युवा इन्वेस्टर वो लोग हैं, जो जीवन के ऐसे पड़ाव पर हैं जहां वो अपने पोर्टफोलियो को लगातार बढ़ाने पर सक्रिय रूप से ध्यान दे रहे हैं. भले ही उनका मौजूदा एसेट बेस छोटा हो, लेकिन उनकी इनकम कैपेसिटी ज्यादा होती है. साथ ही, उनके पास इन्वेस्टमेंट के लिए लंबा समय होता है. इसके उलट, ओल्ड इनवेस्टर वह होता है जो अपनी जमा-पूंजी खर्च करने के दौर के करीब होता है. वे रिटायरमेंट के करीब हो सकते हैं या पहले ही रिटायर हो चुके हो सकते हैं. भले ही उनके पास काफी एसेट्स हों, लेकिन उनकी इनकम कम होती है या जल्द ही कम होने वाली होती है. ऐसे इन्वेस्टर्स के पास इन्वेस्टमेंट के लिए कम समय होता है. जाहिर है, हम में से ज्यादातर लोग इन दोनों स्थितियों के बीच कहीं आते हैं.
हाई यील्ड का असर किन पर पड़ता है?
जब बॉन्ड यील्ड्स बढ़ते हैं तो इसका असर 2 चीजों पर दिखाई देता है. पहला फ्यूचर रिटर्न बढ़ जाता है. अगर आप आज कोई बॉन्ड खरीदते हैं, तो इसपर आपको पहले के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिल सकता है. बॉन्ड यील्ड यानी कि बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न दूसरी तरह की एसेट क्लास जैसे स्टॉक से मिलने वाले रिटर्न पर भी असर डालती है. इतिहास बताता है कि लंबे समय में स्टॉक बॉन्ड से बेहतर प्रदर्शन करते हैं. इसलिए अगर बॉन्ड से ज्यादा कमाई हो रही है तो स्टॉक से भी ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है. हालांकि यहां एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि स्टॉक्स बॉन्ड्स के मुकाबले ज्यादा रिस्की होते हैं.
ज्यादा फ्यूचर रिटर्न स्वाभाविक रूप से लंबे टाइम होराइजन वाले यंग इनवेस्टर्स के लिए अच्छा है. इससे उनकी वेल्थ आने वाले समय में ज्यादा बढ़ेगी. लेकिन ओल्ड इन्वेस्टर्स के लिए यह बात उतना मायने नहीं रखती. क्योंकि फ्यूचर में मिलने वाले इस हाई रिटर्न से उन्हें उतना फायदा नहीं मिल पाएगा.
बढ़ती यील्ड का दूसरा असर मौजूदा स्टॉक और बॉन्ड की कीमतों में गिरावट के तौर पर दिखता है. बॉन्ड के मामले में यह और भी साफ दिखाई पड़ता है. यील्ड और कीमतें हमेशा एक-दूसरे से उल्टी दिशा में चलती हैं. स्टॉक पर भी यही बात लागू होती है. स्टॉक की वैल्यू असल में उसके भविष्य के कैश फ्लो की मौजूदा वैल्यू होती है. जब यील्ड बढ़ती है, तो डिस्काउंट रेट भी बढ़ता है. जब कैश फ्लो को ज्यादा रेट पर डिस्काउंट किया जाता है, तो कीमतें गिरती हैं. स्टॉक और बॉन्ड की कीमतों में गिरावट पोर्टफोलियो की मौजूदा मार्केट वैल्यू पर असर डालती है. जिस यंग इनवेस्टर की मौजूदा एसेट्स कम हैं, उसके लिए पोर्टफोलियो वैल्यू में गिरावट का असर सीमित होता है. लेकिन ज्यादा संपत्ति वाले ओल्ड इन्वेस्टर्स पर ऐसी गिरावट का काफी असर पड़ सकता है. खासकर तब जब वे रिटायर हो चुके हों और अपने पोर्टफोलियो से समय-समय पर पैसे निकाल रहे हों.
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वेल्थ ट्रांसफर करने का तरीका
अगर बॉन्ड यील्ड ज्यादा बनी रहती है या और बढ़ती है, तो स्टॉक की कीमतें गिरेंगी. इसका मतलब है कि ओल्ड इन्वेस्टर्स को अपने शेयर बेचने पर कम पैसे मिलेंगे. वहीं, यंग इन्वेस्टर्स के लिए यह खरीदारी करने का एक अच्छा मौका है. इसे वेल्थ ट्रांसफर के तौर पर भी देखा जा सकता है, जहां पूंजी उन लोगों से, जिनके पास पहले से एसेट्स हैं, उन लोगों की तरफ जा रहा है जो अभी एसेट्स जमा कर रहे हैं. यह पूरी प्रक्रिया हाल के सालों में देखे गए ट्रेंड को उलट रही है. इसके लिए सेंट्रल बैंकों ने कुछ नए तरह के पॉलिसी टूल्स का इस्तेमाल किया, जैसे एसेट परचेज और फॉरवर्ड गाइडेंस.
