Ganesh Chaturthi 2026: गणपति बप्पा को क्यों चढ़ाते हैं 21 दूर्वा? जानें इसका धार्मिक महत्व
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी इस साल 14 सितंबर 2026 रो मनाई जाएगी. इस दौरान प्रथम पुज्य भगवान गणपति का जन्मोत्सव मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी का त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से चतुर्दशी तिथि तक मनाया जाता है. चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाता है. भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का खास महत्व होता है. दूर्वा की घास अत्यंत प्रिय मानी जाती है क्योंकि इस घास को पवित्र माना गया है. इसके बिना बप्पा की पूजा अधूरी मानी जाती है. आइए जानते हैं दूर्वा चढ़ाने का महत्व क्या है.
दूर्वा घास का गणेश पूजन में है विशेष स्थान
गणेश जी की पूजा में दूर्वा यानी की हरी घास का खास स्थान होता है. जिस तरह से गणेश जी का प्रिय भोग मोदक है, उसी प्रकार उन्हें दूर्वा भी अर्पित की जाती है. यह परंपरा सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं होती है. इसका संबंध गहरी आस्था से भी जुड़ा हुआ है. पौराणिक कथा के अनुसार, गणेश जी की गर्मी शांत करने के लिए उन्हें ये घासें चढ़ाई गई थी. अलग-अलग परंपराओं में बप्पा को 21 दूर्वा चढ़ाने के नियम है. दूर्वा का संबंध शरीर, मन, विचार और जीवन के तत्वों से जुड़ा हुआ है.
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क्या है 21 दूर्वा अर्पित करने की पौराणिक कथा?
ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा बताते हैं कि पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि एक बार अनलासुर नाम का एक भयंकर दैत्य था, जिसनें तीनों लोकों में अपना आतंक मचाया हुआ था. उसके तन से निकलने वाली अग्नि और उसके उग्र स्वभाव से देवता और ऋषि त्राहिमाम करने लगे थे. जब गणेश जी ने अनलासुर का वध किया था, तो उसके तेज से गणेश जी के शरीर में अत्यधिक गर्मी होने लगी. इस समस्या से गणेश जी को राहत दिलाने के लिए देवताओं ने अनेक उपाय किए, लेकिन गर्मी कम नहीं हो रही थी. तब ऋषियों ने उन्हें दूर्वा अर्पित की, जिससे उनका ताप कम हुआ. बस तभी से ही गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय मानी जाती है. दूर्वा हरी और कोमल घासें होती हैं, जो शीतलता और सात्विकता का प्रतीक है. इन्हें अर्पित करने से मन की अशांति दूर होती है और जीवन में शांति आती है. इसके अलावा, दूर्वा का संबंध चंद्रमा से भी माना जाता है, जो शांति और आयु का कारक है. इसलिए, गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने से दीर्घायु और सुख-समृद्धि आती है. इसलिए, गणेश चतुर्थी महोत्सव में प्रत्येक दिन उन्हें दूर्वा अर्पित की जाती है.
सिर्फ 21 की संख्या में ही क्यों चढ़ाई जाती है दूर्वा
21 नंबर संख्या का संबंध गणेश भगवान से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है. धर्म शास्त्रों में गणेश जी के कुल 21 नामों की व्याख्या है. इसलिए, 21 दूर्वा अर्पित करने का मतलब है कि गणेश जी के सभी रूपों और शक्तियों को प्रसन्न करना. इस संख्या को पूर्णता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. कुछ परंपराओं में 21 संख्या को पांच ज्ञानेंद्रियां, पांच कर्मेंद्रियां, पांच प्राण, पांच तत्व और मन का प्रतीक भी कहा जाता है. इसलिए, 21 दूर्वा गणेश जी को चढ़ाई जाने की परंपरा है.
बप्पा को कैसे चढ़ाएं 21 दूर्वा?
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. दूर्वा आपको साफ और ताजी लेनी चाहिए. कुछ पूजा पद्धतियों में आपको दूर्वा की छोटी-छोटी गांठों को गणेश जी को अर्पित करना होता है. अगर 21 दूर्वा अर्पित कर रहे हैं तो स्वच्छ घासों के भगवान गणेश के चरणों में रखें. इसके बाद गणेश जी के मंत्रों का जाप करें. आप ऊं गं गणपतये नम: मंत्र का जाप कर सकते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
BRICS सम्मेलन के चलते दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन, घर से निकलने से पहले जरूर पढ़ें एडवाइजरी
Delhi Traffic Advisory: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सुरक्षा और सुचारू संचालन को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है. भारत मंडपम और लुटियंस दिल्ली समेत मध्य दिल्ली के प्रमुख हिस्सों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. शनिवार को सुबह 9:30 बजे से रात 9:30 बजे तक कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित और परिवर्तित किया गया है.
एडवाइजरी मैप से रास्तों की स्थिति
यात्रियों की आसानी के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा जारी नक्शे में अलग-अलग रंगों के माध्यम से सड़कों की स्थिति को दर्शाया गया है. नीले रंग से उन वैकल्पिक रास्तों को चिन्हित किया गया है जिनका उपयोग यात्री कर सकते हैं. नारंगी रंग कंट्रोल्ड सड़कों को दर्शाता है जहाँ सीमित आवाजाही होगी, जबकि बैंगनी रंग पूरी तरह से प्रतिबंधित क्षेत्रों को दिखाता है. इसके अलावा लाल स्टार के संकेतों से उन जगहों को चिन्हित किया गया है जहाँ से ट्रैफिक को दूसरे रास्तों पर मोड़ा जाएगा.
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प्रभावित मार्ग और प्रमुख कॉरिडोर
सुरक्षा प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर प्रगति मैदान और भारत मंडपम के आसपास के इलाकों में देखने को मिलेगा. इसके अलावा उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम दिल्ली को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों पर भी यातायात नियमित रहेगा. लुटियंस दिल्ली के कई हिस्सों में आम गाड़ियों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. जिन प्रमुख सड़कों पर यह प्रभाव पड़ेगा उनमें रिंग रोड, मथुरा रोड, भैरों मार्ग, तिलक मार्ग, इंडिया गेट सी-हेक्सागन, सरदार पटेल मार्ग, पटेल रोड, नेशनल हाईवे 48 और परेड रोड शामिल हैं.
BRICS Summit 2026
— Delhi Traffic Police (@dtptraffic) September 11, 2026
TRAFFIC ADVISORY
???? In view of the BRICS Summit on September 12, 2026, traffic diversions and regulated movement will be implemented on key routes across Delhi from 09:30 hrs to 21:00 hrs.
•Commuters are advised to plan their journeys in advance and allow… pic.twitter.com/GEnMwImyS9
सार्वजनिक परिवहन और जरूरी सेवाओं के निर्देश
पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से असुविधा से बचने के लिए अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाने का अनुरोध किया है. निजी वाहनों के बजाय मेट्रो सेवा का उपयोग करने की विशेष सलाह दी गई है ताकि सड़कों पर दबाव कम रहे. हालांकि, आपातकालीन वाहनों और आवश्यक सेवाओं में लगे वाहनों को बिना किसी रुकावट के प्राथमिकता के आधार पर जाने की अनुमति रहेगी.
एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पहुंचने के विकल्प
नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के साथ-साथ एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के लिए विशेष वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं. हवाई सफर करने वाले यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे उड़ान के समय से काफी पहले निकलें और संभव हो तो मेट्रो का सहारा लें. इसके अलावा, दिल्ली से बाहर से आने वाले ऐसे कमर्शियल वाहन जिनका दिल्ली में कोई गंतव्य नहीं है, उनके प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है.
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