नंबर 9 पर उतरकर रज़ाउल्लाह ने उड़ाए 9 Sixes, डेब्यू मुकाबले में 81 रन बनाकर रचा इतिहास
पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ रज़ाउल्लाह को एजबेस्टन में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपने टेस्ट डेब्यू पर निडर होकर 81 रन बनाने के लिए खड़े होकर सम्मान (स्टैंडिंग ओवेशन) दिया गया; उनकी इस पारी ने मैच में नई जान डाल दी और मेज़बान टीम के सामने जीत के लिए एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। नंबर 9 पर बल्लेबाज़ी करते हुए, 21 वर्षीय खिलाड़ी ने 63 गेंदों की तेज़ पारी में नौ छक्के लगाए, जिससे पाकिस्तान को पारी की हार के कगार से उबरने में मदद मिली। उनकी पारी की बदौलत अंतिम टेस्ट के तीसरे दिन पाकिस्तान का कुल स्कोर 449 तक पहुँच गया और इंग्लैंड को जीत के लिए 130 रन का लक्ष्य मिला।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में रज़ाउल्लाह ने कहा कि मुझे स्टैंडिंग ओवेशन (खड़े होकर सम्मान देना) बहुत अच्छा लगा। मुझे ज़िंदगी का मज़ा लेना पसंद है और मैं उस पल का आनंद ले रहा था। उन्होंने इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ों—जोफ्रा आर्चर, गस एटकिंसन और जोश टोंग—का आत्मविश्वास के साथ सामना किया। उन्होंने बार-बार शॉर्ट गेंदों पर शॉट खेले, जबकि इसी तरह की गेंदों ने इस सीरीज़ में पाकिस्तान के कई स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ों को परेशान किया था।
उन्होंने आगे कहा कि मैं सोच-समझकर तय कर रहा था कि किन गेंदों पर ज़ोरदार शॉट (स्लॉग) लगाने हैं, लेकिन वे सभी मेरी पहुँच में लग रही थीं। मैं पारी को जितना हो सके उतना आगे तक ले जाना चाहता था। मुझे तेज़ गति से डर नहीं लग रहा था। मैं आर्चर की उन गेंदों पर कड़ा प्रहार करना चाहता था जो हार्ड लेंथ पर आ रही थीं। जब आप अपने देश के लिए खेल रहे हों, तो डरने की कोई बात नहीं होती। मैं बस खेल का मज़ा ले रहा था।
रज़ाउल्लाह ने सिर्फ़ 43 गेंदों में अपनी फ़िफ़्टी पूरी की, जो टेस्ट डेब्यू पर किसी पाकिस्तानी बल्लेबाज़ द्वारा लगाई गई सबसे तेज़ हाफ़-सेंचुरी थी। उन्होंने छक्का लगाकर यह मुकाम हासिल किया और अपना आक्रामक अंदाज़ बनाए रखा, जबकि इंग्लैंड के गेंदबाज़ उन्हें रोकने के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने कहा कि मुझे शॉर्ट बॉल का सामना करना सबसे ज़्यादा पसंद है। मुझे बस खुद पर भरोसा था। मैंने सोचा कि अगर मैं 50 गेंदें खेल लूँ, तो मुझे अच्छा नतीजा मिलेगा। और अच्छी बात यह है कि ऐसा ही हुआ।
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उन्होंने मोहम्मद अब्बास के साथ 121 रनों की अहम साझेदारी की। अब्बास ने 42 रन बनाए और इंग्लैंड की मैच को जल्दी खत्म करने की कोशिशों को नाकाम कर दिया। आखिरकार टंग ने अब्बास को आउट किया और उसके कुछ ही देर बाद रज़ाउल्लाह भी आउट हो गए, जो अपने पहले टेस्ट शतक से बस थोड़ा ही दूर रह गए थे।
Health Tips: बड़ी आंत में संक्रमण से होता है Diverticulitis, पेट दर्द और बुखार को न करें इग्नोर
पेट के निचले बाईं ओर लगातार होने वाले दर्द को सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। हालांकि कई बार यह दर्द सामान्य गैस, मांसपेशियों में खिंचाव या कब्ज की वजह से हो सकती है। लेकिन लगातार यह दर्द रहने से या दर्द तेज होने से और इसके साथ कब्ज, मतली, फीवर और दस्त आदि के लक्षण दिखते हैं, तो यह डाइवर्टिकुलाइटिस का संकेत भी हो सकता है। डाइवर्टिकुलाइटिस बड़ी आंत की दीवार में बनी छोटी थैलियों में सूजन या फिर संक्रमण से होने वाली स्थिति होती है, जिसका समय रहते इलाज होना जरूरी होता है।
पेट के निचले बाईं ओर दर्द होना
लोअर लेफ्ट एब्डॉमिनल पेन के होने की कई वजह हो सकती हैं। इनमें कुछ सामान्य तो कुछ गंभीर वजहें हो सकती हैं
कब्ज
डाइवर्टिकुलाइटिस
किडनी स्टोन
इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम
आंतों में संक्रमण
मांसपेशियों में खिंचाव
महिलाओं में ओवेरियन सिस्ट या एंडोमेट्रियोसिस
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कैसे करें डाइवर्टिकुलाइटिस की पहचान
बता दें कि डाइवर्टिकुलाइटिस तब होता है, जब बड़ी आंत में मौजूद छोटी थैलियों में संक्रमण या सूजन हो जाती है। अक्सर यह समस्या सिग्मॉइड कोलन में होती है। जोकि पेट के बाएं ओर होता है। यही कारण है कि दर्द ज्यादातर पेट के निचले बाएं हिस्से में महसूस होता है।
वहीं अगर लगातार दर्द बना रहता है, दबाने पर दर्द बढ़ता है और साथ ही फीवर लगता है, तो डॉक्टर डाइवर्टिकुलाइटिस की संभावना की जांच कर सकते हैं।
जानें डाइवर्टिकुलाइटिस, IBS और किडनी स्टोन में अंतर
डाइवर्टिकुलाइटिस होने पर कब्ज, दस्त, बुखार और पेट में सूजन की समस्या हो सकती है। इसमें लगातार और एक ही जगह पर विशेषकर बाईं ओर दर्द बना रहता है।
IBS यानी की इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या होने पर पेट फूलना, गैस, मल त्याग के बाद राहत और रुक-रुक कर दर्द हो सकता है।
किडनी की स्टोन होने पर इसके लक्षणों में पेशाब में खून, जलन, कमर से लेकर पेट तक दर्द और अचानक से शुरू होने वाला तेज और वेवी दर्द होता है।
अगर दर्द के अलावा पेशाब संबंधी लक्षण हों, तो किडनी स्टोन होने की संभावना अधिक हो सकती है। वहीं सिर्फ मल त्याग के बाद राहत मिलने वाला दर्द IBS में देखा जाता है।
किन लोगों में डाइवर्टिकुलाइटिस का अधिक खतरा
50 वर्ष या उससे अधिक उम्र
कम फाइबर वाली डाइट
धूम्रपान
मोटापा
फिजिकल एक्टिविटी की कमी
लंबे समय तक NSAIDs का अधिक इस्तेमाल
फैमिली में डाइवर्टिकुलर डिजीज का इतिहास
डाइवर्टिकुलर डिजीज को पहले बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन हाल ही के सालों में कम उम्र के लोगों में इसके मामले बढ़ रहे हैं।
डाइवर्टिकुलाइटिस का इलाज
हल्के मामलों में डॉक्टर आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ, कुछ समय के लिए लो-फाइबर डाइट और जरूरत के हिसाब से दवाएं देने की सलाह दे सकते हैं। अगर संक्रमण गंभीर हो, आंत में छेद हो जाए या फोड़ा बन जाए, तो हॉस्पिटल में एडमिट और कभी-कभी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। वहीं बिना डॉक्टर की सलाह के बिना दर्द की दवा या एंटीबायोटिक नहीं लेना चाहिए।
पेट के बाएं और निचले हिस्से में दर्द होना हमेशा कब्ज या सामान्य गैस का संकेत नहीं होता है। अगर लगातार दर्द बना रहता है, मतली, बुखार, कब्ज या दस्त भी आ रहे हों, तो यह डाइवर्टिकुलाइटिस जैसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। कई बार डाइवर्टिकुलाइटिस, IBS और किडनी स्टोन के लक्षण मिलते-जुलते लग सकते हैं। इसलिए सही जानकारी के लिए डॉक्टर से चेकअप जरूर करना चाहिए।
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