प्रधानमंत्री आवास योजना अर्बन नए माइलस्टोन के करीब, बनाए गए 20 लाख घर, शहरी गरीबों को हुआ फायदा
प्रधानमंत्री आवास योजना अर्बन 2.0 (पीएमएवाई-यू 2.0) करीब 20 लाख घरों को मंजूरी देने के आंकड़े के करीब पहुंच गया है. यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई. अब तक करीब 18.77 लाख घरों को मंजूरी दी जा चुकी हैं और इससे शहरी गरीबों के लिए किफायती, सुरक्षित और पक्का घर सुनिश्चित हुआ है. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ये मंजूरियां ‘सभी के लिए घर’ की दिशा में एक अहम कदम हैं, जिससे ज्यादा शहरी परिवार सुरक्षित घर के मालिक बनने और बेहतर भविष्य बनाने की ओर बढ़ सकेंगे.
अब तक 18.77 लाख घरों को मिली मंजूरी
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) ने पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत कुल 18.77 लाख घरों को मंजूरी दी है, जिससे इस योजना के कार्यान्वयन को और बढ़ावा मिला है और शहरी क्षेत्रों में 'सभी के लिए आवास' की दिशा में प्रगति तेज हुई है. पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत मंजूर किए गए 18.77 लाख घरों में से 17.19 लाख घर (92 प्रतिशत) महिलाओं को आवंटित किए गए हैं.
एमओएचयूए के शहरी विकास विभाग के सचिव ने दी जानकारी
एमओएचयूए के शहरी विकास विभाग के सचिव सतेंद्र सिंह ने कहा कि पीएमएवाई-यू 2.0 को समय पर और प्रभावी ढंग से लागू करने और उसकी निगरानी के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि इस योजना का लाभ सभी पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सके. उन्होंने आगे कहा कि किसी भी तरह की रुकावटों की तुरंत पहचान की जानी चाहिए और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बातचीत करके उन्हें दूर किया जाना चाहिए.
लाभार्थियों को मिल रही पक्के मकान की सुविधा
पीएमएवाई-यू 2.0 का मकसद अपने अलग-अलग वर्टिकल के जरिए शहरी इलाकों में रहने वाले योग्य ईडब्ल्यूएस/एलआईजी और एमआईजी परिवारों को घर बनाने में मदद देना है. सरकार के मुताबिक, इस स्कीम के तहत लाभार्थी अपना पक्का घर बना सकते हैं, स्कीम के तहत बने प्रोजेक्ट्स में घर खरीद सकते हैं, किफायती किराए के घर का लाभ उठा सकते हैं, या योग्य होम लोन पर ब्याज सब्सिडी का फायदा ले सकते हैं. इस तरह, उन्हें उनकी जरूरतों, पात्रता और आर्थिक हालात के हिसाब से कई तरह के हाउसिंग विकल्प मिलते हैं.
बुजुर्गों को भी मिल रहा योजना का लाभ
पीएमएवाई-यू 2.0, पीएमएवाई-यू के तहत हुई लगातार प्रगति को आगे बढ़ाता है. कुल मिलाकर, पीएमएवाई-यू और पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत 1.25 करोड़ से ज्यादा घरों को मंजूरी दी गई है और 1 करोड़ से ज्यादा घर बनकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं. सबको साथ लेकर चलने और समाज के कमजोर वर्गों तक योजना का फायदा पहुंचाने के लिए, बुजुर्गों को 1.80 लाख घर आवंटित किए गए हैं. एससी लाभार्थियों के लिए लगभग 3.25 लाख, एसटी लाभार्थियों के लिए 1.02 लाख और ओबीसी लाभार्थियों के लिए 8.22 लाख घरों को मंजूरी दी गई है.
स्रोत- आईएएनएस
जीत के जुनून में घोड़ों वाला स्टेरॉयड लगा बैठे दो युवक, दौड़ खत्म होते ही बिगड़ी हालत
Agra Horse Injection Case: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां दौड़ प्रतियोगिता जीतने के फेर में दो युवकों की जान पर बन आई. जिले के खेरागढ़ क्षेत्र स्थित अऐला गांव में छह किलोमीटर की एक मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया था. इस प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने और प्रथम स्थान हासिल करने के जुनून में दो प्रतिभागी युवकों ने घोड़ों को दिया जाने वाला खतरनाक स्टेरॉयड इंजेक्शन लगा लिया. दौड़ समाप्त होते ही दोनों धावकों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और वे चक्कर खाकर मैदान में ही गिर पड़े. इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आयोजकों तथा स्थानीय लोगों ने तुरंत दोनों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया.
दोनों युवक सेना में भर्ती होने की कर रहे तैयारी
ग्रामीण क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और युवाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मैराथन कमिटी द्वारा इस दौड़ का आयोजन गुरुवार सुबह किया गया था. प्रतियोगिता में युवाओं को आकर्षित करने के लिए नकद पुरस्कार भी रखे गए थे, जिसमें प्रथम पुरस्कार 2100 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 1100 रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 551 रुपये तय किया गया था. इसके अलावा शीर्ष दस में स्थान बनाने वाले धावकों को मेडल दिए जाने थे. इस आयोजन में 11वीं कक्षा का छात्र 16 वर्षीय श्यामवीर सिकरवार और स्नातक की पढ़ाई कर रहा 22 वर्षीय गौरव भी शामिल हुए थे. किसान परिवारों से ताल्लुक रखने वाले ये दोनों युवक भारतीय सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे हैं और रोजाना कड़ा शारीरिक अभ्यास करते हैं.
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जीत के जुनून में किया स्टेरॉयड का खतरनाक इस्तेमाल
पुरस्कार जीतने और दौड़ के दौरान थकावट से बचने के लिए दोनों युवाओं ने एक बेहद खतरनाक कदम उठाया. उन्होंने प्रतियोगिता शुरू होने से ठीक पहले घोड़ों के लिए इस्तेमाल होने वाले स्टेरॉयड इंजेक्शन की 3 एमएल खुराक अपने शरीर में लगा ली. स्टेरॉयड के प्रभाव में दोनों ने दौड़ तो पूरी कर ली, जिसमें श्यामवीर ने दूसरा और गौरव ने चौथा स्थान प्राप्त किया. हालांकि, जैसे ही फिनिशिंग लाइन पार हुई, दवा के दुष्प्रभावों के कारण उनका शरीर जवाब दे गया और उन्हें तेज घबराहट के साथ सांस लेने में तकलीफ होने लगी.
अब खतरे से बाहर दोनों युवक
युवकों के मैदान पर गिरते ही उनके साथियों और कमिटी के सदस्यों ने उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खेरागढ़ में भर्ती कराया. डॉक्टरों की टीम ने करीब दो घंटे तक दोनों का गहन उपचार किया, जिसके बाद उनकी स्थिति में सुधार आया और उन्हें खतरे से बाहर बताया गया. होश में आने के बाद दोनों युवकों ने स्वीकार किया कि प्रदर्शन बेहतर करने के चक्कर में उनसे यह गंभीर भूल हुई थी. वहीं मैराथन कमिटी के सदस्यों का कहना है कि ग्रामीण युवाओं को मंच देने के लिए इस तरह की प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं, लेकिन प्रतिभागियों द्वारा उठाया गया यह गैर-जिम्मेदाराना कदम बेहद चिंताजनक है.
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