कचौड़ी, कबाब, नल्ली निहारी... BRICS का 'गाला' डिनर क्यों है खास? ये रही पूरी लिस्ट
राजधानी दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का शंखनाद हो चुका है। भारत मंडप में 12 और 13 सितंबर को दुनिया के दिग्गज नेता कूटनीतिक चर्चाओं के लिए एक मंच पर मौजूद हैं। लेकिन इस बार ब्रिक्स सम्मेलन में सिर्फ बैठकों और समझौतों की बात नहीं हो रही बल्कि भारत की डिनर डिप्लोमेसी पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। डिनर डिप्लोमेसी जिसमें बिना किसी औपचारिक बैठकों और सख्त प्रोटोकॉल के रात के खाने की मेज पर सारे लीडर्स अनौपचारिक बातचीत करते हैं। एक साथ बैठते हैं और आपसी विश्वास बढ़ाने, तनाव कम करने और कई सारे मुद्दों पर खुलकर अपने विचार साझा करते हैं। इस तरह से नेताओं के बीच माहौल को सहज बनाने में मदद मिलती है। रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत तमाम देशों के राष्ट्रध्यक्ष और शाही मेहमानों और विदेशी प्रतिनिधियों के लिए पीएम मोदी की तरफ से डिनर का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भारत की सांस्कृतिक और खान-पान की विविधता को दर्शाने के लिए उत्तर से लेकर दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक के मशहूर व्यंजनों को शामिल किया गया है।
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नई दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस, चीन और ईरान के राष्ट्रपति के साथ ही दुनिया भर के कई देशों के राष्ट्रध्यक्ष और तमाम दूसरे खास मेहमान पहुंचे हुए हैं। इन मेहमानों की खास अंदाज में मेहमान नवाजी की जा रही है। इन मेहमानों को जिन बर्तनों में खाना परोसा जाएगा वह सारे के सारे बर्तन पिंक सिटी कही जाने वाली राजस्थान की राजधानी जयपुर से सप्लाई किए गए हैं। अरुण इंडस्ट्रीज जो कि पूरे देश में जो है एक जाना पहचाना नाम है। उसने इन बर्तनों को सप्लाई किया है। सिल्वर कोटेड यह बर्तन जो है वहां पर पहुंच चुके हैं। उन्हीं में मेहमानों को खाना परोसा जा रहा है। लेकिन उसके कुछ सैंपल यहां जयपुर में हैं। उनकी तस्वीरें आपको दिखा देते हैं कि देखिए कितनी खूबसूरती के साथ इन्हें तैयार किया गया है। इस बात का ध्यान रखा गया है कि इससे जो खास मेहमान हो उनको लुक वाइज देखने में अच्छा लगे। उनको खाने का टेस्ट बेहतर लग सके। उनको कोई नुकसान ना होने पाए और साथ ही साथ रखने और परोसने में भी सुविधाजनक हो।
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तो ज्यादातर यह जो बर्तन हैं आप देख सकते हैं कि सिल्वर कोटेड हैं और खास अलग-अलग डिजाइन में अलग-अलग अंदाज में इन्हें तैयार किया गया है। मेहमानों की थाली में महाराष्ट्र की भाकरवड़ी, राजस्थान की मिनी कचौड़ी, बंगाल की कुचो निमकी, तमिलनाडु का मुरक्कू और कश्मीरी मसालेदार अखरोट जैसे पारंपरिक स्नैक्स शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही बिहार के सत्तू को खास जगह दी गई है। नाश्ते में रागी डोसा, बाजरा, उपमा और मिलेट पोंगल शामिल है। वहीं मेन कोर्ट्स में लखनवी गलौटी कबाब, खमीरी रोटी के साथ नल्ली निहारी, चिकन कोरमा, कश्मीरी पुलाव और हैदराबादी बिरयानी मेहमानों के जायके को यादगार बनाने के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने को बेताब हैं। इतना ही नहीं भारतीय शेख्स ने ट्रेडिशन टू टेबल कांसेप्ट के तहत पारंपरिक रेसिपीज से भी व्यंजनों को सजाया है।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को कहा कि चीन और भारत को अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक नज़रिए से देखना चाहिए और रिश्तों के लंबे समय के विकास को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने राजधानी में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की। पीएम मोदी के साथ बैठक के दौरान शी ने कहा, "चीन-भारत संबंधों का विकास हुआ है, जिसमें दोनों पक्षों ने रणनीतिक नज़रिए से द्विपक्षीय संबंधों के लंबे समय के विकास को ध्यान में रखा है।" शी ने कहा कि भले ही चीन और भारत अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों देश "साझा विकास हासिल करने के लिए एक-दूसरे का समर्थन और मदद" करने में सफल रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति ने कहा नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट में शामिल होकर और आपसे दोबारा मिलकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। भारत में आयोजित ब्रिक्स समिट की सफलता पर मैं आपको बधाई देता हूं।" चीनी राष्ट्रपति ने बताया कि 12 साल में यह उनकी नई दिल्ली की दूसरी यात्रा थी और कहा कि इस दौरान दोनों नेता 20 से ज़्यादा बार मिल चुके हैं, जिससे "कई अहम सहमतियां" बनी हैं।
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दुनिया के सबसे ज़्यादा आबादी वाले देशों और 'ग्लोबल साउथ' के सदस्य के तौर पर दोनों देशों की साझा स्थिति का ज़िक्र करते हुए शी ने कहा कि मानवता के साझा भविष्य के लिए चीन और भारत की अहम ज़िम्मेदारियां हैं। शी ने यह भी कहा कि चीन और भारत एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने दोनों देशों से ब्रिक्स सहयोग को और बेहतर बनाने और उच्च-गुणवत्ता वाले विकास के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "हालांकि दोनों देश अलग-अलग हैं, फिर भी हम साझा विकास हासिल करने के लिए एक-दूसरे का समर्थन और मदद करने में कामयाब रहे हैं।
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चीन और भारत दुनिया के सबसे ज़्यादा आबादी वाले देश हैं और 'ग्लोबल साउथ' का हिस्सा हैं। हमारी अहम ज़िम्मेदारियां हैं, क्योंकि मानवता का भविष्य साझा है। हमें लोगों को केंद्र में रखकर उच्च-गुणवत्ता वाले सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए और एक ऐसी दुनिया बनाने की कोशिश करनी चाहिए जो ज़्यादा न्यायपूर्ण, समावेशी, खुली और आर्थिक रूप से जुड़ी हुई हो, और जो दुनिया में शांति, स्थिरता और विकास में सकारात्मक योगदान दे सके।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय बैठक के दौरान, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के समय चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए उनका आभार जताया।
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