उत्तर कोरिया ने समुद्र में दागी बैलिस्टिक मिसाइलें, US-दक्षिण कोरिया और जापान के सैन्य अभ्यास के बाद दिखाई ताकत
North Korea Ballistic Missile: उत्तर कोरिया आए दिन दुनिया को अपनी ताकत का दिखाता रहता है. उत्तर कोरिया ने एक बार फिर से समुद्र में बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर अपने पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया को अपनी ताकत का एहसास कराया. उत्तर कोरिया ने ये मिसाइलें ऐसे समय में दागीं जब कुछ घंटे पहले ही अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान का पांच दिवसीय सैन्य अभ्यास समाप्त हुआ.
सैन्य अभ्यास खत्म होने के कुछ घंटों पर दागी मिसाइलें
बता दें कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने पांच दिनों तक सैन्य अभ्यास किया. इस सैन्य अभ्यास के खत्म होने के कुछ घंटों बाद, शनिवार को उत्तर कोरिया ने समुद्र की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. ये मिसाइलें ऐसे समय में दागी गईं जब तीनों देशों की संयुक्त मिलिट्री गतिविधियों के खिलाफ प्योंगयांग के कड़े विरोध के कारण तनाव बढ़ा हुआ है; प्योंगयांग इन गतिविधियों को अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है. दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि उसने उत्तर कोरिया के पूर्वी तट पर वॉनसन इलाके से कई मिसाइलें दागे जाने का पता लगाया. इन मिसाइलों को समुद्र की ओर दागा गया, जिसके बाद सियोल में अधिकारियों ने तुरंत निगरानी और मॉनिटरिंग बढ़ा दी.
दक्षिण कोरिया का फिर बढ़ी चिंता
इसके साथ ही दक्षिण कोरियाई सेना ने कहा कि वह अमेरिका और जापान के साथ मिलकर काम कर रही है और मिसाइल लॉन्च के बारे में जानकारी साझा कर रही है. बता दें कि इन ताजा घटनाओं ने एक बार फिर उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों के साथ-साथ वॉशिंगटन, सियोल और टोक्यो के बीच सैन्य सहयोग से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं.
South Korea says North Korea has launched a projectile toward the waters off the North's east coast, reports AP. pic.twitter.com/B0mxXgn6gG
— Press Trust of India (@PTI_News) September 12, 2026
अमेरिका ने किया किसी भी खतरे से इनकार
हालांकि उत्तर कोरिया के इस मिसाइल शक्ति परीक्षण को लेकर अमेरिका का कहना है कि लॉन्च से कोई तत्काल खतरा नहीं है. अमेरिकी पैसिफिक कमांड ने कहा कि उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल लॉन्च से अमेरिकी क्षेत्र या इस इलाके में उसके सहयोगियों को कोई तत्काल खतरा नहीं है. कमांड ने दोहराया कि अमेरिका अपने देश के साथ-साथ इस इलाके में अपने सहयोगियों और साझेदारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. यह आकलन तब सामने आया जब मिसाइल लॉन्च के बाद दक्षिण कोरिया और अमेरिका स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं.
उत्तर कोरिया ने दी थी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
बता दें कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच पांच दिन तक चले 'फ्रीडम एज' सैन्य अभ्यास के खत्म होने के बाद उत्तर कोरिया ने ये मिसाइल लॉन्च किए गए. दक्षिण कोरिया ने इन सैन्य अभ्यासों को बचाव के मकसद से किया गया बताया है और कहा है कि इनका मकसद उत्तर कोरिया से संभावित परमाणु खतरों का मिलकर सामना करने की तीनों देशों की क्षमता को बेहतर बनाना है.
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फिर बढ़ सकता है क्षेत्र में तनाव
हालांकि, प्योंगयांग ने बार-बार इस तरह के मिलिट्री सहयोग को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा माना है. सोमवार को शुरू हुए इस नए अभ्यास के कुछ ही घंटों बाद, उत्तर कोरिया के रक्षा मंत्री किम सोंग गी ने इन अभ्यासों की आलोचना की और चेतावनी जारी की. उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने कहा कि उत्तर कोरिया "ताकत के दम पर कड़े और करारे जवाबी कदम" उठाने में सक्षम है. आज सुबह किए गए मिसाइल लॉन्च के बाद इस क्षेत्र में एक बार फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है.
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BRICS Summit 2026: 7 साल बाद आज दिल्ली पहुंचेंगे शी जिनपिंग, BRICS सम्मेलन में मोदी के साथ होगी अहम बैठक
BRICS Summit 2026: आज का दिन वैश्विक कूटनीति और भारत के रणनीतिक कद के लिहाज से एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होने जा रहा है. राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के अत्याधुनिक भारत मंडपम में दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का औपचारिक आगाज हो रहा है, जिसमें दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष नेता शिरकत कर रहे हैं. इस वैश्विक महाकुंभ में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक दिन पहले ही नई दिल्ली पहुंच चुके हैं, जिससे इस कूटनीतिक मंच की महत्ता और अधिक बढ़ गई है.
सात साल बाद भारत आ रहे हैं शी चिनफिंग
इस सम्मेलन का सबसे बड़ा और कूटनीतिक रूप से सबसे चर्चित आकर्षण चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा है. वर्ष 2019 के बाद यह पहला मौका है जब चीनी राष्ट्रपति विशेष विमान से दिल्ली के पालम एयरफोर्स स्टेशन पर उतर रहे हैं. उनके इस दौरे को दोनों देशों के बीच पिछले कई वर्षों से जमे कूटनीतिक रिश्तों के मोर्चे पर बर्फ पिघलाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है. ब्रिक्स की औपचारिक बैठकों से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं.
बीजिंग का सकारात्मक संदेश और रणनीतिक परिप्रेक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले चीन की ओर से रिश्तों को लेकर एक स्पष्ट और सकारात्मक संदेश सामने आया है. बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर यह रुख अपनाया है कि दोनों एशियाई दिग्गजों को अपने आपसी मतभेदों को किनारे रखकर या उन्हें सुलझाते हुए संबंधों को एक रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिये से आगे बढ़ाना चाहिए. चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से यह भी रेखांकित किया गया है कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच लगातार तीसरे साल यह मुलाकात हो रही है, जिससे कूटनीतिक संवाद की निरंतरता का पता चलता है. इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात कजान और तियानजिन जैसे शहरों में हो चुकी है.
ग्लोबल साउथ के विकास और आपसी साझेदारी पर जोर
चीनी पक्ष की ओर से यह इच्छा जताई गई है कि दोनों देश अपने शीर्ष नेतृत्व के रणनीतिक निर्देशों को धरातल पर उतारें, आपसी संवाद को और अधिक प्रगाढ़ करें तथा मतभेदों को परिपक्वता के साथ सही तरीके से संभालें. बीजिंग ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि भारत और चीन को महज पड़ोसी होने के बजाय एक-दूसरे की आर्थिक और रणनीतिक सफलता में साझीदार की भूमिका निभानी चाहिए. इसके साथ ही, चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ ने भी ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों के माध्यम से ग्लोबल साउथ के देशों के बीच आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है, जो विकासशील दुनिया के भविष्य के लिए बेहद अहम है.
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