'ग्लोबल साउथ के देशों में निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए', PM मोदी ने ब्रिक्स देशों का रोडमैप तैयार किया
दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने BRICS की कार्यशैली में बड़े बदलाव की नीव रख दी है. इस पर बाकी देशों ने भी सहमति जताई है. ब्रिक्स देशों ने ग्लोबल स्तर पर सभी देशों के समान प्रतिबद्धता और डिसीजन मेकिंग में अहम भागीदारी पर जोर दिया.
ब्रिक्स देशों का रोडमैप को रखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों में निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए. अभी ग्लोबल पावर एक पिरामिड की तरह काम कर रहा है. यहां पर ऊपरी भाग वाले ही कुछ देश दुनिया पर फैसला ले रहे हैं. वहीं बाकी देश इसे भुगत रहे हैं. ब्रिक्स देशों ने जंग और टकराव को लेकर चिंता व्यक्त की है. इसके साथ ही BRICS ने वैश्विक मामलों पर इस तरह के तरीकों को अपनाने को कहा, जिसमें सभी देशों को समान अधिकार मिलना जरूरी है. वे ग्लोबल डिसीजन मेकिंग में अहम भूमिका को निभा सकें. इसेक साथ उनके हितों का सम्मान जरूरी है.
Explainer: फिल्म से निकालने के बाद एक्टर के शूट हुए फुटेज का क्या होता है, क्या मेकर्स डिलीट कर देते हैं पूरा सीन?
Film Actor Replaced Shoot: आपने खबरों में कई देखा होगा कि किसी एक्टर या एक्ट्रेस को फिल्म से बाहर कर दिया गया है, लेकिन क्या आपने सोचा है कि उनके शूट किए फुटेज का क्या होता है, यह सवाल अक्सर दर्शकों के मन में आता है. स्क्रीन पर हम फाइनल कट देखते हैं. लेकिन उसके पीछे की कहानी नहीं जानते हैं कि पर्दे पर दिखाई दे रहे कलाकार का सेलेक्शन या उसकी शूटिंग कैसे हुई है. ऐसे में अगर कोई एक्टर शूटिंग पूरी होने से पहले या कभी-कभी शूटिंग के बाद प्रोजेक्ट से बाहर हो जाए, तो मेकर्स के सामने बड़ा फैसला होता है कि पुराने सीन रखे जाएं या नहीं. असल में इसका कोई तयशुदा नियम नहीं है. इसका फैसला स्टोरी, किरदार, शूट किए गए हिस्से और प्रोडक्शन की जरूरत के हिसाब से लिया जाता है.
शूट किया गया हर सीन फिल्म में नहीं रखा जाता
फिल्म की शूटिंग के दौरान एक ही सीन के कई टेक रिकॉर्ड किए जाते हैं. इसके अलावा कैमरे से अलग-अलग एंगल से शूट किया जाता है. इसमें कलाकार के क्लोजअप लिए जाते हैं और अलग-अलग रिएक्शन भी शूट होते हैं. इनमें से काफी फुटेज फाइनल कट में भी शामिल नहीं होते हैं. इसलिए किसी एक्टर का सीन फिल्म में नजर नहीं आया तो इसका मतलब यह नहीं कि फुटेज तुंरत डिलीट कर दिया जाता है. एडिटिंग टीम तय करती है कि उनके पास कौन-कौन से सीन्स हैं. इसके बाद तय किया जाता है कि एडिटिंग में क्या शामिल किया जाएगा क्या नहीं. कई बार अच्छा शूट किया गया सीन भी अंतिम कट से बाहर हो जाता है, क्योंकि फिल्म लंबी हो रही होती है या कहानी की रफ्तार बनाए रखने के लिए उसे हटाना पड़ता है. इसी तरह किसी किरदार का पूरा ट्रैक भी बदला जा सकता है.
पुराना फुटेज रखे जाते हैं संभालकर
शूटिंग के दौरान रिकॉर्ड हुआ फुटेज प्रोडक्शन के लिए जरूरी होता है. इसमें कोई दोराय नहीं है. डिजिटल फिल्मों में कैमरा फुटेज को स्टोरेज और बैकअप सिस्टम में सेफ करके रखा जाता है. एडिटिंग के दौरान अलग-अलग टेक और फाइलों को संभालकर रख लिया जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर कोई शॉट फिर खोजा जा सके.
रीशूट भी किया जाता है.
