सर्दियों की दस्तक के साथ ही देश के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। धुंध, स्मॉग और जहरीली हवा न सिर्फ सांस लेना मुश्किल कर देती है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए यह और भी खतरनाक हो जाता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आप जिस इलाके में हैं या जहां जाने की योजना बना रहे हैं, वहां की हवा कितनी सुरक्षित है।
Google Maps का नया AQI फीचर क्या है?
लोगों की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए Google Maps ने भारत में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की सुविधा शुरू की है। इस फीचर की मदद से यूजर्स किसी भी शहर या इलाके की हवा की गुणवत्ता की रियल-टाइम जानकारी हासिल कर सकते हैं। खास बात यह है कि अब आपको अलग-अलग वेबसाइट या ऐप पर जाने की जरूरत नहीं, क्योंकि रास्तों की जानकारी देने वाला Google Maps अब हवा की हालत भी बता रहा है।
यह फीचर मोबाइल ऐप (Android और iOS) के साथ-साथ डेस्कटॉप वर्जन पर भी उपलब्ध है। यानी चाहे आप फोन पर ट्रैवल प्लान कर रहे हों या लैपटॉप पर, AQI की जानकारी बस कुछ टैप में मिल जाएगी।
क्यों जरूरी है AQI जानना?
आज के समय में बहुत से लोगों को काम, पढ़ाई या बिजनेस के चलते एक शहर से दूसरे शहर जाना पड़ता है। अगर पहले से यह पता चल जाए कि किसी शहर की हवा कितनी खराब है, तो आप अपने ट्रैवल और आउटडोर एक्टिविटीज की बेहतर प्लानिंग कर सकते हैं।
- क्या बाहर मॉर्निंग वॉक करनी चाहिए या नहीं
- बच्चों को बाहर खेलने भेजना सुरक्षित है या नहीं
- मास्क पहनना जरूरी है या नहीं
इन सभी सवालों के जवाब AQI देखकर आसानी से मिल सकते हैं।
रंगों से समझिए हवा की सेहत
Google Maps पर AQI को समझाने के लिए नंबर के साथ-साथ कलर कोड सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, ताकि आम यूजर भी आसानी से हवा की स्थिति समझ सके।
- 0–50 (हरा रंग): गुड – हवा बिल्कुल साफ और सुरक्षित
- 51–100 (हल्का हरा/पीला): सैटिस्फैक्टरी – सामान्य गतिविधियों के लिए ठीक
- 101–200 (पीला/नारंगी): मॉडरेट – संवेदनशील लोगों को सावधानी
- 201–300 (नारंगी/लाल): खराब – बाहर निकलने से बचें
- 301–400 (गहरा लाल): बहुत खराब – स्वास्थ्य पर गंभीर असर
- 401–500 (बैंगनी/गहरा रंग): सिवियर – इमरजेंसी जैसी स्थिति
इन रंगों को देखकर आप तुरंत समझ सकते हैं कि कौन सा इलाका ज्यादा प्रदूषित है।
Google Maps कैसे जुटाता है AQI डेटा?
Google Maps अलग-अलग सरकारी और विश्वसनीय एयर मॉनिटरिंग नेटवर्क से मिलने वाले डेटा के आधार पर AQI दिखाता है। इसमें प्रदूषण मापने वाले सेंसर, सैटेलाइट डेटा और लोकल मॉनिटरिंग स्टेशन की जानकारी शामिल होती है। इसी वजह से यह फीचर लगभग रियल-टाइम और भरोसेमंद जानकारी देता है।
Google Maps पर AQI कैसे चेक करें?
इस फीचर का इस्तेमाल करना बेहद आसान है। नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें:
1. सबसे पहले अपने फोन या कंप्यूटर पर Google Maps ऐप/वेबसाइट खोलें।
2. सर्च बार में उस शहर या इलाके का नाम लिखें, जहां की हवा की गुणवत्ता जाननी है।
3. मैप लोड होने के बाद स्क्रीन के दाईं ओर, सर्च बार के नीचे ‘Layers’ का आइकन दिखाई देगा।
4. इस आइकन पर टैप या क्लिक करें।
5. अब खुलने वाले मेन्यू में ‘Air Quality’ विकल्प को चुनें।
6. ऐसा करते ही मैप पर अलग-अलग रंगों के जरिए AQI रीडिंग दिखने लगेगी।
7. किसी खास लोकेशन या रंगीन हिस्से पर टैप करके आप वहां का पूरा AQI डेटा देख सकते हैं।
रोजमर्रा की जिंदगी में कैसे आएगा काम?
