Responsive Scrollable Menu

Mallikarjun Kharge का Gujarat जल संकट पर BJP पर हमला, CAG रिपोर्ट का दिया हवाला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुजरात में पेयजल की स्थिति को लेकर शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “हर घर जल” के दावे दूषित पानी में बह गए हैं। खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि गुजरात में 10 में से करीब नौ नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान शुरू की गई ‘सुजलाम-सुफलाम’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2004 में इसका जोर-शोर से प्रचार किया गया था, लेकिन आज भी राज्य के कई हिस्सों में लोग पानी के लिए परेशान हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद इसी तरह के दावों को ‘जल जीवन मिशन’ के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। उन्होंने दावा किया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने वर्ष 2022 में गुजरात में 100 प्रतिशत नल कनेक्शन के किए गए दावे पर सवाल उठाए हैं और करीब 14 लाख घर अब भी पानी का इंतजार कर रहे हैं। खरगे ने अहमदाबाद जिले के धोलका में दूषित पानी पीने के कारण 54 लोगों की कैंसर से मौत होने संबंधी हालिया खबर का भी हवाला दिया।

उन्होंने सौराष्ट्र के राजकोट और जामनगर तथा कच्छ-सौराष्ट्र के अन्य इलाकों में पेयजल संकट और किसानों के सूखे से जूझने का दावा किया। खरगे ने कहा कि गुजरात की जनता को 2047 तक ‘विकसित भारत’ का सपना दिखाया जा रहा है, लेकिन भाजपा के करीब 28 वर्षों के शासन में ‘‘झूठा प्रचार’’ और ‘‘नकली रंगीन तस्वीरें’’ दिखाकर लोगों की आंखों में धूल झोंकी गई। कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘सुजलाम-सुफलाम’ नाम पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘भाजपा राज में न तो ‘सुजलाम’ यानी शुद्ध पानी है और न ही ‘सुफलाम’ यानी भरपूर उपज और फसल है।

Continue reading on the app

Akash Anand और ईशान को नहीं मिलेगा पद, मायावती ने BSP में लिया कड़ा संकल्प, सिर्फ भतीजी दीपिका आनंद को ही एंट्री का हक

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है। उन्होंने कहा है कि उनके दोनों भतीजों, आकाश और ईशान, को पार्टी में कोई राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा। भविष्य में भी उनके बच्चों को कोई पद नहीं दिया जाएगा। अगर उनके भाई आनंद कुमार को मदद के लिए पार्टी के किसी सदस्य की ज़रूरत पड़ती है, तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं। दीपिका अभी लॉ की पढ़ाई कर रही हैं। भविष्य में उनकी ईमानदारी, लगन और काबिलियत के आधार पर उन्हें पार्टी में कोई ज़िम्मेदारी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि कांशी राम की तरह वह भी परिवारवाद की राजनीति का कड़ा विरोध करती रहेंगी।

इसे भी पढ़ें: Ambedkarwadi बनने का दिखावा क्यों? Mayawati का विपक्ष पर निशाना, बोलीं: दिल-दिमाग साफ करो

उन्होंने आगे कहा कि इस क्रम में, सड़क, बिजली पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बंधी लोगों की अहम ज़रूरतों के साथ ही सरकारी नौकरी, रोज़गार, स्कूल, अस्पताल, शहरी व ग्रामीण विकास आदि के साथ ही ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ की भी बुनियादी ज़रूरतों पर मज़बूत इच्छाशक्ति के साथ कार्य किया गया और जिस क्रम में अनेकों स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, छात्रावास, ट्रेनिंग सेन्टर व पार्क आदि की स्थापना की गयी और इन प्रयासों के कारण लोगों का मजबूरी का पलायन होना भी काफी रूका हैै, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता है, किन्तु विरोधी पार्टियों के घोर जातिवादी रवैयों के कारण   बी.एस.पी. की सरकार सन 2012 में पाँचवी बार यहाँ सत्ता में नहीं आ सकी, जिसका पछतावा सर्वसमाज के लोगों को अभी तक भी है, क्योंकि बी.एस.पी. सरकार के जाने के बाद से यहाँ पूरे प्रदेश में क़ानून द्वारा क़ानून का राज कायम नहीं होने से लोगों का जीवन दुखी ही नहीं बल्कि काफी त्रस्त भी बना हुआ है तथा विकास का सरकारी ढिंढोरा लोगों का पेट भी सही से नहीं भर पा रहा है।

