उत्तर प्रदेश में स्पेशल टीईटी (Special TET) 2026 को लेकर शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। योगी सरकार ने कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के लिए अध्यापक पात्रता से जुड़ी प्रक्रिया को स्पष्ट कर दिया है।
अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने स्पेशल टीईटी का विज्ञापन जारी कर दिया है। इस परीक्षा का आयोजन प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों तथा विशेष शिक्षकों (CwSN) के लिए किया जाएगा।
TET-CTET पास शिक्षकों को नहीं देना होगा दोबारा एग्जाम स्पेशल टीईटी को लेकर सबसे बड़ी राहत उन शिक्षकों को मिली है, जो पहले ही TET या CTET उत्तीर्ण कर चुके हैं। जारी निर्देशों के अनुसार, ऐसे शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी को दोबारा पास करना अनिवार्य नहीं होगा। वहीं, जिन शिक्षकों ने अभी तक TET या CTET उत्तीर्ण नहीं किया है, उन्हें निर्धारित विज्ञापन के तहत रजिस्ट्रेशन और आवेदन कर परीक्षा में शामिल होना होगा।
3 नवंबर को होगी स्पेशल टीईटी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक स्पेशल टीईटी परीक्षा 3 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। इसके लिए विज्ञापन 3 सितंबर 2026 को जारी किया गया था। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन/OTR और आवेदन प्रक्रिया 5 सितंबर 2026 से शुरू हो चुकी है।
आवेदन से जुड़ी प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
प्रक्रिया तारीख विज्ञापन जारी 3 सितंबर 2026 ऑनलाइन OTR/आवेदन शुरू 5 सितंबर 2026 आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 4 अक्टूबर 2026 आवेदन में संशोधन की अंतिम तारीख 8 अक्टूबर 2026 स्पेशल टीईटी परीक्षा 3 नवंबर 2026
कौन-कौन से शिक्षक कर सकते हैं आवेदन? प्राथमिक स्तर पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों, स्थानीय निकायों के विद्यालयों, राज्य सरकार/बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता या संबद्धता प्राप्त विद्यालयों, राज्य सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों और विशेष एजुकेटर्स के कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षक पात्र होंगे।
वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों, स्थानीय निकायों, मान्यता या संबद्धता प्राप्त विद्यालयों, राज्य सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों और विशेष एजुकेटर्स के कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
जिन शिक्षकों ने TET-CTET नहीं किया, उनके लिए क्या? जिन कार्यरत शिक्षकों ने अब तक TET या CTET उत्तीर्ण नहीं किया है, उन्हें स्पेशल टीईटी के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीकरण कर आवेदन करना होगा।
यानी सरकार की ओर से पात्र शिक्षकों को उनकी स्थिति के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जा रहा है। ऐसे अभ्यर्थियों को आवेदन की अंतिम तारीख का विशेष ध्यान रखना होगा।
शिक्षकों तक जानकारी पहुंचाने के निर्देश शिक्षा विभाग ने संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सभी पात्र शिक्षकों तक स्पेशल टीईटी से जुड़ी जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र शिक्षक समय रहते OTR, आवेदन और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया पूरी कर सकें।
इस व्यवस्था से कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के लिए पात्रता को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। TET/CTET पहले से पास कर चुके शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने की अनिवार्यता से राहत दी गई है, जबकि बिना TET/CTET वाले पात्र शिक्षकों के लिए Special TET में शामिल होने का रास्ता खुला है।
विश्वभर में लगभग सभी महापुरूषों ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता की संज्ञा दी है। गुरू रूपी इन्हीं शिक्षकों को सम्मान देने के लिए प्रतिवर्ष 5 सितम्बर को ‘शिक्षक दिवस’ मनाया जाता है। यह एकमात्र ऐसा दिन है, जब छात्र अपने शिक्षकों अर्थात् गुरुओं को उपहार देते हैं। पहले जहां गुरूकुल परम्परा हुआ करती थी और उस समय जीवन की व्यावहारिक शिक्षाएं इन्हीं गुरूकुल में गुरु दिया करते थे, आज नए जमाने में गुरूओं का वही अहम कार्य शिक्षक पूरा कर रहे हैं, जो छात्रों के सच्चे मार्गदर्शक बनकर उन्हें स्कूल से लेकर कॉलेज तक वह शिक्षा देते हैं, जो उन्हें जीवन में बुलंदियों तक पहुंचाने में सहायक बनती है। आज भले ही शिक्षा प्राप्त करने या ज्ञानोपार्जन के लिए अनेक तकनीकी साधन सुलभ हैं किन्तु एक अच्छे शिक्षक की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। जिस प्रकार एक अच्छा शिल्पकार किसी भी पत्थर को तराशकर उसे खूबसूरत रूप दे सकता है और एक कुम्हार गीली मिट्टी को सही आकार प्रदान कर सही आकार के खूबसूरत बर्तन बनाता है, समाज में वही भूमिका एक शिक्षक अदा करता है, इसीलिए शिक्षक को समाज के असली शिल्पकार का भी दर्जा दिया जाता है। इतिहास ऐसे शिक्षकों के उदाहरणों से भरा पड़ा है, जिन्होंने अपनी शिक्षा से अनेक लोगों के जीवन की दिशा ही बदल दी।
भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर भारत में प्रतिवर्ष 5 सितम्बर को शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से शिक्षक दिवस मनाया जाता है। 13 मई 1962 को राधाकृष्णन देश के राष्ट्रपति बने और उसी वर्ष उनके कुछ छात्र उनका जन्मदिन मनाने के उद्देश्य से उनके पास गए तो उन्होंने उन छात्रों को परामर्श दिया कि उनके जन्मदिन को अध्यापन के प्रति उनके समर्पण के लिए ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाए और इस प्रकार 5 सितम्बर 1962 से ही देश में यह दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। 5 सितम्बर 1888 को एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में जन्मे डा. राधाकृष्णन ने अपने जीवनकाल के 40 वर्ष एक आदर्श शिक्षक के रूप में समर्पित कर दिए। मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज से शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने मैसूर यूनिवर्सिटी, कलकत्ता यूनिवर्सिटी तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्यापन किया और लंदन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी दर्शन शास्त्र पढ़ाया। 1931 में किंग जॉर्ज पंचम ने उन्हें नाइटहुड की उपाधि प्रदान की किन्तु उन्होंने देश की आजादी के बाद अपने नाम के साथ ‘सर’ लगाना बंद कर दिया। राधाकृष्णन 1947 से 1949 तक संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य रहे और 1954 में उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। 1962 में ब्रिटिश अकादमी का सदस्य बनने पर उन्हें गोल्डन स्पर, इंग्लैंड के ‘ऑर्डर ऑफ मैरिट’ तथा 1975 में मरणोपरांत अमेरिकी सरकार द्वारा ‘टेम्पलटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। डा. राधाकृष्णन एक महान् दार्शनिक और आदर्श शिक्षक होने के साथ-साथ राजनीति में भी प्रवीण थे।
दर्शन शास्त्र जैसे गंभीर विषय को भी डा. राधाकृष्णन अपनी अद्भुत शैली से बेहद सरल और रोचक बना देते थे। जिस विषय का वे अध्यापन करते थे, पहले स्वयं उसका गहन अध्ययन करते थे। डा. राधाकृष्णन अपने व्याख्यानों के साथ-साथ विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से छात्रों को उच्च नैतिक मूल्यों को अपने आचरण में समाहित करने के लिए प्रेरित कर उनका बेहतर मार्गदर्शन भी करते थे। उनका कहना था कि हमें अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि शिक्षक के बिना इस दुनिया में हम सभी अधूरे हैं। शिक्षक ही हैं, जो देश के भविष्य के वास्तविक आकृतिकार हैं और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। राधाकृष्णन का कहना था कि हमें मानवता को उन नैतिक जड़ों तक वापस ले जाना चाहिए, जहां से अनुशासन और स्वतंत्रता दोनों का उद्गम हो। उनका कथन स्पष्ट था कि जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होगा और शिक्षा को एक मिशन के रूप में नहीं अपनाएगा, तब तक अच्छी और उद्देश्यपूर्ण शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती।
आज के दौर में अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता अक्सर यह रहती है कि उनका बच्चा पढ़ाई में अव्वल आए, प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश पाए और आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी बने। निसंदेह जीवन में सफलता, उत्कृष्ट शिक्षा और व्यावसायिक उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं लेकिन केवल ऊंचे पद और बड़ी डिग्रियां किसी व्यक्ति को महान नहीं बनाती। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चे को सफल बनाने के साथ-साथ उसे एक संवेदनशील, विवेकशील, जिम्मेदार और अच्छा इंसान बनाना भी होना चाहिए। यदि ज्ञान के साथ संस्कार, चरित्र और मानवीय मूल्यों का विकास नहीं हुआ तो ऐसी शिक्षा अधूरी ही मानी जाएगी। हर बच्चे को नैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, व्यावहारिक और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ी शिक्षा मिलनी चाहिए ताकि वह जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही और गलत के बीच अंतर कर सके तथा अपने विवेक से बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने में सक्षम बने।
शिक्षा ऐसी हो, जो केवल प्रतियोगिता में आगे बढ़ने की क्षमता न दे बल्कि सहयोग, सहानुभूति, अनुशासन, ईमानदारी, सहिष्णुता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित करे। यही गुण आगे चलकर परिवार, समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शिक्षा-दर्शन भी इसी व्यापक दृष्टिकोण पर आधारित था। उनका विश्वास था कि सही शिक्षा व्यक्ति के चरित्र का निर्माण कर समाज की अनेक बुराइयों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के सम्मान का अवसर नहीं बल्कि शिक्षा के उद्देश्य पर आत्ममंथन का दिन भी है। उनके आदर्शों, शिक्षाओं और जीवन-मूल्यों को अपनाकर ही हम ऐसी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं, जो ज्ञानवान होने के साथ संस्कारित, संवेदनशील और शांतिपूर्ण समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान दे।
- योगेश कुमार गोयल
(लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं)
भारत में फॉर्मूला वन की वापसी की उम्मीद फिर जगी है. भारत में आखिरी F1 रेस 27 अक्टूबर 2013 को ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में हुई थी. केंद्र सरकार ने मोटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और F1 को दोबारा भारत लाने के लिए नीति आयोग की अध्यक्षता में करीब 10 सदस्यीय टास्क फोर्स बनाई है. युगल किशोर जोशी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है. Tue, 15 Sep 2026 18:48:23 +0530