इटारसी के किसान की अनोखी कला, अलग-अलग अनाज के दानों से बनाई BRICS नेताओं की तस्वीरें, कहा- संबंधित विदेशी दूतावासों को भेजूंगा चित्र
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। समिट के पहले दिन यानि शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में BRICS देशों के नेताओं ने साझा प्राथमिकताओं, वैश्विक मुद्दों और आपसी सहयोग को मजबूत करने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
एक तरफ नई दिल्ली में BRICS समिट चल रही है तो वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के इटारसी के ग्राम सुपरली के किसान कलाकार ने अपनी कला के जरिए भारत की कृषि विरासत को दिखाया है। कलाकार किसान योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी ने अलग-अलग मोटे अनाज से BRICS समिट में शामिल नेताओं के चित्र बनाए हैं।
किसान ने इन नेताओं के बनाये चित्र
जानकारी अनुसार, कलाकार किसान ने अपनी प्रतिभा का हुनर दिखाते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी, सऊदी अरब के युवराज और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान, साथ ही संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई खास मेहमानों के चित्र बनाये हैं। इतना ही नहीं तस्वीर में पहला चित्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बनाया गया है।
किसान ने तस्वीरों को बनाने में किया विभिन्न अनाजों का उपयोग
कलाकार किसान ने बताया कि इन अनोखी कलाकृतियों को तैयार करने में उन्हें कई दिन लगे। इन चित्रों को बनाने में उन्होंने रागी, बाजरा, राजगिरा, कोदो, कुटकी, धान, गेहूं, तिल और खसखस जैसे पारंपरिक एवं मोटे अनाजों का इस्तेमाल किया है। किसान ने पहले इन अनाजों को अलग-अलग रंगों में रंगा और इसके बाद एक-एक दाने को बेहद बारीकी से चिपकाकर तस्वीरों का आकार दिया।
कलाकार किसान ने पीएम मोदी के इस संदेश से ली प्रेरणा
किसान योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी का कहना है कि भारत में अनाज भोजन के साथ-साथ संस्कृति और परंपरा का भी अहम हिस्सा है। कलाकार ने इसी भावना से अनाज से कलाकृतियां बनाकर विदेशी मेहमानों के स्वागत का प्रयास किया। कलाकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘श्रीअन्न’ और मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के संदेश से प्रेरणा ली है।
उन्होंने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार श्रीअन्न और मोटे अनाजों के इस्तेमाल और बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं। उनकी इसी बात से प्रेरणा लेकर अपनी कलाकृतियों में पारंपरिक अनाजों को विशेष स्थान दिया है। किसान ने कहा कि अनाज से बनी इन कलाकृतियों को नई दिल्ली में मौजूद संबंधित विदेशी दूतावासों में ईमेल के माध्यम से भेजा जाएगा। जिससे पूरी दुनिया को भारत के कृषि विरासत का महत्व बताया जा सके।
साध्वी हर्षानंद गिरि फिर पहुंची खड़े हनुमान मंदिर, बोलीं – ‘प्रतिमा नहीं हटे, मंदिर निर्माण की तारीख बताए प्रशासन’
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और सड़क चौड़ीकरण के कारण उज्जैन का खड़ा हनुमान मंदिर लगातार चर्चा में है। दरअसल शनिवार शाम मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे। इसी दौरान साध्वी हर्षानंद गिरि भी दूसरी बार यहां पहुंचीं। मंदिर पहुंचकर उन्होंने हनुमानजी के दर्शन किए और मौके पर मौजूद लोगों से बातचीत की। साध्वी हर्षानंद गिरि ने इस दौरान कहा कि दो दिन पहले उन्होंने मीडिया के जरिए प्रशासन और सरकार के सामने अपनी बात रखी थी। उनके मुताबिक यह बात सरकार तक पहुंची है और संत समाज भी इस मामले से जुड़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से इस मामले में कुछ और समय मांगा गया है।
दरअसल साध्वी हर्षानंद गिरि ने बताया कि रविवार शाम खड़े हनुमान मंदिर परिसर में ‘सद्बुद्धि हनुमान महायज्ञ’ किया जाएगा। उनके अनुसार, यज्ञ के जरिए हनुमानजी से प्रार्थना की जाएगी कि प्रशासन और सरकार को सद्बुद्धि मिले और प्रतिमा को लेकर कोई ऐसा फैसला न हो जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हों।
लिखित और मौखिक आश्वासन की मांग की
इस दौरान साध्वी हर्षानंद गिरि ने कहा कि अगले 48 घंटे में प्रतिमा को नहीं हटाने का लिखित और मौखिक आश्वासन दिया जाना चाहिए। साध्वी ने यह भी कहा कि अब सिर्फ प्रतिमा को लेकर आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासन और सरकार को यह भी बताना चाहिए कि मंदिर का निर्माण कब तक किया जाएगा। साध्वी ने महायज्ञ में ज्यादा से ज्यादा लोगों से शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि इस आयोजन के जरिए समाज की एकजुटता भी सामने आएगी। शनिवार शाम मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम और हनुमानजी के जयकारे लगाए।
पांचवां प्रयास नहीं होना चाहिए: साध्वी हर्षानंद गिरि
बता दें कि साध्वी हर्षानंद गिरि इससे पहले भी दो दिन पहले खड़े हनुमान मंदिर पहुंची थीं। उस दौरान उन्होंने प्रशासन को 48 घंटे का समय देते हुए विरोध प्रदर्शन और धरना देने की बात कही थी। शनिवार को दोबारा मंदिर पहुंचने पर उन्होंने कहा कि मीडिया के जरिए उठाई गई बात सरकार तक पहुंच चुकी है और संत समाज भी अब इस मामले से जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब उनकी मांग साफ है कि खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को उसी स्थान पर रखा जाए। साथ ही मंदिर निर्माण को लेकर प्रशासन की तरफ से स्पष्ट घोषणा होनी चाहिए। साध्वी ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि मंदिर का निर्माण कितनी जल्दी किया जाएगा और इसकी आगे की स्थिति क्या होगी।
साध्वी हर्षानंद गिरि ने कहा, “हम चाहते हैं कि अब इन्हें यहां से हटाने का पांचवां प्रयास न हो। बल्कि प्रशासन और सरकार यह बताए कि यहां मंदिर का निर्माण कितनी जल्दी होगा।”
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