बसपा प्रमुख ने कहा कि ऐसे में पार्टी के लोगों को फिर से यह कहना है कि वे बीएसपी का उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे लोगों को ही चुनें तथा युवा वर्ग को भी प्राथमिकता दें जिसमें महिला व पुरुष दोनों होने चाहिये, तो यह उचित होगा। इसके साथ ही, यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी. द्वारा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के जिस कारवाँ को लगातार मज़बूत करने व आगे बढ़ाकर सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके ’अपना उद्धार स्वंय करने योग्य’ बनाने के मिशन की बात है तो इसकी सफलता हेतु किसी का भी रोड़ा बनना मुझे कतई भी स्वीकार नहीं है अर्थात मुझे केवल अपने ’बहुजन समाज परिवार’ के हित, कल्याण व उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने की ही रात-दिन चिन्ता रहती है, अपने किसी भी सगे भाई-बहन व उनके परिवार के युवा सदस्यों, तथा नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को भी मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह मैंने भी, उन्हें पार्टी के कार्यों तक सीमित करके उन्हें सांसदी, विधायकी, मंत्री पद व अन्य किसी भी राजनैतिक लाभ आदि के पदों से हमेशा दूर रखा है।

उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि मेरे अविवाहित होने के नाते मुझे मजबूरी में, अपने सभी सगे भाई-बहनों में से किसी एक को और अन्ततः सबसे छोटे भाई श्री आनन्द कुमार को अपने साथ रखने की भी ज़रूरत पड़ी है जो यह मेरी देखभाल करने के साथ-साथ मेरी पूरी निगरानी में पार्टी की अहम ज़िम्मेदारियों को भी काफी लम्बे समय से निभा रहे हैं, लेकिन इसका लाभ अब उनके परिवार के लोग भी उठायें तो यह पार्टी व मूवमेन्ट के हित में सही नहीं होगा। इसीलिए आज मेरा अन्तिम यही फैसला व प्रतिज्ञा भी है कि इसके एवज में, अब इनके ख़ासकर किसी भी बेटे को बी.एस.पी. में किसी भी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जायेगा। यदि आगे चलकर मेरे साथ रहते हुये श्री आनन्द कुमार को मेरी मदद के लिए किसी और सदस्य की भी ज़रूरत पड़ती है तो फिर वह वर्तमान राजनैतिक हालात में केवल अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनन्द को, जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही है, उसे आगे चलकर उसकी मदद ले सकते हैं और फिर उसकी ईमानदारी, वफादारी व कार्य क्षमता आदि को देखकर पार्टी में उसे ज़रूरतानुसार अपनी ख़ुद की ज़िम्मेवारी भी सौंप सकते हैं।

उन्होंने कहा कि लेकिन वे अपने दोनों बेटों को व आगे चलकर उनके युवा बच्चो में से किसी को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौपेंगे। साथ ही, यह भी कहना है कि अपनी बेटी के तैयार नहीं होने पर फिर वे पार्टी की आम सहमति से केवल पार्टी के दलित वर्ग में से ही अन्य किसी मिशनरी कार्यकर्ता को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी सौंप सकते हैं अर्थात् अपने किसी भी बेटे को व उनके बच्चों के बड़े होने पर उन्हें भी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौंपेंगे। यही वर्तमान में समय की जरुरत है व पार्टी के हित में भी है।  ताकि मान्यवर श्री कांशीराम जी जिस प्रकार से ’परिवारवाद’ आदि के विरुद्ध कायम रहे, उनकी शिष्या होने के नाते मैं भी उसी प्रकार से पूरी तरह डटी हूँ , और जैसाकि मैंने काफी कुछ इस पर अमल करके भी दिखाया है और यदि मैं लड़की नहीं होती, तो मैं फिर मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही अपने भाई-बहिनों आदि में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखती। लेकिन मैं लड़की होने की वजह से अपनी सुरक्षा सम्बन्धी, हर परेशानी से मुक्त होकर व पूरे मान-सम्मान के साथ पार्टी में आगे बढ़ती रहूँ तभी मुझे अपने सबसे छोटे भाई श्री आनन्द कुमार को मजबूरी में अपने साथ रखना पड़ा है। और अब इनके बच्चों के बड़े व शादीशुदा होने पर काफी कुछ मुझे भी झेलना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी मैं किसी के भी मोह आदि के चक्कर में ना पड़कर पार्टी को कोई भी नुकसान नहीं पहुचने दूँगी।

