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पूजा में दीपक की लौ को हाथ से माथे तक क्यों लगाते हैं? जानें आरती के बाद की इस परंपरा का महत्व
Aarti deepak religious significance: हिंदू धर्म में पूजा के बाद आरती करने की परंपरा है। आरती के दौरान जलते हुए दीपक या आरती की लौ को भगवान के सामने घुमाया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु दोनों हाथों को लौ के ऊपर ले जाकर माथे से लगाते हैं।
यह परंपरा मंदिरों के साथ-साथ कई घरों में भी देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे भगवान के आशीर्वाद को स्वीकार करने की भावना से जोड़ा जाता है।
दीपक की लौ को क्यों माना जाता है पवित्र?
हिंदू धर्म में अग्नि को पवित्र माना गया है। पूजा में दीपक जलाना भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। दीपक की रोशनी को अज्ञानता दूर करने और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक माना जाता है।
इसी वजह से पूजा के दौरान दीपक जलाने और आरती करने को विशेष महत्व दिया जाता है।
हाथ से माथे तक लगाने का क्या अर्थ है?
आरती के बाद भक्त लौ के ऊपर हाथ रखकर उसे अपने माथे तक ले जाते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे ईश्वर की कृपा और सकारात्मक ऊर्जा को स्वीकार करने का प्रतीक माना जाता है।
भक्त इस दौरान भगवान का स्मरण करते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।
आरती के समय दीपक क्यों घुमाया जाता है?
आरती में दीपक या लौ को भगवान की प्रतिमा के सामने विशेष तरीके से घुमाया जाता है। यह भक्त की ओर से ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने की एक पारंपरिक विधि मानी जाती है।
अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में आरती करने की विधि और क्रम में अंतर हो सकता है।
क्या दीपक की लौ को माथे से लगाना जरूरी है?
यह धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी प्रक्रिया है। इसे सभी पूजा पद्धतियों में अनिवार्य नियम नहीं माना जा सकता। कुछ लोग आरती के बाद हाथ जोड़कर भगवान का स्मरण करते हैं, जबकि कई लोग परंपरा के अनुसार दीपक की लौ से हाथ गर्म करके माथे से लगाते हैं।
दीपक से जुड़ी है प्रकाश और सकारात्मकता की मान्यता
धार्मिक परंपराओं में दीपक को प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान दीपक जलाने का भाव अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने और शुभता की कामना से जोड़ा जाता है।
इसी वजह से दीपक भारतीय धार्मिक अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
आज भी घर-घर में निभाई जाती है यह परंपरा
मंदिरों में दर्शन के दौरान हो या घर की शाम की आरती में, आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आरती के बाद दीपक की लौ को हाथ से माथे तक लगाते हैं। यह छोटी-सी प्रक्रिया भक्त और भगवान के बीच श्रद्धा और आस्था के भाव को दर्शाती है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और परिवारों में पूजा और आरती की विधि अलग हो सकती है। इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
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