IIT BHU से पढ़ाई, मां के निधन के बाद नहीं मानी हार, 22 की उम्र में बनें बिहार के सबसे युवा SDM
कहते हैं कि अगर ईमानदारी से मेहनत की जाए, तो मंजिल हासिल करने में ज्यादा देर नहीं लगती है। एक ऐसी ही कहानी है बिहार के युवा एसडीएम नसीन कुमार निशांत की। जिन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया।
इटली की नेता और पूर्व विदेश मंत्री बोनिनो का निधन:महिलाओं के हक पर पोप से टकरा गई थीं एमा; 48 साल पुराना एबॉर्शन कानून बदलवाया
इटली की पूर्व विदेश मंत्री एमा बोनिनो को एक ऐसी महिला के रूप में याद किया जाएगा, जिसने अपनी निजी पीड़ा को लाखों महिलाओं के अधिकार की लड़ाई बना दिया। 26 साल की उम्र में जब उनका गर्भपात हुआ, तब इटली में यह गैरकानूनी था। इसके बाद उन्होंने तय किया कि दूसरी महिलाओं को एबॉर्शन के अपमान और असुरक्षित हालात से नहीं गुजरना पड़े। यूरोपीय आयुक्त भी रह चुकीं इटली की कद्दावर नेता एमा अपनी तीखी टिप्पणियों और मानवाधिकारों के प्रति अटूट निष्ठा के लिए जानी जाती थीं। उनका 78 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को निधन हो गया। उनकी पार्टी ‘मोर यूरोप’ ने कहा कि देश ने सबसे दूरदर्शी, साहसी और स्वतंत्र सोच वाली नेता को खो दिया है। जानते हैं उनके राजनीतिक संघर्ष... निजी पीड़ा को बनाया इटली में क्रांति का नया हथियार - 1974 में जब इटली में गर्भपात गैरकानूनी था, तब 26 वर्षीय एमा ने एक क्लिनिक में गर्भपात कराया। - गर्भपात पर प्रतिबंध वाले 48 साल पुराने कानून के विरोध में पुलिस के सामने समर्पण किया। अपनी गिरफ्तारी से उपजी लहर को जनआंदोलन बनाया। - दबाव में संसद ने 1978 में 48 साल पुराने 1930 के कानून को बदलते हुए गर्भपात को कानूनी मान्यता दी। इससे पहले तलाक का कानून भी बनाया गया था। एमा ने कभी विवाह नहीं किया। एबॉर्शन के सवाल पर वेटिकन से भी टकराव रहा एमा ने वेटिकन चर्च के कड़े विरोध के बावजूद गर्भपात और तलाक को कानूनी दर्जा दिलवाने के अभियानों का नेतृत्व किया। महिला अधिकारों पर टकराव के बावजूद पोप फ्रांसिस के साथ उनकी अनूठी और गहरी दोस्ती भी थी। पोप फ्रांसिस अक्सर उनकी मानवीय पहलों की सराहना करते थे और उन्हें सबसे कमजोर तबके की आवाज उठाने वाली नेता कहते थे। कैंसर के बावजूद सक्रिय रहीं - 2015 में कैंसर का पता चलने के बाद भी एमा ने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। वह रंग-बिरंगे स्कार्फ पहनकर संसद से लेकर टीवी डिबेट्स में मानवाधिकारों की आवाज बुलंद करती रहीं। आखिरी बात: लड़ाइयां अभी बहुत हैं - बीमारी के बीच जब उनसे पूछा गया कि कौन सी लड़ाई बाकी है, तब कहा था, ‘बहुत सारी, जरूरत से भी ज्यादा- मानवाधिकार, वैश्विक भूख और स्वतंत्र वैज्ञानिक शोध। दस जन्म भी कम पड़ेंगे।’
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