इसे भी पढ़ें: Mayawati ने SP पर कसा तंज, नीला रंग अपनाने से सोच नहीं बदलने वाली

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार पार्टी संगठन में व आगे सरकार बनने पर भी, चाहे वह कोई भी हो, केवल सम्बन्धित उसी एक व्यक्ति को ही मौक़ा दिया जायेगा, लेकिन उसकी आड़ में उसके  परिवार के अन्य किसी भी सदस्य को कोई भी लाभ आदि नहीं दिया जायेगा, ताकि बी.एस.पी. अब आगे परिवारवाद से मुक्त रहे तथा सर्वसमाज में से ज़्यादा से ज़्यादा लोग ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ आन्दोलन के सहभागी बन सकें, जो कि अम्बेडकरवादी राजनीति के लिये बहुत ज़रूरी है। इसके साथ ही बी.एस.पी. के लोगों से यह भी कहना है कि वे बी.एस.पी. विरोधी पार्टियों/संगठनों तथा जातिवादी मीडिया व सोशल मीडिया आदि के भी विषैले एवं साज़िशी तथा प्रायोजित व पेड paid प्रोपेगण्डा आदि से ज़रूर सावधान रहें क्योंकि इनका मक़सद केवल साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के घिनौने हथकण्डे अपनाकर बी.एस.पी. को यूपी में सरकार बनाने से रोकना है, जिसे किसी भी हाल में सफल नहीं होने देना है और इन्हें पूरे तन, मन, धन से लगातार अपने अम्बेडकरवादी मिशन में लगे रहना है, इसी में ही सबकी भलाई है यानी कि व्यापक देश व जनहित निहित है।  

उन्होंने कहा कि अन्त में यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया आदि में यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि अनुशासनहीनता अपनाने व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने आदि के कारण बी.एस.पी से निष्कासित लोगों को वापस लिया जायेगा, यह पूरी तरह से ग़लत एवं मिथ्या प्रचार है यानी कि यह फेक न्यूज़ है अर्थात ऐसे लोगों को बी.एस.पी में कतई भी वापस नहीं लियाा जायेगा।

Continue reading on the app

  Sports

Success Story: सड़क हादसे में खोया दायां हाथ, फिर भी नहीं हारी हिम्मत, 13 साल की केसर ने 6 मेडल जीत रचा इतिहास

Shooter Kesar Parikh Success Story: राजस्थान की 13 वर्षीय निशानेबाज केसर पारिक ने अपनी मेहनत और जज्बे से बड़ी उपलब्धि हासिल की है. बचपन में सड़क हादसे में दायां हाथ गंवाने के बावजूद केसर ने हौसला नहीं खोया और शूटिंग को अपना जुनून बना लिया. महज 6 से 8 महीने पहले शूटिंग शुरू करने वाली केसर ने देहरादून में आयोजित 45वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 गोल्ड और 1 सिल्वर समेत 6 मेडल जीते. जयपुर की एकलव्य स्पोर्ट्स शूटिंग एकेडमी में वह रोजाना 6 से 8 घंटे ट्रेनिंग करती हैं. उनके कोच योगेश शेखावत के मार्गदर्शन में केसर तकनीक, शरीर का संतुलन और मानसिक मजबूती पर लगातार काम कर रही हैं. योगेश शेखावत पैरा शूटिंग से जुड़े हैं और उनके मार्गदर्शन में मोना अग्रवाल ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. केसर की सफलता साबित करती है कि शारीरिक चुनौती सपनों की राह रोक नहीं सकती. Sun, 13 Sep 2026 06:08:08 +0530

  Videos
See all

BRICS Viral Moment: मलेशिया के PM ने गाए भारतीय फिल्मों के गाने! #viralvideo #bharatmandapam #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-13T02:04:50+00:00

BRICS Gala Dinner 2026: भारत मंडपम में PM Modi का शाही डिनर! पहुंचे Putin, देखिए तस्वीरें #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-13T02:05:39+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers