BRICS Summit 2026: 7 साल बाद आज दिल्ली पहुंचेंगे शी जिनपिंग, BRICS सम्मेलन में मोदी के साथ होगी अहम बैठक
BRICS Summit 2026: आज का दिन वैश्विक कूटनीति और भारत के रणनीतिक कद के लिहाज से एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होने जा रहा है. राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के अत्याधुनिक भारत मंडपम में दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का औपचारिक आगाज हो रहा है, जिसमें दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष नेता शिरकत कर रहे हैं. इस वैश्विक महाकुंभ में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक दिन पहले ही नई दिल्ली पहुंच चुके हैं, जिससे इस कूटनीतिक मंच की महत्ता और अधिक बढ़ गई है.
सात साल बाद भारत आ रहे हैं शी चिनफिंग
इस सम्मेलन का सबसे बड़ा और कूटनीतिक रूप से सबसे चर्चित आकर्षण चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा है. वर्ष 2019 के बाद यह पहला मौका है जब चीनी राष्ट्रपति विशेष विमान से दिल्ली के पालम एयरफोर्स स्टेशन पर उतर रहे हैं. उनके इस दौरे को दोनों देशों के बीच पिछले कई वर्षों से जमे कूटनीतिक रिश्तों के मोर्चे पर बर्फ पिघलाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है. ब्रिक्स की औपचारिक बैठकों से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं.
बीजिंग का सकारात्मक संदेश और रणनीतिक परिप्रेक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले चीन की ओर से रिश्तों को लेकर एक स्पष्ट और सकारात्मक संदेश सामने आया है. बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर यह रुख अपनाया है कि दोनों एशियाई दिग्गजों को अपने आपसी मतभेदों को किनारे रखकर या उन्हें सुलझाते हुए संबंधों को एक रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिये से आगे बढ़ाना चाहिए. चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से यह भी रेखांकित किया गया है कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच लगातार तीसरे साल यह मुलाकात हो रही है, जिससे कूटनीतिक संवाद की निरंतरता का पता चलता है. इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात कजान और तियानजिन जैसे शहरों में हो चुकी है.
ग्लोबल साउथ के विकास और आपसी साझेदारी पर जोर
चीनी पक्ष की ओर से यह इच्छा जताई गई है कि दोनों देश अपने शीर्ष नेतृत्व के रणनीतिक निर्देशों को धरातल पर उतारें, आपसी संवाद को और अधिक प्रगाढ़ करें तथा मतभेदों को परिपक्वता के साथ सही तरीके से संभालें. बीजिंग ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि भारत और चीन को महज पड़ोसी होने के बजाय एक-दूसरे की आर्थिक और रणनीतिक सफलता में साझीदार की भूमिका निभानी चाहिए. इसके साथ ही, चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ ने भी ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों के माध्यम से ग्लोबल साउथ के देशों के बीच आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है, जो विकासशील दुनिया के भविष्य के लिए बेहद अहम है.
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सऊदी अरब ने बंद की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन, रियाद और मदीना में हमलों के बाद उठाया कदम
Saudi Arabia: सऊदी अरब के अपनी ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को बंद कर दिया है. सऊरी ऊर्जा मंत्रालय ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी दी. मंत्रालय ने कहा कि एक दिन पहले हुए हमले के बाद उसने देश भर में फैली एक बड़ी तेल पाइपलाइन को बंद कर दिया है. हालांकि, बयान में यह नहीं बताया गया कि हमले किसने किए. लेकिन ऊर्जा मंत्रालय ने ये जरूर कहा कि पाइपलाइन को बंद करने का फैसला एहतियाती तौर पर लिया गया है.
गुरुवार को हुआ था पाइपलाइन पर हमला
ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार (10 सितंबर, 2026) सुबह रियाद और मदीना इलाकों में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर कई हमले हुए. एहतियात के तौर पर पाइपलाइन को बंद कर दिया गया. इन हमलों में कई लोग घायल हुए और प्रभावित लोगों को मेडिकल मदद दी गई. सूत्रों ने बताया कि हमलों के तुरंत बाद इमरजेंसी और स्पेशलाइज़्ड टेक्निकल टीमें हरकत में आ गईं. उन्होंने संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर, मंजूरशुदा सुरक्षा प्रक्रियाओं और इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्लान के अनुसार पाइपलाइन को सुरक्षित करने और उसकी सुरक्षा का आकलन करने के लिए जरूरी कदम उठाए.
1980 के दशक में बनाई गई थी ये पाइपलाइन
बता दें कि 1980 के दशक में बनाई गई ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ने सऊदी अरब के लिए तेल का निर्यात जारी रखने में अहम भूमिका निभाई है, खासकर तब जब ईरान की अमेरिका और इजरायल के साथ लड़ाई के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया. यह शटडाउन ऐसे समय में हुआ है जब यमन में हूथी विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास तटीय इलाके पर कब्जा कर लिया है, जिससे एक अहम शिपिंग रूट से सऊदी तेल निर्यात पर खतरा पैदा हो गया है.
पेरिम द्वीप पर हूती लड़ाकों ने किया कब्जा
बता दें कि इससे पहले यमन में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास पेरिम द्वीप पर ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने कब्जा कर लिया. ऐसा माना जा रहा है कि पेरिम द्वीप पर कब्जे के बाद अब हूती लड़ाके दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक बाब-अल-मंदेब से भी आवागमन को बाधित कर सकते हैं. बता दें कि पेरिम द्वीप पर हूती का कब्जा सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका है, हालांकि ईरान ने इसके लिए हूती लड़ाकों की तारीफ की थी.
बता दें कि लाल सागर से गुजरने पर लगी रोक के चलते दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब की आपूर्ति घटकर बीते 30 सालों के सबसे निचले स्तर पर आ गई है. वहीं ईरान ने सऊदी अरब और हूती के बीच वार्ता पर जोर दिया है. ईरान ने कहा है कि सऊदी अरब के निर्यात के लिए लाल सागर का जलमार्ग खुलना चाहिए. बता दें कि पेरिम द्वीप पर हूतियों के कब्जे से अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध में ईरान का पलड़ा थोड़ा भारी हो गया है.
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अमेरिका ने सऊदी अरब को दिया झटका
बता दें कि हूती विद्रोहियों की बढ़ती आक्रामकता और उसके बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के नजदीक पहुंचने से सऊदी अरब की चिंता बढ़ गई. जिसके चलते सऊदी युवराज मुहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और उनसे सैन्य सहायता मांगी. हालांकि सऊदी प्रिंस को ट्रंप से निराशा हाथ लगी, क्योंकि सऊदी प्रिंस के दो बार कॉल करने के बाद भी ट्रंप ने कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी. बता दें कि गुरुवार को सऊदी प्रिंस सलमान की ट्रंप से दो बार बात हुई. ट्रंप ने फिलहाल क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, हालांकि, सऊदी अरब को खुफिया सूचनाएं देने के लिए अमेरिका सहमत हो गया.
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