एडिटिंग के दौरान सबसे बड़ा बदलाव तब आता है जब बाहर हुए एक्टर को किरदार फिल्म में रखना जरूरी हो. अगर मेकर्स उसी किरदार को फिल्म में बनाए रखना चाहते हैं, तो इसके लिए नए एक्टर को कास्ट कर लिया जाता है. इसके बाद पुराने एक्टर के सीन को रीशूट किया जाता है. यहां भी पूरी फिल्म दोबारा शूट करना जरूरी नहीं होता. सिर्फ उन्हीं सीन्स को ही रीशूट किया जाता है तो जहां उस किरदार की जरूरत होती है. अगर पुराने सीन दूसरे किरदारों के साथ जुड़े हुए हैं, तो उनके कुछ हिस्से भी दोबारा रिकॉर्ड करने पड़ सकते हैं, ताकि चेहरे, कपड़े, लोकेशन, लाइटिंग और स्टोरी में कंटिन्यूटी दिखाई दे. यही वजह है कि एक्टर बदलने के बाद रीशूट कई बार प्रोडक्शन के लिए महंगा होता है. जिसके लिए पुराने सेट को दोबारा लगाना पड़ जाता है, जिससे कई तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है.
कभी सिर्फ कुछ शॉट्स दोबारा बनाने पड़ते हैं
हर बार बदलाव के लिए पूरे सीन को दोबारा शूट करने की जरूर नहीं पड़ती है. अगर कहानी का ज्यादातर हिस्सा सही है और सिर्फ कुछ शॉट्स में बदलाव की जरूरत है तो मेकर्स उसी हिस्से को रीशूट करते हैं. इसे आम तौर पर पिकअप शॉट्स कहते हैं. इनमें किसी क्लोजअप, रिएक्शन, हाथ या दूसरे छोटे हिस्से को बाद में शूट किया जा सकता है. मान लीजिए किसी सीन में नया एक्टर सिर्फ कुछ समय के लिए ही दिखाई दे रहा है. ऐसे में पूरे सीन को फिर से तैयार करने की जगह जरूरी एंगल और कनेक्टिंग शॉट्स दोबारा लिए जा सकते हैं. इसके बाद बाकी का काम एडिटिंग टेबल पर किया जाता है.
एक्टर को रिप्लेस करने के लिए किया जाता है वीएफएक्स का यूज
आज के समय में टेक्नोलॉजी काफी बढ़ गई है. कई बार किसी एक्टर को फिल्म से रिप्लेस करने के लिए डिजिटल टूल्स का भी सहारा लिया जाता है. हालांकि, यह काम उतना आसान नहीं है, जितना इसे समझा जाता है. वीएफएक्स टीम को फ्रेम में मौजूद किरदार, कैमरा मूवमेंट, रोशनी, बैकग्राउंड और दूसरे कलाकारों की हरकतों को ध्यान से मिलान करना पड़ता है. ऐसे में अगर कैमरा लगातार घूम रहा हो या एक्टर दूसरे कलाकारों के साथ बहुत ज्यादा इंटरैक्ट कर रहा हो, उससे परेशान खड़ी होने की संभावना रहती है. इसलिए वीएफएक्स हर फिल्म के लिए सबसे आसान या सबसे सस्ता ऑप्शन नहीं है. इसलिए कई बार रीशूट ज्यादा सही रहता है.
फिल्म ऑल द मनी इन द वर्ल्ड में किया गया था एक्टर रिप्लेस
एक्टर रिप्लेस का सबसे बड़ा उदाहरण ऑल द मनी इन द वर्ल्ड में मिलता है. फिल्म में केविन स्पेसी के शूट किए हिस्से को हटा दिया गया था. उनके बदले क्रिस्टोफर प्लमर के साथ दोबारा शूटिंग की गई थी. यह मामला इसलिए खास था क्योंकि बदलाव प्रोडक्शन केकाम के दौरान करना पड़ा था. जिससे कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा. ऐसे में समझा जा सकता है कि किसी बड़े एक्टर को बदलने के बाद भी पूरी फिल्म खत्म नहीं होती है, इसके लिए मेकर्स दूसरा रास्ता निकालते हैं.
बॉलीवुड में भी किए जाता है रिप्लेसमेंट
बॉलीवुड फिल्मों में कई बार देखने को मिल चुका है, जब किसी कलाकार को रिप्लेस किया गया. इसका उदारण फितूर में देखने को मिला था. जब रेखा की जगह तब्बू को लिया गया था और उनके हिस्से को रीशूट किया गया. इसके अलावा चलते चलते में ऐश्वर्या राय के जाने के बाद रानी मुखर्जी को लिया गया था. ऐसे में आपके मन एक और सवाल आ रहा होगा कि जब किसी एक्टर या एक्ट्रेस को किसी फिल्म से रिप्लेस कर दिया जाता है तो क्या उसे उसकी फीस दी जाती है या नहीं, अगर फीस पहले ही दे दी गई थी तो क्या मेकर्स वापस लेते हैं. आपको साफ-साफ बता दें कि ये सब चीजें कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर करती हैं.
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