Responsive Scrollable Menu

WhatsApp में दिखने वाले इस नीले गोले के हैं अनगिनत फायदे, जाने कैसे फटाक से बता देता है हर एक पूछी चीज

नीला गोलाव्हाट्सएप का नया फीचर दिखने में तो नीले गोले जैसा है, लेकिन यह वास्तव में बहुत ही उपयोगी है। यह फीचर कई भाषाओं को समझने और उनमें बातचीत करने की क्षमता रखता है। व्हाट्सएप पर Meta AI एक चैटबॉट के रूप में उपलब्ध है, जो यूजर्स की हर तरह से सहायता करने के लिए तैयार है। यह फीचर यूजर्स के सवालों के जवाब देने, जानकारी देने और बातचीत को आसान बनाने में बहुत मददगार साबित हो रहा है। व्हाट्सएप का यह Meta AI फीचर आजकल यूजर्स के बीच बहुत लोकप्रिय हो रहा है।

यह फीचर अब सिर्फ व्हाट्सएप ही नहीं, बल्कि इंस्टाग्राम और फेसबुक पर भी उपलब्ध है। यूजर्स इसे अपने काम को और भी आसान बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। अब अपने सोशल मीडिया अनुभव को बेहतर बनाने के लिए इस नए फीचर का लाभ उठाएं।आसानी से काम 

इस सुविधा का उपयोग करके अब आपको इंटरनेट पर जानकारी खोजने के लिए अलग-अलग वेबसाइट्स पर जाने की जरूरत नहीं होगी। आप सीधे व्हाट्सएप पर ही सभी जानकारियाँ आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। यह आपको समय की बचत करने के साथ-साथ त्वरित और सटीक जानकारी भी प्रदान करता है।यूजर फ्रेंडली


व्हाट्सएप पर मेटा एआई का उपयोग करना बेहद आसान है। इसके लिए आपको एक नई चैट शुरू करनी होगी और चैट बॉक्स में ‘@’ टाइप करना होगा। इसके बाद, आप मेटा एआई से अपनी किसी भी पसंद के सवाल को पूछ सकते हैं। यह प्रक्रिया न सिर्फ सरल है बल्कि आपकी जरूरतों को तेजी से पूरा करने के लिए तैयार है।कैसे करें इस्तेमाल

Continue reading on the app

38 साल बाद Sri Lanka की यात्रा पर गये भारतीय रक्षा मंत्री, पहुँचते ही China का सारा खेल पलट दिया

करीब 38 साल बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री का श्रीलंका पहुंचना हिंद महासागर की बदलती भू-राजनीति में भारत की उस रणनीतिक वापसी का संकेत है, जिसमें सुरक्षा, समुद्री शक्ति, आर्थिक साझेदारी और जनविश्वास, चारों मोर्चों को एक साथ साधा जा रहा है। इससे पहले 1988 में तत्कालीन रक्षा मंत्री केसी पंत श्रीलंका गए थे और अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कोलंबो की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।

राजनाथ सिंह ने कोलंबो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए जिस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया, उसका रणनीतिक संदेश बेहद स्पष्ट था, “पड़ोसी बदले नहीं जा सकते।” उन्होंने कहा कि भारत श्रीलंका को अपना बेहद करीबी मित्र मानता है और संकट की किसी भी घड़ी में उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। यह केवल भावनात्मक बयान नहीं, बल्कि 2022 के आर्थिक संकट और 2025 में चक्रवात दित्वाह के बाद भारत की त्वरित सहायता से जुड़ी उस विश्वसनीयता का राजनीतिक विस्तार है, जिसे श्रीलंका में चीन के मुकाबले भारत की सबसे बड़ी ताकत माना जा सकता है।

चीन के मुकाबले भारत की बढ़त क्यों अहम?

श्रीलंका हिंद महासागर के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के बीच स्थित है। कोलंबो, हंबनटोटा और अन्य बंदरगाहों की भौगोलिक स्थिति इसे भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए असाधारण महत्व देती है। पिछले वर्षों में चीन की आर्थिक और बंदरगाह परियोजनाओं ने श्रीलंका को बीजिंग के रणनीतिक प्रभाव के केंद्र में ला दिया था। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम संकेत देता है कि कोलंबो अब एकतरफा चीनी निर्भरता की बजाय संतुलित साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है।

खुद श्रीलंका के Sunday Times ने राजनाथ सिंह के दौरे से पहले लिखा कि भारत चाहता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली यात्रा के दौरान हुए समझौतों को तेजी से लागू किया जाए। अखबार ने यह भी रेखांकित किया कि सिंह की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब श्रीलंका को अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक सक्रियता से संचालित करना होगा।

इसी अखबार के संपादकीय ने इससे भी बड़ा संकेत दिया। उसने हिंद महासागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियों, समुद्री मार्गों और बंदरगाहों की भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच श्रीलंका को फिर से “geopolitical vortex” में बताया और चीन के संदर्भ में पहले सामने आए संदिग्ध शोध-पोतों के मुद्दे को याद किया। यानी श्रीलंका की अपनी मीडिया बहस भी यह स्वीकार कर रही है कि द्वीप की सुरक्षा और संप्रभुता अब सीधे हिंद महासागर की महाशक्ति प्रतिस्पर्धा से जुड़ी है।