इसका असर आज हो रहे बदलावों के ठीक उल्टा था. जहां एसेट की वैल्यू बढ़ी, वहीं भविष्य का रिटर्न कम हो गया. युवा निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा, जबकि ओल्ड इन्वेस्टर्स को फायदा हुआ. COVID-19 महामारी इसका एक बड़ा उदाहरण है; मार्च 2020 में आई ग्लोबल मार्केट क्रैश के बाद, मॉनेटरी ईजिंग यानी पैसे को सस्ता करने की प्रक्रिया पूरे जोर-शोर से शुरू हुई. 2020 के अंत तक स्टॉक्स ने अपना पूरा नुकसान रिकवर कर लिया था. इस तरह जिनके पास पहले से बड़े पोर्टफोलियो थे, उन्हें सुरक्षा मिल गई. वहीं इसी दौरान बॉन्ड यील्ड्स में भारी गिरावट आई. इसका मतलब था कि यंग इनवेस्टर्स के लिए फ्यूचर रिटर्न काफी कम हो गया.
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है और इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
Ganesh Chaturthi 2026: 1,000 सिक्कों से बने अनोखे गणपति जी, हिम्मतनगर के मशहूर कलाकार ने तैयार की प्रतिमा
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी का पर्व कल यानी 14 सितंबर, 2026 को मनाया जाएगा. देशभर में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. इसी बीच गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर क्षेत्र में कला और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला है. यहां के प्रसिद्ध कलाकार हितेश पंचाल ने अपनी रचनात्मकता और गणपति के प्रति आस्था का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. हितेश पंचाल ने 5 रुपये के 1,000 सिक्कों का इस्तेमाल कर गणेश जी की अनोखी प्रतिमा तैयार की है. आर्टिकल में जानें पूरी बात.
15 दिनों की मेहनत से तैयार हुई अनूठी प्रतिमा
आर्टिस्ट हितेश पंचाल द्वारा बनाई गई यह खास 'सिक्का गणेश' प्रतिमा 3 फीट बाय 3 फीट के गोलाकार कैनवास पर बनाई गई है. इस प्रतिमा को बनाने के लिए 5 रुपये के कुल 1,000 सिक्कों का इस्तेमाल किया गया है यानी इसमें करीब 5,000 रुपये मूल्य के सिक्के लगाए गए हैं. इन सिक्कों को एक स्पेशल टेकनीक से कैनवास पर व्यवस्थित तरीके से चिपकाया गया है और गणपति का स्वरूप उकेरा गया है.
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इस कलाकृति को तैयार करने में हितेश पंचाल को पूरे 15 दिनों तक लगातार मेहनत करनी पड़ी. सिक्कों को सही जगह पर लगाना, गणेश जी की आकृति को उभारना और अलग-अलग हिस्सों में बारीकी से काम करना आम लोगों के लिए तो बिल्कुल भी आसान नहीं होगा. लंबे समय की मेहनत और आस्था के बाद तैयार हुई यह कलाकृति हिम्मतनगर में लोगों के लिए खास आकर्षण बन गई है.
20 साल से कला के क्षेत्र में सक्रिय हैं हितेश पंचाल
हितेश पंचाल पिछले करीब 20 सालों से कला के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. पिछले कई वर्षों से वह भगवान गणेश के प्रति अपनी भक्ति को अलग-अलग कलात्मक माध्यमों के जरिए प्रदर्शित कर रहे हैं. उनका उद्देश्य हर साल कुछ ऐसा नया तैयार करना है, जो लोगों का ध्यान इनकी ओर आकर्षित करने के साथ गणपति के प्रति उनकी श्रद्धा को भी दर्शाता है.
पहले भी अपनी कला से आश्चर्यचकित किया लोगों को
इससे पहले भी हितेश पंचाल ने अपनी कला से लोगों को हैरान किया है. उन्होंने अखबारों पर गणेश जी के चित्र बनाए हैं. इसके अलावा, 51 पोस्टकार्ड पर गणपति की अलग-अलग आकृतियां बनाकर भी उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया था. इस बार उन्होंने सिक्कों को अपनी कला का माध्यम बनाकर गणेश जी की अनोखी प्रतिमा बनाई है.
'पांच सिक्कों वाले गणेश' सेंटर ऑफ अट्रैक्शन
हितेश पंचाल का यह अनोखा आर्टवर्क लोकल लोगों में 'पांच सिक्कों वाले गणेश' के नाम से चर्चा में है. गणेश चतुर्थी के मौके पर इस प्रतिमा को भक्तों के दर्शन के लिए खोला गया है. लोग बड़ी उत्सुकता के साथ इस अनोखे गणपति स्वरूप को देखने पहुंच रहे हैं. कलाकार हितेश पंचाल का कहना है कि कला और भक्ति का संगम किसी भी रचना को खास बना सकता है. उनके लिए गणपति जी की यह प्रतिमा सिर्फ एक आर्टवर्क नहीं, बल्कि श्रद्धा, मेहनत और रचनात्मकता का प्रतीक है.
गणेश चतुर्थी पर जहां भक्त अलग-अलग तरीके से बप्पा का स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं हिम्मतनगर के हितेश पंचाल ने अपनी कला के जरिए गणपति की का एक अनोखा स्वरूप तैयार किया है. 1,000 सिक्कों से तैयार यह गणेश प्रतिमा इस गणेशोत्सव में श्रद्धालुओं के लिए निश्चित तौर पर खास आकर्षण बनी हुई है.
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