Google Maps का यह AQI फीचर सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी दिनचर्या को सुरक्षित बनाने में भी मदद करता है। आप तय कर सकते हैं कि किस समय बाहर निकलना बेहतर है, किस रास्ते से गुजरना चाहिए और कब घर के अंदर रहना ही सही विकल्प होगा।
बढ़ते प्रदूषण के दौर में सही और समय पर जानकारी सबसे बड़ा हथियार है। Google Maps का AQI फीचर इसी दिशा में एक स्मार्ट कदम है। अब रास्तों के साथ-साथ हवा की सेहत भी आपकी उंगलियों पर है। अगली बार घर से निकलने से पहले Google Maps पर AQI जरूर चेक करें क्योंकि साफ हवा, स्वस्थ जीवन की पहली शर्त है।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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टेक्नोलॉजी की दुनिया में सुरक्षा और भरोसेमंद फीचर्स अब सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गए हैं। हाल ही में गूगल ने दिल्ली में ‘सेफ एंड ट्रस्टेड एआई’ इवेंट का आयोजन किया, जिसमें कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित उपयोग और यूजर्स को धोखाधड़ी से बचाने के नए उपायों के बारे में जानकारी दी। खासतौर पर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गूगल ने कई नए फीचर्स और अपडेट्स का ऐलान किया। आइए जानते हैं इन नए अपडेट्स के बारे में विस्तार से।
नए सेफ्टी अपडेट्स का ऐलान
गूगल ने भारत के लिए AI सेफ्टी अपडेट्स पेश किए हैं, जो डिजिटल दुनिया में सुरक्षा की नई मिसाल साबित हो सकते हैं। इन अपडेट्स में वित्तीय ऐप्स जैसे Google Pay, Paytm और Navi के लिए सुरक्षा फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा, SMS OTP की जगह आने वाली नई तकनीक और SynthID AI वॉटरमार्किंग डिटेक्शन टूल को बढ़ावा देना भी शामिल है। गूगल का कहना है कि ये फीचर्स AI का इस्तेमाल ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएंगे, जिससे यूजर्स को धोखाधड़ी और घोटालों से बचाया जा सके।
Gemini Nano के जरिए रियल-टाइम स्कैम डिटेक्शन
गूगल ने बताया कि अब Pixel स्मार्टफोन्स पर Gemini Nano टेक्नोलॉजी के जरिए रियल-टाइम स्कैम डिटेक्शन फीचर उपलब्ध होगा। इस फीचर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फोन पर ही संदिग्ध पैटर्न का विश्लेषण करता है और स्कैम की आशंका होने पर तुरंत अलर्ट भेजता है। विशेष बात यह है कि इस प्रक्रिया में ऑडियो रिकॉर्ड नहीं होता और न ही कोई डेटा गूगल के साथ शेयर किया जाता है। यानी यूजर की प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित रहती है। यह फीचर डिफॉल्ट रूप से बंद रहता है और इसे यूजर अपनी सहमति से चालू कर सकता है।
AI द्वारा बनाए गए कंटेंट की पहचान आसान होगी
गूगल ने यह भी ऐलान किया कि अब AI द्वारा बनाए गए कंटेंट की पहचान करना और भी आसान हो जाएगा। इसके लिए गूगल ने SynthID नामक AI वॉटरमार्किंग और डिटेक्शन टेक्नोलॉजी विकसित की है। अब यह तकनीक शोधकर्ताओं, अकादमिक संस्थानों और मीडिया प्रकाशकों के लिए भी उपलब्ध कराई जा रही है। गूगल प्ले प्रोटेक्ट ने अब तक 11.5 करोड़ से ज्यादा बार ऐसे ऐप्स को इंस्टॉल होने से रोका है, जो जानकारी का गलत इस्तेमाल कर सकते थे। इस कदम का उद्देश्य भारतीय यूजर्स को AI का सुरक्षित और भरोसेमंद इस्तेमाल प्रदान करना है।
स्क्रीन शेयर करते समय मिलेगा अलर्ट
स्क्रीन शेयरिंग के दौरान होने वाले धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए गूगल ने नया स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम अलर्ट फीचर लॉन्च किया है। यह फीचर Android 11 और उससे ऊपर के वर्जन पर काम करेगा। अब अगर कोई यूजर किसी अनजान व्यक्ति के साथ कॉल पर स्क्रीन शेयर करते हुए Google Pay, Paytm या Navi जैसे ऐप्स खोलता है, तो उसे तुरंत अलर्ट मिलेगा। इससे यूजर्स को स्क्रीन शेयरिंग के दौरान होने वाले घोटालों से बचाया जा सकेगा।
OTP की जगह आएगा ePNV
गूगल ने एक और बड़ा अपडेट पेश किया है जिसे Enhanced Phone Number Verification (ePNV) कहा जाता है। यह नई तकनीक SMS OTP की जगह लेगी। ePNV पूरी तरह SIM-आधारित सुरक्षा प्रणाली है, जो OTP से जुड़े खतरों को खत्म करती है। इस प्रक्रिया में आपका फोन नंबर सुरक्षित रहता है और वेरिफिकेशन ज्यादा भरोसेमंद तरीके से होता है। इस तकनीक के आने से न केवल धोखाधड़ी कम होगी, बल्कि यूजर्स को OTP की परेशानी भी नहीं होगी।
गूगल का उद्देश्य स्पष्ट है, AI और डिजिटल दुनिया का सुरक्षित उपयोग। चाहे वह रियल-टाइम स्कैम डिटेक्शन हो, AI वॉटरमार्किंग, स्क्रीन शेयर अलर्ट या ePNV, सभी फीचर्स इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। भारतीय यूजर्स अब भरोसेमंद तरीके से डिजिटल लेनदेन और AI का उपयोग कर पाएंगे।
गूगल की यह पहल डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल साबित हो सकती है और आने वाले समय में यह फीचर्स हर स्मार्टफोन यूजर के लिए जरूरी बन सकते हैं। AI के इस युग में, सुरक्षा और भरोसेमंद तकनीकें सबसे अहम हो गई हैं। गूगल के नए फीचर्स जैसे ePNV, Gemini Nano रियल-टाइम स्कैम डिटेक्शन, स्क्रीन-शेयर अलर्ट और SynthID वॉटरमार्किंग, डिजिटल दुनिया को अधिक सुरक्षित और यूजर्स के लिए भरोसेमंद बनाएंगे। यह कदम बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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