रक्षा सहयोग अब कागज से जमीन पर

इस यात्रा का सबसे ठोस परिणाम तीन महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों के रूप में सामने आ रहा है। इनमें दोनों देशों के National Cadet Corps के बीच सहयोग, भारत और श्रीलंका के National Defence Colleges के बीच साझेदारी तथा श्रीलंकाई वायुसेना के भारतीय मूल के L70 एंटी-एयरक्राफ्ट हथियारों के रखरखाव में भारत की सहायता शामिल है। भारत पहले ही 24 ऐसे हथियार श्रीलंका को दे चुका है और अब शेष छह की भी मुफ्त में मेंटेनेंस सहायता करेगा।

यहां असली महत्व हथियारों से ज्यादा दीर्घकालिक सैन्य इंटरऑपरेबिलिटी और संस्थागत संबंधों का है। प्रशिक्षण, रक्षा शिक्षा और उपकरणों का रखरखाव किसी देश को केवल हथियार बेचने से कहीं ज्यादा गहरे सुरक्षा रिश्ते में बांधता है। इसके साथ ही कोलंबो बंदरगाह पर भारतीय नौसेना के INS Udaygiri की मौजूदगी ने यात्रा को स्पष्ट समुद्री आयाम भी दे दिया है।

दिल जीतने की कूटनीति

राजनाथ सिंह ने केवल रक्षा की भाषा नहीं बोली। उन्होंने भारत की आर्थिक क्षमता, तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और वैश्विक भूमिका को भी सामने रखा। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था के करीब 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने, 7.8 प्रतिशत तिमाही वृद्धि और वैश्विक विकास में 16 प्रतिशत से अधिक योगदान का उल्लेख किया। यह संदेश श्रीलंका के लिए महत्वपूर्ण है कि भारत अब केवल सुरक्षा प्रदाता नहीं, बल्कि आर्थिक अवसरों का स्रोत भी है।

उधर, श्रीलंका के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस रिश्ते की सकारात्मक स्वीकार्यता दिखाई दे रही है। पूर्व ईस्टर्न प्रोविंस गवर्नर और सीलोन वर्कर्स कांग्रेस नेता सेंथिल थोंडामन ने राजनाथ सिंह की यात्रा को दोनों देशों की रक्षा साझेदारी मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि श्रीलंका ने सरकारें बदलने के बावजूद भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बनाए रखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रीलंका के लोगों द्वारा “बड़े भाई” की तरह स्वीकार किए जाने की बात भी कही।

रणनीतिक निष्कर्ष: भारत ने बाजी कैसे पलटी?

देखा जाये तो यह स्पष्ट है कि भारत ने श्रीलंका को चीन की एकाधिकारवादी रणनीतिक निर्भरता की ओर जाने से रोकने के लिए एक मजबूत वैकल्पिक सुरक्षा और आर्थिक ढांचा खड़ा कर दिया है। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी रणनीतिक जीत है। भारत ने सैन्य शक्ति के साथ विश्वसनीयता, संकट में मदद, सांस्कृतिक निकटता, आर्थिक अवसर और जनसंपर्क को एक पैकेज में बदल दिया है। श्रीलंका को यह संदेश मिल रहा है कि भारत उसके सामने कोई दूर की महाशक्ति नहीं, बल्कि वह पड़ोसी है जो संकट में सबसे पहले पहुंच सकता है।

हिंद महासागर के इस निर्णायक भूगोल में यही भारत की सबसे बड़ी बढ़त है। चीन बंदरगाहों और परियोजनाओं के जरिए प्रभाव बनाता है, जबकि भारत अब सुरक्षा, साझेदारी और भरोसे के जरिए अपना प्रभाव गहरा कर रहा है। राजनाथ सिंह की कोलंबो यात्रा केवल रक्षा कूटनीति नहीं; यह हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक वापसी और श्रीलंका के दिल-दिमाग दोनों में अपनी जगह मजबूत करने की कवायद है।

-नीरज कुमार दुबे
 

Continue reading on the app

  Sports

Video: भारत के टी-20 कप्तान श्रेयस अय्यर ने एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के प्लान पर की बात

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान ने एशियाई खेल 2026 की तैयारियों, खिलाड़ियों की फिटनेस, चोट प्रबंधन और टीम संयोजन पर चर्चा की। उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ पहले मैच पर फोकस और टीम के ऊंचे मनोबल को भी रेखांकित किया। #AsianGames2026 #TeamIndia Mon, 14 Sep 2026 13:43:03 +0530

  Videos
See all

Breaking News: दिल्ली में Gym Trainer की गोली मारकर हत्या | Delhi Crime News | News18 India #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-14T08:07:10+00:00

MPs and Lords call for new law to address AI threat to human rights | BBC News #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-14T08:10:52+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers