38 साल बाद Sri Lanka की यात्रा पर गये भारतीय रक्षा मंत्री, पहुँचते ही China का सारा खेल पलट दिया
करीब 38 साल बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री का श्रीलंका पहुंचना हिंद महासागर की बदलती भू-राजनीति में भारत की उस रणनीतिक वापसी का संकेत है, जिसमें सुरक्षा, समुद्री शक्ति, आर्थिक साझेदारी और जनविश्वास, चारों मोर्चों को एक साथ साधा जा रहा है। इससे पहले 1988 में तत्कालीन रक्षा मंत्री केसी पंत श्रीलंका गए थे और अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कोलंबो की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।
राजनाथ सिंह ने कोलंबो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए जिस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया, उसका रणनीतिक संदेश बेहद स्पष्ट था, “पड़ोसी बदले नहीं जा सकते।” उन्होंने कहा कि भारत श्रीलंका को अपना बेहद करीबी मित्र मानता है और संकट की किसी भी घड़ी में उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। यह केवल भावनात्मक बयान नहीं, बल्कि 2022 के आर्थिक संकट और 2025 में चक्रवात दित्वाह के बाद भारत की त्वरित सहायता से जुड़ी उस विश्वसनीयता का राजनीतिक विस्तार है, जिसे श्रीलंका में चीन के मुकाबले भारत की सबसे बड़ी ताकत माना जा सकता है।
चीन के मुकाबले भारत की बढ़त क्यों अहम?
श्रीलंका हिंद महासागर के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के बीच स्थित है। कोलंबो, हंबनटोटा और अन्य बंदरगाहों की भौगोलिक स्थिति इसे भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए असाधारण महत्व देती है। पिछले वर्षों में चीन की आर्थिक और बंदरगाह परियोजनाओं ने श्रीलंका को बीजिंग के रणनीतिक प्रभाव के केंद्र में ला दिया था। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम संकेत देता है कि कोलंबो अब एकतरफा चीनी निर्भरता की बजाय संतुलित साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है।
खुद श्रीलंका के Sunday Times ने राजनाथ सिंह के दौरे से पहले लिखा कि भारत चाहता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली यात्रा के दौरान हुए समझौतों को तेजी से लागू किया जाए। अखबार ने यह भी रेखांकित किया कि सिंह की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब श्रीलंका को अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक सक्रियता से संचालित करना होगा।
इसी अखबार के संपादकीय ने इससे भी बड़ा संकेत दिया। उसने हिंद महासागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियों, समुद्री मार्गों और बंदरगाहों की भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच श्रीलंका को फिर से “geopolitical vortex” में बताया और चीन के संदर्भ में पहले सामने आए संदिग्ध शोध-पोतों के मुद्दे को याद किया। यानी श्रीलंका की अपनी मीडिया बहस भी यह स्वीकार कर रही है कि द्वीप की सुरक्षा और संप्रभुता अब सीधे हिंद महासागर की महाशक्ति प्रतिस्पर्धा से जुड़ी है।
रक्षा सहयोग अब कागज से जमीन पर
इस यात्रा का सबसे ठोस परिणाम तीन महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों के रूप में सामने आ रहा है। इनमें दोनों देशों के National Cadet Corps के बीच सहयोग, भारत और श्रीलंका के National Defence Colleges के बीच साझेदारी तथा श्रीलंकाई वायुसेना के भारतीय मूल के L70 एंटी-एयरक्राफ्ट हथियारों के रखरखाव में भारत की सहायता शामिल है। भारत पहले ही 24 ऐसे हथियार श्रीलंका को दे चुका है और अब शेष छह की भी मुफ्त में मेंटेनेंस सहायता करेगा।
यहां असली महत्व हथियारों से ज्यादा दीर्घकालिक सैन्य इंटरऑपरेबिलिटी और संस्थागत संबंधों का है। प्रशिक्षण, रक्षा शिक्षा और उपकरणों का रखरखाव किसी देश को केवल हथियार बेचने से कहीं ज्यादा गहरे सुरक्षा रिश्ते में बांधता है। इसके साथ ही कोलंबो बंदरगाह पर भारतीय नौसेना के INS Udaygiri की मौजूदगी ने यात्रा को स्पष्ट समुद्री आयाम भी दे दिया है।
दिल जीतने की कूटनीति
राजनाथ सिंह ने केवल रक्षा की भाषा नहीं बोली। उन्होंने भारत की आर्थिक क्षमता, तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और वैश्विक भूमिका को भी सामने रखा। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था के करीब 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने, 7.8 प्रतिशत तिमाही वृद्धि और वैश्विक विकास में 16 प्रतिशत से अधिक योगदान का उल्लेख किया। यह संदेश श्रीलंका के लिए महत्वपूर्ण है कि भारत अब केवल सुरक्षा प्रदाता नहीं, बल्कि आर्थिक अवसरों का स्रोत भी है।
उधर, श्रीलंका के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस रिश्ते की सकारात्मक स्वीकार्यता दिखाई दे रही है। पूर्व ईस्टर्न प्रोविंस गवर्नर और सीलोन वर्कर्स कांग्रेस नेता सेंथिल थोंडामन ने राजनाथ सिंह की यात्रा को दोनों देशों की रक्षा साझेदारी मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि श्रीलंका ने सरकारें बदलने के बावजूद भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बनाए रखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रीलंका के लोगों द्वारा “बड़े भाई” की तरह स्वीकार किए जाने की बात भी कही।
रणनीतिक निष्कर्ष: भारत ने बाजी कैसे पलटी?
देखा जाये तो यह स्पष्ट है कि भारत ने श्रीलंका को चीन की एकाधिकारवादी रणनीतिक निर्भरता की ओर जाने से रोकने के लिए एक मजबूत वैकल्पिक सुरक्षा और आर्थिक ढांचा खड़ा कर दिया है। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी रणनीतिक जीत है। भारत ने सैन्य शक्ति के साथ विश्वसनीयता, संकट में मदद, सांस्कृतिक निकटता, आर्थिक अवसर और जनसंपर्क को एक पैकेज में बदल दिया है। श्रीलंका को यह संदेश मिल रहा है कि भारत उसके सामने कोई दूर की महाशक्ति नहीं, बल्कि वह पड़ोसी है जो संकट में सबसे पहले पहुंच सकता है।
हिंद महासागर के इस निर्णायक भूगोल में यही भारत की सबसे बड़ी बढ़त है। चीन बंदरगाहों और परियोजनाओं के जरिए प्रभाव बनाता है, जबकि भारत अब सुरक्षा, साझेदारी और भरोसे के जरिए अपना प्रभाव गहरा कर रहा है। राजनाथ सिंह की कोलंबो यात्रा केवल रक्षा कूटनीति नहीं; यह हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक वापसी और श्रीलंका के दिल-दिमाग दोनों में अपनी जगह मजबूत करने की कवायद है।
-नीरज कुमार दुबे
दिल्ली से सीधे सागर पहुंचे CM डॉ. मोहन यादव, बोले दोषियों को ऐसी सजा देंगे कि दोबारा कोई हिम्मत नहीं करेगा, प्रशासन को दिया फ्री हैंड
बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों और कई लोगों के बीमार होने के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख दिखाया है। मंगलवार को नई दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री सीधे सागर पहुंचे। यहां जिला अस्पताल में भर्ती प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर उपचार के साथ सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
अस्पताल से निकलने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकारियों को फ्री-हैंड देते हुए साफ कहा कि जहां भी जरूरत हो, कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होगी कि दोबारा हिम्मत नहीं करेंगे- CM
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जहरीली शराब के मामले में प्रशासन को कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जहां अवैध अतिक्रमण से जुड़े मामले सामने आएं, वहां भी कार्रवाई की जाए। सीमावर्ती इलाकों को देखते हुए अधिकारियों से पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों के संपर्क में रहने को भी कहा गया है।
सीएम ने कहा, “हम दोषियों पर ऐसी कार्रवाई करेंगे कि दोबारा किसी की इस तरह के काम करने की हिम्मत नहीं होगी।” उन्होंने बताया कि इस संबंध में पूरे प्रदेश के लिए निर्देश दिए गए हैं।
जहरीली शराब के मामलों में कठोर सजा का किया जिक्र
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने जहरीली शराब से जुड़े मामलों में प्रदेश के कानूनी प्रावधानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस तरह के अपराधों को लेकर कानून को कठोर बनाया है और इसमें हत्या से लेकर आजीवन कारावास तथा फांसी तक की सजा का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में इस तरह के मामलों को लेकर इतने कठोर कानूनी प्रावधान नहीं थे।
कांग्रेस से बोले- इस मामले में राजनीति नहीं, एकजुटता दिखाएं
मुख्यमंत्री ने शराबबंदी को लेकर धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर अभियान चलाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि किसी परिवार में पिता या पुत्र की मौत बेहद कष्टकारी है और ऐसे मामलों को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। सीएम डॉ. यादव ने नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेताओं से अपील करते हुए कहा कि इस मामले में राजनीति करने के बजाय सभी को एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करना चाहिए।
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